Sambhal में मिले प्राचीन शिव मंदिर और कुएं के रहस्यों से पर्दा, एएसआई करेगी कार्बन डेटिंग
News-Desk
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ancient well discovery, ASI carbon dating, ASI investigation, cultural heritage of Sambhal, Hindu temple restoration, historical site., Indian archaeology, sambhal, Sambhal ancient Shiva temple, Sambhal News, sambhal temple update, sambhal update, संभल शिव मंदिरSambhal जिले के खग्गू सराय में हाल ही में एक प्राचीन शिव मंदिर और उसके आसपास स्थित कुएं की खोज ने एक बार फिर से इतिहास के अनमोल धरोहरों को उजागर किया है। यह घटना उस समय सामने आई जब 14 दिसंबर को हिंसा के बाद अतिक्रमण हटाने के अभियान के दौरान इस मंदिर का पता चला। अब, इस मंदिर और कुएं की प्राचीनता और ऐतिहासिक महत्व को लेकर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की टीम जल्द ही इस स्थल पर पहुंचने वाली है। इसके तहत, एएसआई की टीम इस मंदिर और कुएं की कार्बन डेटिंग करने के लिए नमूने लेगी, ताकि इनकी सटीक उम्र का पता चल सके।
इतिहास की परतें खोलने वाली खोज
Sambhal खग्गू सराय में मिले इस प्राचीन मंदिर और कुएं को लेकर जिला प्रशासन और पुरातत्व विभाग गंभीरता से काम कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि इस मंदिर का इतिहास करीब 200 साल पुराना हो सकता है, लेकिन कार्बन डेटिंग के बाद ही इसकी सही उम्र का पता चलेगा। इस खोज से जुड़ी जानकारी सामने आते ही संभल के डीएम डॉ. राजेंद्र पैंसिया ने एएसआई को इस मंदिर और कुएं की प्राचीनता की जांच के लिए पत्र लिखा था, जिसके बाद अब एएसआई की टीम जल्द ही वहां पहुंचने वाली है।
प्रशासन का ऐतिहासिक कदम
Sambhal प्रशासन ने खग्गू सराय के इस मंदिर परिसर के आसपास अतिक्रमण को हटाने का निर्णय लिया है, जिससे इस ऐतिहासिक धरोहर की सही स्थिति का पता चल सके और इसे संरक्षित किया जा सके। इस प्रक्रिया के तहत, नायब तहसीलदार के नेतृत्व में राजस्व विभाग की टीम ने मंदिर के परिक्रमा स्थल और आसपास के रास्तों की पैमाइश की और निशान लगाए। यह कदम इस बात की ओर इशारा करता है कि प्रशासन इस स्थल की महत्ता को समझते हुए उसे संरक्षित करने के लिए पूरी तरह से गंभीर है।
कार्बन डेटिंग से होगा मंदिर और कुएं की उम्र का निर्धारण
मंदिर और कुएं की सटीक उम्र का पता लगाने के लिए एएसआई कार्बन डेटिंग करेगा। यह प्रक्रिया ऐतिहासिक धरोहरों की प्राचीनता को समझने का एक विश्वसनीय तरीका है। एएसआई द्वारा इस प्राचीन मंदिर और कुएं की कार्बन डेटिंग के बाद, इनकी उम्र के बारे में नई जानकारी सामने आ सकती है। इसके साथ ही, इनका ऐतिहासिक महत्व भी उजागर होगा, जिससे इन्हें संरक्षण के प्रयासों में मदद मिलेगी। प्रशासन और पुरातत्व विभाग इस मामले में पूरी तरह से गंभीर हैं और इस स्थान के संरक्षण को लेकर कई योजनाएं तैयार कर रहे हैं।
1992 के दंगों के बाद खोला गया राधा कृष्ण मंदिर का ताला
इसके अलावा, मंगलवार को सरायतरीन के मोहल्ला कछवायन में स्थित राधा कृष्ण मंदिर का ताला 32 साल बाद खोला गया। यह मंदिर 1992 में हुए दंगों के बाद से बंद था। अब मंदिर का ताला खोलकर पूजा-पाठ शुरू किया गया है। इस मंदिर के परिसर में एक कुआं भी मिला है, जो काफी गहरा है और इसे बंद कर दिया गया था। पालिका की ओर से इस कुएं को खोला गया है। कुएं का स्लैब तोड़ने के बाद यह पाया गया कि यह कुआं काफी गहरा है और इसके भीतर प्लास्टर भी किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, इस कुएं की गहराई 40 फीट तक हो सकती है, हालांकि अभी इसकी गहराई को ठीक से मापा नहीं गया है। इस कुएं पर भी अतिक्रमण का कुछ हिस्सा मौजूद है, जिसे जल्द हटाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
प्रशासन द्वारा उठाए गए महत्वपूर्ण कदम
इन दोनों घटनाओं ने संभल प्रशासन के लिए एक नई चुनौती पेश की है। जहां एक ओर खग्गू सराय के मंदिर और कुएं की ऐतिहासिकता की जांच की जा रही है, वहीं दूसरी ओर राधा कृष्ण मंदिर के ताले को खोलकर पूजा-पाठ की अनुमति दी जा चुकी है। प्रशासन ने इन दोनों स्थलों की सुरक्षा और संरक्षण के लिए कई उपाय तैयार किए हैं। इन जगहों को संरक्षित करना न केवल इनकी ऐतिहासिक महत्वता को सुनिश्चित करता है, बल्कि स्थानीय लोगों के धार्मिक और सांस्कृतिक संबंधों को भी सहेजने का काम करता है।
पुरातत्व और संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम
इन घटनाओं के बाद से यह सवाल उठता है कि क्या भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण और जिला प्रशासन पुरानी धरोहरों के संरक्षण में और भी सक्रिय होंगे? क्या इस प्रकार की प्राचीन और ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण के लिए अब और अधिक कड़े कदम उठाए जाएंगे? इन सवालों का जवाब समय ही देगा, लेकिन यह निश्चित है कि संभल जिले में प्राचीन मंदिरों और कुओं की खोज ने न केवल इतिहास प्रेमियों को उत्साहित किया है, बल्कि यह स्थानीय समुदाय के लिए भी गर्व का विषय बन चुका है।
200 वर्षों से अधिक पुरानी धरोहर की संभावनाएं
खग्गू सराय में मिले इस प्राचीन मंदिर और कुएं का इतिहास अब पुरानी धरोहरों के संरक्षण की दिशा में एक मील का पत्थर बन सकता है। इस तरह की खोजों से यह उम्मीद जताई जा रही है कि भारतीय पुरातत्व विभाग और राज्य प्रशासन द्वारा भविष्य में ऐसी और धरोहरों का पता लगाया जाएगा, जो हमारी सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को जीवित रखेगा।
सम्भल के इस क्षेत्र में प्राचीन मंदिरों और कुओं की खोज से यह साबित होता है कि हमारी ऐतिहासिक धरोहरें आज भी हमारे बीच छुपी हुई हैं। इनका संरक्षण और अध्ययन करने से न केवल हम अपनी सांस्कृतिक पहचान को मजबूती दे सकते हैं, बल्कि यह दुनिया भर में भारत के ऐतिहासिक गौरव को भी प्रदर्शित कर सकता है।

