मनुष्य को क्रोध से बचना चाहिएः विद्यासागर जी महाराज
मुजफ्फरनगर। संत शिरोमणि आ०श्री १०८ विद्यासागर जी महाराज के आज्ञानुवर्ती शिष्य मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज ने अपनी देशना में बताया कि क्रोध के ३ स्टेप है पहला शूटिंग एन्गर जिसमे व्यक्ति अपना क्रोध बाहर निकालता है दुसरो पर चिल्लाता है
दूसरे स्टेप में वह क्रोध करके अंदर ही अंदर अपने मन में क्रोध दबाये रखता है जिसे कहते है साइलेंट एन्गर और तीसरी स्थिति जिसे कहते है कार्मिक एन्गर जिसमे हम अपने ज्ञान से जान पाए कि क्रोध करना हमारी आत्मा का वास्तविक स्वभाव नही है
ये मात्र कर्मा के संयोग से हमारी आत्मा को क्रोध करना पड़ रहा है तो हम क्रोध के समय इस तीसरी स्थिति में नही पहुच पाते मात्र क्रोध करके अथवा क्रोध को अपने अंदर दबाकर ही रह जाते है
मुनि श्री ने बताया के बहुत बार ऐसा होता है के बने बनाये काम को भी क्रोधी व्यक्ति बिगाड़ देता है अतः क्रोधी व्यक्ति से सभी डरते है क्योंकि क्रोधी व्यक्ति उबलते हुए जल के समान होता है
जिससे जलने के खतरा बना रहता है मुनि श्री बताया,,जिस प्रकार कीड़ा हो जाने पर जब तक अंदर से उसकी सफाई करके कील न निकाल दी जाए तब तक वो ठीक नही होता ।
इसी प्रकार जब तक आत्मा से कर्मा की सफाई अंतरंग से नही होती तब तक आत्मा स्वस्थ नही रह सकता । अनादिकाल से आत्मा पर जो कर्मा की धूलि लगी हुई है
उसकी चादर बन चुकी है , उसके हटाये बिना आत्मा का प्रकाश उत्पन नही हो सकता । अतः आवश्यक है कि आत्मा की धूलि साफ करें और आत्मा को आईने के समान उज्ज्वल बनाये।
अध्यक्ष विनोद जैन बैंक वाले महामंत्री विपिन जैन नावला वाले उपाध्यक्ष सुशील जैन दाल वाले मंत्री अनुज जैन वहलना वाले अक्षत जैन जैन समाज के लोग उपस्थित रहे।

