गाजियाबाद में वाल्मीकि समाज के 236 लोगों ने अपनाया बौद्ध धर्म
करहेड़ा गांव में 236 वाल्मीकि समाज के लोगों ने बौद्ध धर्म को अपना लिया है। इस घटना के बाद शुरुआत में तो पुलिस प्रशासन इससे इनकार कर रहा था, लेकिन अब आला अधिकारी मौके पर पहुंंचकर लोगों को समझाने का प्रयास कर रहे हैं।
वाल्मीकि समाज के लोगों का आरोप है कि गांव में रहने वाले कुछ लोग उनके साथ जातीय उत्पीड़न करते हैं, इसके चलते उन लोगों ने 14 अक्तूबर को बौद्ध धर्म अपना लिया।
@ghaziabadpolice की कार्यवाही https://t.co/1772lQOUGX
— News & Features Network-Regional News (@mzn_news) October 21, 2020
इसके साथ ही बौद्ध धर्म अपनाने वाले लोगों में हाथरस में हुई दुष्कर्म की घटना को लेकर भी नाराजगी है।
यही नहीं उन्होंने बेरोजगारी और आर्थिक तंगी को भी अपने धर्म परिवर्तन का कारण बताया है। शुरुआत में पुलिस का कहना था कि, मामला संज्ञान में आया है, मामले की जांच की जा रही है अब तक मामले की पुष्टि नहीं हुई है।
करहेड़ा स्थित वाल्मीकि बस्ती में करीब 50 परिवार के 236 लोगों ने बौद्ध धर्म अपनाया जिसकी सूचना मिलने के बाद डीएम अजय शंकर पांडेय और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे हैं।
परिवार के लोगों से बातचीत के बाद समाधान का आश्वासन दिया है। अभी मौके पर एडीएम सिटी शैलेंद्र सिंह और पुलिस के अन्य अधिकारी मौजूद हैं। धर्म परिवर्तन करने के पीछे लोगों ने हाथरस कांड में दलित परिवार पर उत्पीड़न और अत्याचार का आरोप भी लगाया है।
बाबा साहेब अंबेडकर के पढ़पोते से मिलने के बाद अपनाया बौद्ध धर्म
करहेड़ा में बौद्ध धर्म अपनाने वाले बस्ती के निवासी पवन वाल्मीकि(अब पवन बौद्ध) ने बताया कि बीती 13 अगस्त को वह मुंबई में अपना इलाज कराने गए थे। इसी दौरान उनकी मुलाकात डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के पढ़पोते राजरत्न आंबेडकर से हुई।
वहां पर पवन ने बौद्ध धर्म की 22 प्रतिज्ञा लेकर धर्म परिवर्तन कर लिया। उसके बाद 14 अक्तूबर को वाल्मीकि बस्ती में ही 235 अन्य लोगों ने भी कार्यक्रम आयोजित कर धर्म परिवर्तन कर लिया। बुधवार सुबह मामले की सूचना मिलने पर प्रशासन और पुलिस अधिकारियों में हड़कंप मच गया।
आनन-फानन में डीएम अजय शंकर पांडेय और एडीएम सिटी शैलेंद्र सिंह व अन्य अधिकारी मौके पर पहुंचे। जहां उन्होंने परिवार के लोगों से बातचीत की।
