Mehbooba Mufti का पाकिस्तान प्रेम फिर उफान पर 🌟: सिंधु जल संधि रद्दीकरण पर केंद्र को दी चेतावनी
जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) की मुखिया Mehbooba Mufti एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार मुद्दा है भारत और पाकिस्तान के बीच ऐतिहासिक ‘सिंधु जल संधि’ को स्थगित करने का। केंद्र सरकार के इस निर्णय को महबूबा ने न केवल “दुर्भाग्यपूर्ण” बताया, बल्कि उन्होंने इस पर खुलकर पाकिस्तान का पक्ष लेते हुए केंद्र सरकार से फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील कर डाली।
🗣️ महबूबा मुफ्ती का बयान: ‘भारत सरकार को शांति की भाषा बोलनी चाहिए’
महबूबा मुफ्ती ने अपने बयान में कहा,
“मैं समझती हूं कि भारत सरकार ने सिंधु जल संधि को जो स्थगित किया है, वह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। हमारे कई लोग यहां शहीद हुए हैं, कई गांव तबाह हो गए हैं। अब जब थोड़ी राहत मिली है, तो हमें शांति की भाषा बोलनी चाहिए, न कि उकसावे की।”
उन्होंने आगे यह भी कहा कि नई दिल्ली को अपने इस फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए ताकि पाकिस्तान के साथ शांति प्रक्रिया को एक मौका दिया जा सके।
🕊️ ‘भारत-पाक को द्विपक्षीय वार्ता से सुलझाने चाहिए विवाद’: महबूबा
Mehbooba Mufti ने यह भी सुझाव दिया कि भारत और पाकिस्तान को आपसी विवादों को केवल द्विपक्षीय बातचीत के माध्यम से ही हल करना चाहिए। उन्होंने कहा,
“पाकिस्तान ने भी शिमला समझौते को निलंबित किया है, लेकिन अगर दोनों देश तनाव कम करना चाहते हैं, तो उन्हें टेबल पर बैठकर हल निकालना होगा।”
⚠️ तुलबुल परियोजना पर उमर अब्दुल्ला और महबूबा के बीच जुबानी जंग
हाल ही में जब जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने वुलर झील पर तुलबुल नौवहन परियोजना को फिर से शुरू करने की बात कही, तो इस पर भी महबूबा ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने उमर अब्दुल्ला के बयान को ‘गैर-जिम्मेदाराना’ और ‘खतरनाक रूप से भड़काऊ’ करार दिया।
इस पर पलटवार करते हुए उमर अब्दुल्ला ने महबूबा पर कटाक्ष करते हुए कहा,
“वह यह मानने से इंकार कर रही हैं कि सिंधु जल संधि जम्मू-कश्मीर के लोगों के साथ एक ऐतिहासिक विश्वासघात थी। ऐसा लगता है कि वह केवल सीमा पार के कुछ लोगों को खुश करने में जुटी हुई हैं।”
🛠️ क्या है तुलबुल नौवहन परियोजना विवाद?
वुलर झील पर तुलबुल प्रोजेक्ट का निर्माण पाकिस्तान द्वारा लंबे समय से विरोध का कारण रहा है। भारत इसे नौवहन और सिंचाई के लिए जरूरी मानता है, जबकि पाकिस्तान इसे सिंधु जल संधि के उल्लंघन के तौर पर देखता है। इस परियोजना को फिर से शुरू करने की बात कहकर उमर अब्दुल्ला ने साफ संदेश दिया कि जम्मू-कश्मीर को उसका हक मिलना चाहिए।
💬 सियासत या राष्ट्रीय सुरक्षा का सवाल?
विशेषज्ञों का मानना है कि महबूबा मुफ्ती का यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत और पाकिस्तान के बीच संबंध पहले से ही नाजुक हैं। ऐसे में इस प्रकार का बयान भारत की विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा पर भी प्रभाव डाल सकता है।
🔥 क्या महबूबा मुफ्ती का बयान PDP की रणनीति है?
राजनीतिक विश्लेषकों का यह भी कहना है कि महबूबा मुफ्ती का यह रवैया PDP की रणनीतिक नीति का हिस्सा हो सकता है जिससे वह कश्मीर के कुछ हिस्सों में अपने खोए हुए राजनीतिक आधार को पुनः प्राप्त करना चाहती हैं।
⚖️ भारत सरकार का पक्ष
सरकार का कहना है कि सिंधु जल संधि को स्थगित करने का निर्णय सुरक्षा और रणनीतिक हितों के आधार पर लिया गया है। भारत वर्षों से पाकिस्तान की शत्रुतापूर्ण गतिविधियों और सीमा पार आतंकवाद को झेल रहा है। ऐसे में भारत सरकार का मानना है कि यह संधि अब अपने उद्देश्यों को पूरा नहीं कर रही है।
🧠 जनता क्या सोचती है?
सोशल मीडिया पर जनता की राय भी बंटी हुई दिख रही है। एक तरफ कुछ लोग महबूबा मुफ्ती के बयान को “पाकिस्तानपरस्त” करार दे रहे हैं, वहीं कुछ लोग इसे “संवाद की वकालत” बता रहे हैं। ट्विटर पर ‘#IndusTreaty’, ‘#MehboobaMufti’ और ‘#OmarAbdullah’ जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं।
🎯 राजनीति या राष्ट्रहित? निर्णय जनता का…
महबूबा मुफ्ती का बयान एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि क्या क्षेत्रीय राजनीति राष्ट्रीय हितों से ऊपर होनी चाहिए? जब देश की सुरक्षा और संसाधनों की बात हो, तब क्या ऐसी राजनीतिक बयानबाज़ी जायज़ है?

