भारतीय योग संस्थान के तत्वावधान में गोष्ठी का आयोजन किया
मुजफ्फरनगर। भारतीय योग संस्थान के तत्वावधान में संचालित निःशुल्क योग साधना केंद्र ग्रीन लैंड माडर्न जू०हाई स्कूल मुजफ्फरनगर में रविवार को योग साधना के उपरांत योग क्या?
विषय पर गोष्ठी का आयोजन किया गया जिसकी अध्यक्षता संस्थान के प्रान्तीय कार्यकारिणी सदस्य योगाचार्य सुरेन्द्र पाल सिंह आर्य ने की। जिला प्रधान राजसिह पुण्डीर ने कहा कि योग का सीधा सीधा अर्थ जोड़ से है अर्थात आत्मा का परमात्मा से जोड। महर्षि पतंजलि ने योगसूत्र में योग को युज समाधौ से परिभाषित किया है।
केवल आसन और प्राणायाम करना योग नहीं है। यम,नियम, आसन, प्राणायाम,प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि योग के आठ अंग होते हैं। योग शिक्षक और जिला कार्यकारिणी सदस्य यज्ञ दत्त आर्य ने कहा कि आर्य समाज का प्रथम नियम सब सत्य विद्या और जो पदार्थ विद्या से जाने जाते हैं उन सबका आदि मूल परमेश्वर है।योग हमें अपने स्वरूप का ज्ञान कराता है। योग एक सुखी जीवन जीने की कला है।
योगाचार्य सुरेन्द्र पाल सिंह आर्य ने कहा कि केवल कुछ आसन और प्राणायाम कर लेना ही योग नहीं है।आज वर्तमान में योग के स्थान पर योगा शब्द अधिक सुनने में आता है।
इस योगा का व्यवहारिक रूप सामने यह आ रहा है कि जब व्यक्ति सांसारिक भोगो को सुख की इच्छा से अमर्यादित भोगने पर रोगी हो जाता है तब कुछ शारीरिक व्यायामादि आसनो को करके भोगो को भोगने की क्षमता पुनः प्राप्त करने को योगा कहा जा रहा है
अर्थात भोगो की इच्छा से प्रेरित व्यक्ति जब भोगने की क्षमता प्राप्त कर लेवे उसको योगा कहते हैं।परंतु योग शब्द का तो अलग ही तात्पर्य है सामान्य भाषा में योग को जोड़ कहते हैं परन्तु दर्शन शास्त्र में योग वह शब्द है जो युज समाधौ धातु से बना है जिसका अर्थ समाधि है। समाधि का अर्थ ईश्वर के स्वरूप में मग्नता से है।
महर्षि पतंजलि ने समाधि पाद के दूसरे सूत्र में योग को परिभाषित करते हुए लिखा है कि चित्त की वृत्तियों का निरोध करना ही योग है।योग से जीवन में आरोग्यता के साथ साथ अनुशासन,प्रेम,परोपकार सदाचार,निर्भयता,दया,करूणा ,सहनशीलता आदि मानवीय गुणों का विकास होता है।
योग एक सुखी एवं उत्तम जीवन जीने की कला है।इस अवसर पर सत्यवीर सिंह पंवार,राजपाल ,वीरसिह,कुलदीप अरोरा,क्षेत्रीय प्रधान राजीव रघुवंशी,राजकिशोर,श्रीमती अनीता चौधरी,कामेश मलिक,पूजा गर्ग आदि साधक एवं साधिकाओं ने भाग लिया।
