उत्तर प्रदेश

लखनऊ से Mayawati की महारैली में सियासी धमाका: “भाजपा ने टिकट का पैसा दबाया नहीं, सपा ने किया था खेल” – बहनजी का सपा पर सीधा हमला

लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (BSP) ने आज राजधानी लखनऊ में पार्टी संस्थापक कांशीराम के परिनिर्वाण दिवस के अवसर पर एक विशाल महारैली का आयोजन किया, जिसमें लाखों की संख्या में समर्थक उमड़ पड़े। मंच पर पहुंचते ही Mayawati ने अपने गुरु कांशीराम को श्रद्धांजलि अर्पित की और कार्यकर्ताओं का जोश देखकर कहा कि “बहुजन आंदोलन कभी खत्म नहीं हो सकता, क्योंकि यह आंदोलन हमारे हक और सम्मान की लड़ाई है।”


भाजपा सरकार को धन्यवाद, सपा पर तीखा वार
मायावती ने अपने संबोधन में कहा कि कांशीराम स्मारक स्थल बसपा सरकार के कार्यकाल में बनाया गया था और आज यह लोगों की प्रेरणा का केंद्र है। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा सरकार ने स्मारक की टिकटों से प्राप्त धनराशि को स्मारक के रखरखाव पर खर्च किया, जबकि सपा सरकार ने अपने कार्यकाल में टिकटों का पैसा “दबा लिया था।”

उन्होंने कहा—

“मैं योगी सरकार का आभार व्यक्त करती हूं कि उन्होंने कांशीराम स्मारक का पैसा जनता की सेवा में लगाया। सपा ने तो टिकट की कमाई को खुद के खजाने में डाल लिया था।”

मायावती के इस बयान पर रैली स्थल तालियों से गूंज उठा।


आकाश आनंद का ऐलान — 2027 में बनेगी पांचवीं बसपा सरकार
बसपा के राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद ने रैली में जोश भरते हुए कहा कि 2027 में यूपी में पांचवी बार बसपा की सरकार बनेगी।
उन्होंने कहा, “यहां जो लाखों लोग आए हैं, यह इस बात का संकेत है कि बहनजी की नीतियों पर लोगों का विश्वास आज भी कायम है।”

उन्होंने आगे कहा,

“दलितों और पिछड़ों को सही मायने में आरक्षण का लाभ सिर्फ बसपा सरकार में मिला है। आने वाले चुनाव में बसपा फिर सत्ता में लौटेगी और अन्य राज्यों में भी बहुजन समाज पार्टी की भागीदारी बढ़ेगी।”


कांशीराम मिशन को समर्पित हैं बहनजी: आकाश आनंद
अपने जोशीले संबोधन में आकाश आनंद ने कहा कि “बहनजी मेरी प्रेरणा और आदर्श हैं। उन्होंने कांशीराम जी के मिशन को आगे बढ़ाने के लिए जीवन समर्पित किया है। बहनजी किसी पद या सत्ता की लालसा से नहीं, बल्कि समाज के उत्थान के लिए राजनीति करती हैं।”

उन्होंने कहा कि बसपा का मिशन सिर्फ चुनाव जीतना नहीं बल्कि दलित, पिछड़े, अल्पसंख्यक और वंचित समाज को मुख्यधारा में लाना है।


चंदा लगाकर पहुंचे समर्थक — बहुजन मिशन की मिसाल
इस रैली की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि इसमें शामिल होने वाले समर्थक 150 से 200 रुपये का चंदा लगाकर खुद पहुंचे।
बिहार के भभुआ जिले से आए समर्थक दूधनाथ राम ने कहा, “हमने अपने पैसे से टिकट कटाया क्योंकि बहनजी का मिशन हमारा धर्म है। सत्ता में हों या न हों, बहनजी हमारे दिल में हैं।”

इसी तरह, हरियाणा, महाराष्ट्र, पंजाब और उत्तराखंड से भी हजारों की संख्या में समर्थक लखनऊ पहुंचे। उन्होंने कहा कि “बहनजी को सुनना ही सौभाग्य है।


स्मारक स्थल पर उमड़ा जनसैलाब — महिलाओं और युवाओं की भारी मौजूदगी
लखनऊ के कांशीराम स्मारक स्थल पर सुबह से ही समर्थकों का जनसैलाब उमड़ पड़ा। मैदान में दलित समाज, पिछड़े वर्ग, मुस्लिम समुदाय और युवा कार्यकर्ता जोश के साथ नारे लगा रहे थे —

“बहनजी तुम संघर्ष करो, हम तुम्हारे साथ हैं।”

रैली स्थल पर महिलाओं की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही। कई महिलाएं अपने बच्चों के साथ पहुंचीं। युवा कार्यकर्ता “2027 में बहनजी की सरकार” के पोस्टर और झंडे लिए हुए थे।


कांशीराम मिशन का विस्तार — बसपा की नई रणनीति
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, बसपा ने इस रैली के जरिए अपने संगठन को दोबारा जमीन पर सक्रिय करने की रणनीति अपनाई है।
लोकसभा और विधानसभा में घटती सीटों के बावजूद, मायावती ने दिखाया कि बसपा का कैडर अब भी जीवित है और उसका सामाजिक आधार मजबूत है।

बसपा ने अब युवाओं, विशेषकर दलित और ओबीसी वर्गों के बीच नए सिरे से संवाद शुरू किया है। पार्टी डिजिटल अभियान के साथ “बहुजन मिशन पुनर्जागरण” नाम से एक नया अभियान चलाने की तैयारी में है।


राजनीतिक संदेश — “हम विरोधियों से नहीं डरते”
मायावती ने अपने भाषण के दौरान कहा कि

“बसपा ने हमेशा संघर्ष किया है। हमने विरोधियों से कभी डरकर राजनीति नहीं की। आज भी हमारा उद्देश्य सिर्फ सत्ता नहीं, बल्कि समाज का सम्मान और समानता है।”

उन्होंने यह भी कहा कि “हमारे खिलाफ कितनी भी साजिश रच ली जाए, बहुजन आंदोलन रुकने वाला नहीं है। हमारी ताकत जनता है और जनता का विश्वास ही हमें बार-बार सत्ता में लाएगा।”


मायावती के भाषण के मुख्य बिंदु:

  1. भाजपा सरकार का धन्यवाद — कांशीराम स्मारक के रखरखाव में टिकट धन का सही उपयोग किया।

  2. सपा पर आरोप — पूर्व सरकार ने स्मारक के टिकट का पैसा दबाया था।

  3. दलितों और पिछड़ों के आरक्षण पर जोर — सही लाभ बसपा सरकार में ही मिला।

  4. आकाश आनंद की घोषणा — 2027 में बसपा की पूर्ण बहुमत वाली सरकार बनेगी।

  5. जनसमर्थन का प्रमाण — लाखों की भीड़ और दूर-दराज से चंदा लगाकर आए समर्थक।


लखनऊ में मायावती की महारैली ने एक बार फिर साबित किया कि बसपा अभी भी उत्तर प्रदेश की राजनीति में मजबूत उपस्थिति रखती है। कांशीराम स्मारक से उठी यह लहर सिर्फ एक रैली नहीं बल्कि “बहुजन पुनर्जागरण” का संदेश है। मायावती और आकाश आनंद की जोड़ी ने कार्यकर्ताओं में जोश भर दिया है और 2027 के चुनावी रण में बसपा के पुनरुत्थान की भूमिका तैयार कर दी है।

 

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