Manipur: जिरीबाम में उग्रवाद और जातीय हिंसा, संदिग्ध उग्रवादियों ने पुलिस चौकी और कई घरों में लगाई आग
Manipur: अधिकारियों ने बताया कि उग्रवादियों ने शुक्रवार देर रात करीब 12:30 बजे बराक नदी के किनारे चोटोबेकरा इलाके में स्थित जिरी पुलिस चौकी को आग के हवाले कर दिया था. राज्य की राजधानी इंफाल से लगभग 220 किलोमीटर दूर स्थित जिले के मोधुपुर क्षेत्र के लामताई खुनौ में पहाड़ी क्षेत्र के संदिग्ध उग्रवादियों ने अंधेरे का फायदा उठाकर कई हमले किए.
जिरीबाम के जिलाधिकारी ने बताया कि जिरीबाम के बाहरी इलाके के कई घरों में आग लगा दी गई, हालांकि अभी सटीक संख्या की पुष्टि नहीं की जा सकती. पुलिस ने बताया कि उग्रवादियों के खिलाफ सुरक्षा अभियान में सहायता के लिए मणिपुर पुलिस की एक कमांडो टुकड़ी को शनिवार सुबह इंफाल से जिरीबाम भेजा गया.
आंतरिक मणिपुर लोकसभा सीट से नवनिर्वाचित कांग्रेस सांसद अंगोमचा बिमोल अकोईजाम ने राज्य सरकार से जिरीबाम जिले के लोगों के जीवन और संपत्तियों की रक्षा करने का आग्रह किया है. अकोईजाम ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, मैंने जिरीबाम के जिला अधिकारियों से बात की है. उन्होंने कहा कि वहां अतिरिक्त सुरक्षाकर्मी पहुंच गए हैं. शहर में रहने वाले लोगों को भी सुरक्षा दी जा रही है, लेकिन शहर के सीमाई क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सुरक्षा नहीं दी जा रही है.
अधिकारियों ने शनिवार को बताया कि जिरीबाम जिले में उग्रवादियों द्वारा कथित तौर पर एक व्यक्ति की हत्या किए जाने पर भड़की हिंसा के बाद यहां के लगभग 239 लोगों को उनके गांवों से निकाल कर जिरी शहर के खेल परिसर में स्थापित किए गए नए शिविरों में भेजा गया. इनमें ज्यादातर महिलाएं और बच्चे शामिल हैं. जिरीबाम जिले में संदिग्ध उग्रवादियों द्वारा 59 वर्षीय एक व्यक्ति की हत्या किए जाने पर हुए विरोध-प्रदर्शन के बाद छह जून को जिला प्रशासन ने वहां अनिश्चित काल के लिए कर्फ्यू लगा दिया था. जिरीबाम जिले में हुई हत्या से यहां ताजा जातीय हिंसा भड़क उठी है जबकि अभी तक यह क्षेत्र हिंसा से अप्रभावित रहा था.
मणिपुर में उग्रवाद और जातीय हिंसा एक गंभीर समस्या बन चुकी है। हाल ही में, जिरीबाम जिले में बराक नदी के किनारे स्थित जिरी पुलिस चौकी को उग्रवादियों द्वारा आग के हवाले कर दिया गया। इस हमले के परिणामस्वरूप कई घरों में आग लगाई गई और सैकड़ों लोग बेघर हो गए। यह घटना मणिपुर की राजधानी इंफाल से लगभग 220 किलोमीटर दूर स्थित मोधुपुर क्षेत्र के लामताई खुनौ में घटी, जहां पहाड़ी क्षेत्र के संदिग्ध उग्रवादियों ने अंधेरे का फायदा उठाकर कई हमले किए।
समाज पर प्रभाव
उग्रवाद और जातीय हिंसा ने मणिपुर के समाज पर गहरा प्रभाव डाला है। जिरीबाम के बाहरी इलाके के कई घरों में आग लगा दी गई और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाना पड़ा। महिलाओं और बच्चों समेत लगभग 239 लोगों को उनके गांवों से निकाल कर जिरी शहर के खेल परिसर में स्थापित किए गए नए शिविरों में भेजा गया। हिंसा के कारण लोगों का जीवन प्रभावित हो रहा है, और उनके लिए सुरक्षित स्थानों की व्यवस्था करना आवश्यक हो गया है।
इस तरह की हिंसा और उग्रवाद से जुड़े नैतिक मुद्दे भी महत्वपूर्ण हैं। जब निर्दोष लोगों के घर जलाए जाते हैं और उन्हें बेघर किया जाता है, तो यह समाज के नैतिक ताने-बाने को कमजोर करता है। बच्चों और महिलाओं को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने की आवश्यकता बताती है कि समाज के सबसे कमजोर वर्ग किस प्रकार इन घटनाओं से प्रभावित होते हैं। इसके अलावा, उग्रवादियों द्वारा 59 वर्षीय व्यक्ति की हत्या ने ताजा जातीय हिंसा को भड़का दिया, जिससे मणिपुर का सामाजिक ताना-बाना और अधिक कमजोर हो गया है।
राजनीतिक परिप्रेक्ष्य
उग्रवाद और हिंसा के मुद्दों को राजनीतिक दृष्टिकोण से भी देखा जा सकता है। आंतरिक मणिपुर लोकसभा सीट से नवनिर्वाचित कांग्रेस सांसद अंगोमचा बिमोल अकोईजाम ने राज्य सरकार से जिरीबाम जिले के लोगों के जीवन और संपत्तियों की रक्षा करने का आग्रह किया है। उनके अनुसार, शहर के सीमाई क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सुरक्षा नहीं दी जा रही है, जो कि सरकार की नीतियों और उनके कार्यान्वयन पर सवाल उठाता है।
मणिपुर में पिछले साल मई से जारी जातीय हिंसा ने 200 से अधिक लोगों की जान ले ली है और हजारों लोगों को बेघर कर दिया है। मेइती, मुस्लिम, नागा, कुकी और गैर-मणिपुरी लोगों के बीच हिंसा के कारण समाज में विभाजन बढ़ता जा रहा है। जातीय हिंसा के कारण लोगों के बीच आपसी विश्वास की कमी हो रही है, और यह समाज के विकास में बाधा बन रही है।
समाधान और आगे की राह
मणिपुर में उग्रवाद और जातीय हिंसा के समाधान के लिए समाज, सरकार और राजनीतिक नेताओं को मिलकर काम करने की आवश्यकता है। सरकार को सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना चाहिए और सभी नागरिकों को सुरक्षा प्रदान करनी चाहिए, चाहे वे शहर के अंदर हों या सीमाई क्षेत्रों में। समाज को भी आपसी भाईचारे और विश्वास को बढ़ावा देना चाहिए ताकि इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
मणिपुर में उग्रवाद और जातीय हिंसा ने समाज पर गहरा प्रभाव डाला है। नैतिक मुद्दे और राजनीतिक दृष्टिकोण से इस समस्या को हल करने के लिए सभी को मिलकर प्रयास करने की आवश्यकता है। समाज में शांति और सद्भाव बनाए रखने के लिए सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना और आपसी विश्वास को बढ़ावा देना अत्यंत महत्वपूर्ण है।

