दिल से

World Environment Day (अंतराष्ट्रीय पर्यावरण दिवस): धरती को सुरक्षित बनाने के लिए हम सबको उठानी होगी जिम्मेदारी

हर साल 5 जून को मनाया जाने वाला World Environment Day (अंतराष्ट्रीय पर्यावरण दिवस) इस वर्ष “भूमिगत जल संरक्षण” के रूप में आयोजित किया गया। इस वर्ष की थीम “Land Restoration, desertification and Drought resilience” अर्थात “धरती का सूखना और मरूस्थल का बढ़‌ना” के रूप में चुनी गई है। पिछले साल 2023 में “Solution for plastic pollution” अर्थात “प्लाष्टिक कचरे युक्ति” की थीम रखी गई थी, जिसमें प्लास्टिक से होने वाले नुकसान को लेकर जागरूकता फैलाई गई थी।

इस वर्ष की मुहिम का नेतृत्व सउदी अरब ने अपने ऊपर लिया है। लेकिन विकास के नाम पर हो रहे उपेक्षा के बावजूद, अब तो सबको समझ आ चुका है कि धरती के संरक्षण में हम सभी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

आज के युग में, जहां अधिकांश लोग आराम के लिए A.C. के बंद कमरों में बैठे रहते हैं, ऐसे मुद्दों को समझने की आवश्यकता है। अगर हम समय रहते मेंसन्न नहीं हुए, तो शायद हमें एक दिन अपने बच्चों को धरती के संरक्षण के बारे में स्कूली पाठ्यक्रम में पढ़ाने पड़ेंगे। धरती की गर्माहट तेजी से बढ़ रही है, और इसका मुख्य कारण है अवैध विकास और वातावरणीय प्रभाव। बढ़ते शहरीकरण, सड़कों का निर्माण, और अतिरिक्त उपयोग की वजह से पेड़ों की कटाई हो रही है, जिससे भूमिगत जल का प्रबंधन कठिन हो रहा है।

पहले, सड़कों के किनारों पर खंडज बनाया जाता था, जो कि वर्षा के पानी को समुद्र की ओर ले जाता था। परन्तु अब यह प्रथा बदल चुकी है, और पेड़ों की कटाई के बिना सड़कों की निर्माण प्रक्रिया हो रही है। इससे निकलने वाला पानी नालों में जाकर समुद्र में गिरता है, जिससे जल संकट का सामना करना पड़ता है।

यही सब नहीं, हमें भूमिगत जल की मात्रा को बढ़ाने के लिए कठिन परिश्रम करने की आवश्यकता है। अधिक बारिश का पानी संचित करना, जल संचयन की तकनीकों का उपयोग करना, और अनावश्यक जल बर्बादी रोकने के लिए उपायों का अवलोकन करना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। आखिरकार, हमें एक साझा संविदानशील दृष्टिकोण विकसित करना होगा, जिसमें हम अपने जीवनशैली को पर्यावरण के साथ संतुलित बनाए रख सकें। यह न केवल हमारे लिए बल्कि हमारे आने वाली पीढ़ियों के लिए भी अनिवार्य है। तो चलिए, इस अंतराष्ट्रीय पर्यावरण दिवस पर हम सब मिलकर एक साफ और हरित भविष्य की दिशा में कदम बढ़ाएं।

भूमिगत जल संरक्षण के महत्व को समझते हुए, भारत ने बाढ़ से निपटने के लिए कई पहल की हैं। बाढ़ों से प्रभावित क्षेत्रों में जल संचार और भूमिगत जल की बचत के लिए विशेष योजनाएं चलाई जा रही हैं। सरकार ने जल संचार योजनाओं के लिए विशेष ध्यान देने का भी निर्देश दिया है। इसके अलावा, जल संचार और जल संग्रहण के लिए जरूरी अवधारणाओं को प्रोत्साहित करने के लिए भी कई योजनाएं चलाई जा रही हैं।

जल संरक्षण में सामुदायिक भागीदारी:

जल संरक्षण में सामुदायिक भागीदारी का महत्वपूर्ण योगदान है। ग्रामीण क्षेत्रों में समुदायों ने जल संरक्षण के लिए अलग-अलग उपाय अपनाए हैं, जैसे कि जल संचार यंत्रों की स्थापना, जल संचार के लिए जल तालाबों का निर्माण, और वृक्षारोपण। सामुदायिक संगठनों के माध्यम से जल संरक्षण की योजनाओं को संचालित करने से जल संचयन और जल संरक्षण की प्रक्रिया में सुधार हो रहा है। हम सबको इस अंतराष्ट्रीय पर्यावरण दिवस पर भूमिगत जल संरक्षण के महत्व को समझते हुए, इसे लेकर सकारात्मक कदम उठाने की जरुरत है। हमें अपने आस-पास के पर्यावरण का सम्मान करना चाहिए और जल संरक्षण के लिए अपना सहयोग देना चाहिए। एक स्वच्छ और हरित भविष्य की दिशा में हम सबको साथ मिलकर काम करना होगा।

जल संरक्षण में सभी की भागीदारी क्यों जरुरी है?

