वकीलों का तांडव: भाजपा विधायक की गिरफ्तारी की मांग को लेकर एसएसपी कार्यालय में जमकर तोडफोड
मेरठ। मेरठ में अधिवक्ता ओमकार सिंह तोमर की मौत के मामले में सोमवार को वकीलों ने हंगामा कर दिया। कचहरी में आम सभा में अधिवक्ताओं ने विधायक के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। अधिवक्ता आमसभा के बाद एसएसपी ऑफिस पहुंचे और जमकर हंगामा किया। इसके बाद वकीलों ने एसएसपी ऑफिस में तोड़फोड़ शुरू कर दी।
इस दौरान एसपी सिटी से अधिवक्ताओं की तीखी नोंकझोंक भी हुई। वहीं जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष वीके शर्मा ने एसएसपी से फोन पर बातचीत की। अधिवक्ताओं ने बताया कि पुलिस ने 24 घंटे में विधायक की गिरफ्तारी करने का आश्वासन दिया है।एसएसपी ऑफिस के बाद अधिवक्ताओं ने कमिश्नरी पर जाम लगाकर हंगामा किया।
अधिवक्ताओं ने कहा है कि जब तक भाजपा विधायक दिनेश खटीक की गिरफ्तारी नहीं होगी, तब तक वे हड़ताल पर ही रहेंगे। एसएसपी और कमिश्नरी चौराहे पर हंगामा करने के बाद अधिवक्ता कचहरी में चले गए। हालांकि इससे पहले अधिवक्ताओं ने एक सुर में कहा था कि भाजपा विधायक दिनेश खटीक की गिरफ्तारी के बाद ही अपने काम पर लौटेंगे।
बता दें कि सैंकड़ो की संख्या में वकील आज सुबह कमिश्नरी के बाहर जुटे थे। वकीलों ने कमिश्नरी चौराहे पर जाम लगा दिया है। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए कमिश्नरी और आसपास भारी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। इसके अलावा ब्रिगेड की गाड़ियां बुलाई गई हैं। भाजपा विधायक की गिरफ्तारी न होने को लेकर अधिवक्ताओं में भारी आक्रोश है।
उत्पीड़न से तंग आकर आत्महत्या करने वाले अधिवक्ता ओमकार सिंह तोमर के मामले में नामजद हस्तिनापुर के भाजपा विधायक दिनेश खटीक के खिलाफ पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
अधिवक्ता के घर पर दो दिन पूर्व धमकी देने कौन गया था? इसका खुलासा सीसीटीवी कैमरे से होगा। पुलिस का दावा है कि सबूत तलाशे जा रहे हैं। जांच के बाद कार्रवाई होगी।अमूमन ऐसे मामलों में पुलिस नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर सबूत तलाशती है। इस मामले में पुलिस सत्ता के दबाव में दिख रही है।
गंगा नगर पुलिस ने घटना के 24 घंटे बाद भी किसी भी नामजद आरोपी के घर दबिश तक नहीं दी है। सवाल है कि बिना गिरफ्तारी के पुलिस सबूत कैसे ढूंढ पाएगी।हले भाजपा विधायक को नामजद करने से बच रही पुलिस अब उन्हें गिरफ्तार करने से भी बच रही है। मामले में विधायक का नाम आते ही पुलिस के पसीने छूट गए थे। आठ घंटे तक अधिवक्ता का शव घर पर ही रखा रहा और मवाना रोड जाम कर अधिवक्ताओं ने गंगा नगर थाने में हंगामा किया।
कई बार माहौल खराब होने के हालात बन गए। उधर, अधिवक्ता जिद पर अड़े तो कानून व्यवस्था बिगड़ने लगी, तब जाकर ही विधायक को नामजद किया गया। ओमकार के बेटे लव सिंह व पुत्रवधू स्वाति के बीच विवाद है।आरोप है कि भाजपा विधायक ने सात फरवरी को अपने घर पर दोनों परिवार के लोगों के बीच बैठक कराई थी।
बैठक में ओमकार और उनके परिवार को धमकाया गया था। उसके बाद 11 फरवरी को विधायक ने अपने करीबी निडावली ग्राम प्रधान मुनेंद्र को ईशापुरम स्थित ओमकार के घर भेजा था। अधिवक्ता के सुसाइड नोट में भी इसका जिक्र है। पुलिस का कहना है कि अधिवक्ता के घर पर सीसीटीवी कैमरे लगे हुए है, उनकी फुटेज ली जाएगी।
इससे स्पष्ट होगा कि अधिवक्ता के घर पर कौन आया था। रविवार को अधिवक्ता के अंतिम संस्कार होने के चलते सीसीटीवी कैमरे की फुटेज नहीं मिली। पुलिस ने अधिवक्ता के घर के आस-पास लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज भी लेने का प्रयास किया है।पुलिस के अनुसार भाजपा विधायक की गिरफ्तारी से पहले विधानसभा अध्यक्ष से अनुमति लेनी होगी।
हालांकि विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित को विधायक पर मुकदमा होने की जानकारी दे दी गई है। भाजपा विधायक की गिरफ्तारी न होने से पीड़ित परिवार में गुस्सा है।
मामले के तूल पकड़ने पर कानून-व्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है।अधिवक्ताओं और विपक्षी दलों के साथ ही भाजपा के कुछ नेताओं के भी विधायक के खुले तौर पर विरोध में आने के कारण खुफिया विभाग का इनपुट भी कुछ ऐसा ही है।
बावजूद इसके पुलिस द्वारा विधायक को बचाने के तमाम प्रयास किए जा रहे हैं। मुकदमा दर्ज करने के बाद पुलिस विधायक के बचाव में आ गई है। पुलिस ने विधायक और अन्य किसी आरोपी से पूछताछ भी नहीं की है।

