उत्तर प्रदेश

Aligarh: स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में घटिया निर्माण का खुलासा – नाला सड़क से ऊंचा, जांच समिति गठित🔥

Aligarh: स्मार्ट सिटी योजना के तहत मैरिस रोड पर चल रहा 12 करोड़ रुपये का सड़क और नाला चौड़ीकरण प्रोजेक्ट अब सवालों के घेरे में आ गया है। लोगों की शिकायत के बाद नगर आयुक्त प्रेम प्रकाश मीणा ने शासन से जांच की मांग की थी।

इस प्रोजेक्ट के तहत अब्दुल्ला कॉलेज से केला नगर चौराहे तक 800 मीटर सड़क चौड़ीकरण और दोनों ओर नाला निर्माण का काम किया जा रहा है। यह काम कंस्ट्रक्शन एंड डिजाइन सर्विसेज (सीएनडीएस) द्वारा किया जा रहा है।

नाले का लेवल सड़क से ऊंचा – लोगों में गुस्सा
लोगों का आरोप है कि नाले का लेवल सड़क से काफी ऊंचा बना दिया गया है। इसका सीधा असर यह होगा कि बारिश के पानी की निकासी नहीं हो पाएगी और सड़क पर पानी भर जाएगा। जब यह मामला सार्वजनिक हुआ तो नाले की दीवारों को काटकर छोटा करने का काम शुरू हुआ, जिससे और ज्यादा विवाद खड़ा हो गया।

घटिया सामग्री के इस्तेमाल के आरोप
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस सड़क और नाले में घटिया क्वालिटी की सामग्री इस्तेमाल की जा रही है। लोगों ने शिकायत की कि सड़क निर्माण में इस्तेमाल हो रहे सीमेंट, कंक्रीट और स्टील का स्तर मानकों के मुताबिक नहीं है।

नगर आयुक्त की सख्ती – शासन को भेजी रिपोर्ट
नगर आयुक्त प्रेम प्रकाश मीणा ने निर्माण की धीमी गति और गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए शासन को रिपोर्ट भेजी। रिपोर्ट में साफ कहा गया कि यह काम मानकों के विपरीत हो रहा है और तुरंत जांच जरूरी है।

तीन सदस्यीय जांच समिति गठित
शासन ने नगर आयुक्त की शिकायत पर संज्ञान लेते हुए तीन सदस्यीय जांच समिति गठित कर दी है। इस समिति की अध्यक्षता मुख्य महाप्रबंधक एसके गौतम करेंगे। समिति को निर्देश दिया गया है कि 30 सितंबर तक रिपोर्ट तैयार कर शासन को सौंपी जाए।

मंत्री के घर के सामने सड़क निर्माण भी विवादों में
यूपी के शिक्षा मंत्री संदीप सिंह के घर के सामने बनाई जा रही सड़क में भी घटिया सामग्री के इस्तेमाल के आरोप लगे हैं। यहां भी नाला सड़क से ऊंचा बना दिया गया है। इस मामले ने और ज्यादा राजनीतिक रंग ले लिया है।

स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट की छवि पर असर
इस प्रोजेक्ट को लेकर स्थानीय लोगों का कहना है कि यह स्मार्ट सिटी योजना की छवि को खराब कर रहा है। करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद अगर पानी भराव की समस्या बनी रहती है तो परियोजना का उद्देश्य ही विफल हो जाएगा।

जनता की मांग – कड़ी कार्रवाई और पारदर्शिता
लोग चाहते हैं कि दोषी ठेकेदारों और अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए और भविष्य में इस तरह की गलतियों को रोका जाए। स्मार्ट सिटी योजना के तहत काम की गुणवत्ता पर निगरानी कड़ी करने की मांग भी की जा रही है।


मैरिस रोड का यह मामला दिखाता है कि करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद यदि गुणवत्ता और मानकों की अनदेखी हो तो जनता को सिर्फ परेशानियां मिलती हैं। अब सबकी नजर तीन सदस्यीय जांच समिति की रिपोर्ट पर है। यदि रिपोर्ट में गड़बड़ी की पुष्टि होती है तो यह मामला बड़ा घोटाला बन सकता है और स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट की विश्वसनीयता पर सवाल उठ सकते हैं।

 

News-Desk

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