जल संरक्षण के महत्व को समझते हुए हमें सभी मिलकर काम करना होगा। जल संरक्षण में सभी की भागीदारी का महत्व इस तरह से है कि यदि हम सभी इसमें सहयोग नहीं करेंगे तो जल संकट की स्थिति में हम सभी परेशान हो सकते हैं। विभिन्न शोधों और अध्ययनों के अनुसार, वातावरण के तेजी से बदलते माहौल में जल संरक्षण अब एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन चुका है। यदि हम सभी ने जल संरक्षण के लिए कुछ न कुछ कदम नहीं उठाए तो आने वाले समय में हमें बहुत बड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

जल संरक्षण के लिए हमें सभी को जिम्मेदारी लेनी होगी। हमें अपने घरों और कार्यालयों में जल का सही उपयोग करना चाहिए। बारिश का पानी संचित करने के लिए रेनवॉटर हार्वेस्टिंग की योजनाएं बनानी चाहिए। इसके साथ हमें जल संचयन की प्रक्रिया में भी योगदान देना चाहिए।

जल संरक्षण में सामुदायिक भागीदारी का महत्वपूर्ण योगदान है। गाँवों और क्षेत्रों में सामुदायिक संगठनों के माध्यम से जल संरक्षण की योजनाओं को संचालित करने से जल संचयन और जल संरक्षण की प्रक्रिया में सुधार हो रहा है।

इस अंतराष्ट्रीय पर्यावरण दिवस पर हमें जल संरक्षण के महत्व को समझते हुए, इसे लेकर सकारात्मक कदम उठाने की जरुरत है। हमें अपने आस-पास के पर्यावरण का सम्मान करना चाहिए और जल संरक्षण के लिए अपना सहयोग देना चाहिए। एक स्वच्छ और हरित भविष्य की दिशा में हम सबको साथ मिलकर काम करना होगा।

5 जून को हर साल मनाए जाने वाले अंतराष्ट्रीय पर्यावरण दिवस के इस बार की थीम “भूमिगत जल संरक्षण” को ध्यान में रखते हुए “Land Restoration, desertification and Drought resilience” अर्थात “धरती का सूखना और मरुस्थलीकरण का पुनर्स्थापन और सूखे से प्रतिरोध” रखी गई है। यह थीम हमें जागरूक कराती है कि हमें अपनी धरती के जल संसाधन की सुरक्षा करने की जरूरत है।

पिछले साल की थीम:

पिछले साल 2023 में “Solution for plastic pollution” अर्थात “प्लास्टिक प्रदूषण के लिए समाधान” रखी गई थी। इस थीम के तहत हमें प्लास्टिक प्रदूषण को कम करने के उपायों पर विचार करने की जरुरत थी। इस थीम ने हमें प्लास्टिक के हानिकारक प्रभावों के बारे में सोचने पर मजबूर किया।इस वर्ष का उद्देश्य है कि हमें धरती के जल संसाधन को सुरक्षित रखने के लिए कार्रवाई करनी चाहिए। धरती के जल संसाधन का सही उपयोग करना हमारी जिम्मेदारी है।

भूमिगत जल संरक्षण के लिए हमें अपने जल संसाधन का सही उपयोग करना होगा। हमें अपने जल संसाधन को व्यावसायिक उपयोग से बचाने की आवश्यकता है। वृक्षारोपण, वायुमंडलीय गैसों के प्रभाव को कम करने के लिए कार्रवाई, और जल संसाधन की सुरक्षा के लिए अधिक संज्ञानात्मकता, इन सभी क्षेत्रों में हमें कार्रवाई करनी चाहिए।इस अंतराष्ट्रीय पर्यावरण दिवस पर हमें अपनी धरती के जल संसाधन की सुरक्षा के लिए सकारात्मक कदम उठाने की जरुरत है।

Shashank Goel

शशांक गोयल एक अनुभवी मैकेनिकल ऑडिटर हैं, जो एक प्रमाणित लाइफ कोच, मोटिवेशनल स्पीकर, करियर काउंसलर, गाइड और मेंटर के रूप में भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। सामाजिक कार्यों में गहरी रुचि रखने वाले शशांक एक संवेदनशील कवि, रचनात्मक कंटेंट राइटर और लोकप्रिय ब्लॉगर भी हैं। उनकी कविताएं, लेख और प्रेरक विचार प्रबुद्ध पाठकों और युवा वर्ग के बीच विशेष रूप से सराहे जाते हैं।

Shashank Goel has 23 posts and counting. See all posts by Shashank Goel

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

eight + 3 =