माजुली एक्ट को लेकर विश्व हिन्दू महासंघ ने किया प्रदर्शन: असम में भी प्रदर्शन करेंगे- सुरेंद्रनाथ अवधूत
नई दिल्ली : विश्व हिन्दू महासंघ के उत्तर प्रदेश मंत्री प्रमोद ने बताया कि विश्व हिंदू महासंघ की असम और दिल्ली इकाई ने माजुली कल्चरल लैंड स्कैप रिजन एक्ट 2006 को असम में शिघ्र लागू करने के लिए जंतर मंतर पर प्रदर्शन किया।
विश्व हिन्दू महासंघ के राष्ट्रीय अंतरिम अध्यक्ष और कालका जी मंदिर के पीठाधीश्वर महंत सुरेंद्रनाथ अवधूत ने कहा कि हम मोदी सरकार से अपील करते हैं कि वे इस एक्ट को शिघ्र लागू करें और हमने इसको लेकर मोदी और असम के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल को पत्र भी भेजा है।
हमारी मांग है कि वे इस एक्ट को लागू करें और अगर उन्होंने ऐसा नहीं किया तो हमारा प्रदर्शन जारी रहेगा। हम दिल्ली के बाद असम में भी प्रदर्शन करेंगे। इस प्रदर्शन में 100 के करीब कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया
जिसमें माजुली के प्रमुख सत्राधिपति स्वामी जनार्दन देव, दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष राजेश तोमर व असम के महामंत्री बालेन वैश्व भाग शामिल हैं। यह धरना महंत सुरेंद्रनाथ अवधूत की अगुआई में हुआ।
माजुली एक्ट को लेकर विश्व हिन्दू महासंघ ने किया प्रदर्शन. राष्ट्रीय अंतरिम अध्यक्ष महंत सुरेंद्रनाथ अवधूत ने कहा, हम इसको लेकर असम में भी प्रदर्शन करेंगे. एक्ट को लागू करने के लिए प्रधानमंत्री @narendramodi और असम के मुख्यमंत्री @sarbanandsonwal को लिखा पत्र. pic.twitter.com/X0mXx0o4NE
— News & Features Network (@mzn_news) March 6, 2021
उन्होंने कहा कि असम के दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस क्षेत्र में विकास करने की बात कही थी और यह अकेला ऐसा आइलैंड है जिसे जिले का दर्ज दिया गया है।
दिल्ली में इसको लेकर अभी तक प्रदर्शन नहीं हुआ था जिसकी वजह से इस पर किसी का ध्यान नहीं गया।सुरेंद्रनाथ ने इस एक्ट को लेकर जानकारी दी कि माजुली बृह्मपुत्र नदी के मध्य विश्व का सबसे बड़ा टापू है।
20वीं सदी तक इसका क्षेत्रफल हजारों कि.मी का था जो अब सिमट कर 800 वर्ग कि.मी रह गया है। माजुली को असम की धार्मिक और सांस्कृतिक राजधानी भी कहा जाता है।
15वीं शताब्दी में वैष्णव संप्रदाय के प्रर्वतक श्रीमंत शंकर देव और महादेव ने वैष्णव सत्र की स्थापना की। वर्तमान में केवल माजुली में 36 सत्र हैं।
तत्पश्चात संपूर्ण असम में वैष्णव संप्रदाय का प्रचार प्रसार हुआ।
इसके महत्व को देखते हुए माजुली के विकास के लिए केंद्र सरकार ने करोड़ों की योजना तैयार की हैं और असम सरकार ने 2006 में माजुली कल्चरल लैंड स्कैप रिजन एक्ट 2006 लागू किया जिसे अभी तक पूरी तरह से लागू नहीं किया गया

