Muzaffarnagar में श्री राम अमृत कथा की भव्य शुरुआत: कंसल परिवार के विशाल मंडप में भक्तिमय कलश यात्रा, संत विजय कौशल जी महाराज ने बरसाया आध्यात्मिक अमृत
Muzaffarnagar में Shri Ram Amrit Katha का शुभारंभ अत्यंत भव्यता और आध्यात्मिक गरिमा के साथ हुआ। कंसल परिवार द्वारा नई मंडी रामलीला भवन में निर्मित विशाल, आकर्षक और पूर्णत: भक्तिमय वातावरण से परिपूर्ण मंडप में नौ दिवसीय कथा का शुभारंभ हुआ।
कथा व्यास संत प्रवर विजय कौशल जी महाराज ने पहले ही दिन अमृत वर्षा करते हुए कहा कि “श्रीराम कथा न केवल मर्यादा सिखाती है, बल्कि यह जीवन को शुद्ध, संयमित और भगवान की ओर अग्रसर करने का मार्ग भी प्रशस्त करती है।”
उन्होंने यह भी कहा कि जो व्यक्ति सच्चे मन से श्री राम कथा का श्रवण, चिंतन और मनन करता है, उसका जीवन स्वतः मर्यादा, अनुशासन और भक्ति की दिशा में परिवर्तित हो जाता है। और ऐसी आत्मा निश्चित रूप से श्रीराम की कृपा प्राप्त करती है।
भव्य कलश यात्रा—सैकड़ों महिलाओं ने पवित्र जल से भरे कलश के साथ निकाली आस्था की अद्वितीय यात्रा
कथा के प्रथम दिन प्रातःकाल कंसल परिवार द्वारा आयोजित विशाल कलश यात्रा ने पूरे नगर में आध्यात्मिक रंग बिखेर दिए।
मीका बिहार स्थित कंसल भवन से शुरू हुई इस यात्रा में—
सैकड़ों महिलाएँ
सिर पर पवित्र जल से भरे कलश
वेद मंत्रों के उच्चारण
बैंड-बाजों की मधुर धुन
जयकारों की गूंज
के बीच नई मंडी रामलीला भवन की ओर बढ़ीं।
कलश यात्रा में प्रमुख रूप से भीम कंसल, श्रीकिशन कंसल, अनिल कंसल सहित अनेक परिजन और श्रीराम उपासक शामिल थे। सभी श्रद्धालु हाथों में श्रीराम चरित्र मानस लेकर अत्यंत आस्था के साथ चल रहे थे।
कलश यात्रा क्यों आवश्यक?—विद्वान ब्राह्मणों ने बताया आध्यात्मिक महत्व
नई मंडी रामलीला भवन पहुंचने पर विद्वान ब्राह्मणों ने विधि-विधानपूर्वक कलश पूजा संपन्न कराई और बताया कि—
कलश यात्रा शुभता, पवित्रता और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है।
यह कथा स्थल को आध्यात्मिक रूप से शुद्ध करती है।
पवित्र जल से भरा कलश देवताओं का निवास माना जाता है।
यह यात्रा देवी-देवताओं के आशीर्वाद और पावन आगमन का संदेश देती है।
इससे पूरे वातावरण में भक्तिमय ऊर्जा का संचार होता है।
कलश यात्रा न केवल धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि यह लोगों के मन में भक्ति, श्रद्धा और अध्यात्म का गहरा भाव जगाने का माध्यम भी है।
संत विजय कौशल जी महाराज का दिव्य प्रवचन—कथा ने भक्तों को किया संकल्पित और भावविभोर
संत प्रवर विजय कौशल जी महाराज ने अपने पहले प्रवचन में कहा कि श्रीराम कथा मनुष्य को उसकी वास्तविक पहचान करवाती है—
“कथा का उद्देश्य केवल सुनना नहीं, बल्कि उसे जीवन में उतारना है। जो अपने जीवन में श्रीराम के आदर्शों को अपनाता है, वह संसार में सफल ही नहीं, बल्कि ईश्वर की कृपा का अधिकारी भी बनता है।”
उन्होंने कहा कि आज समाज में मर्यादा, संयम और सत्य की कमी बढ़ रही है, और राम कथा ही वह दीपक है जो अंधकार को प्रकाशित कर सकता है।
राज्य मंत्री और अनेक गणमान्य उपस्थित—कथा स्थल बना आध्यात्मिक संगम
कलश यात्रा और कथा में प्रमुख हस्तियों ने भी आस्था और सम्मान के साथ भाग लिया। इनमें शामिल रहे—
राज्य मंत्री कपिल देव अग्रवाल
पालिका अध्यक्ष मीनाक्षी स्वरूप
व्यापारी नेता संजय मित्तल
वरिष्ठ भाजपा नेता गौरव स्वरूप
पूर्व विधायक अशोक कंसल
उद्यमी राकेश बिंदल
सतीश गोयल, नरेंद्र गोयल, राजेश जैन
पूर्व अध्यक्ष अंजू अग्रवाल
शशांक जैन, अरुण खंडेलवाल, जेपी गोयल
अशोक गर्ग, मनोज पुंडीर, संजय शर्मा, अतुल गर्ग, अचिन गर्ग, अरुण गर्ग
तथा सैकड़ों श्रद्धालु
कथा स्थल पर भक्तों की भारी भीड़ और अद्भुत शांति का संगम देखने को मिला।
कंसल परिवार की भव्य व्यवस्थाएँ—देशभर से आ रहे भक्तों के लिए विशेष आवास व्यवस्था
कंसल परिवार ने श्री राम कथा के लिए उत्कृष्ट व्यवस्था की है।
चूंकि संत विजय कौशल जी महाराज के अनुयायी पूरे भारत में हैं, इसलिए—
बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए ठहरने की व्यवस्था
विशाल पंडाल
सुचारू बैठने की व्यवस्था
सुरक्षा
जलपान
सब कुछ व्यवस्थित रूप से उपलब्ध कराया गया है।
कथा स्थल पूरी तरह भक्तिमय और दिव्य वातावरण से भर चुका है।
राज्य मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने बताई महाराज की विशेष भूमिका—“मुज़फ्फरनगर से गहरा नाता”
राज्य मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि संत विजय कौशल जी महाराज का मुज़फ्फरनगर से गहरा आध्यात्मिक संबंध है।
उन्होंने याद दिलाया कि महाराज जी ने संघ प्रचारक के रूप में अपने प्रवास के दौरान—
श्री राम जन्मभूमि आंदोलन
हिंदुत्व जागरण
सामाजिक समरसता
में अद्भुत योगदान दिया था।
इसलिए मुज़फ्फरनगर में उनकी कथा का आयोजन पूरे जिले के लिए सौभाग्य का अवसर है।
कथा का कार्यक्रम—22 से 29 नवंबर तक रोजाना सायं 3 से 6 बजे तक, 30 नवंबर को प्रातः 9 से 12
कंसल परिवार ने बताया कि—
22 नवंबर से 29 नवंबर तक कथा प्रतिदिन शाम 3 से 6 बजे तक आयोजित होगी।
30 नवंबर को कथा का विशेष सत्र प्रातः 9 से 12 बजे तक होगा।
कथा स्थल पर हर दिन श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या उमड़ने की संभावना है।

