उत्तर प्रदेश

Meerut आबूलेन ज्वेलरी ठगी कांड: WhatsApp कॉल से रचा गया एक करोड़ का खेल, रघुनंदन ज्वेलर्स में हड़कंप

Meerut jewellery fraud का एक बेहद चौंकाने वाला और पेचीदा मामला उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर के सबसे व्यस्त और प्रतिष्ठित बाजार आबूलेन से सामने आया है। बुधवार दोपहर आबू प्लाजा स्थित रघुनंदन ज्वेलर्स के शोरूम में जो कुछ हुआ, उसने व्यापारिक जगत, सर्राफा बाजार और आम लोगों—तीनों को सकते में डाल दिया। केवल एक WhatsApp कॉल के जरिए एक करोड़ रुपये के आभूषणों का ऐसा जाल बुना गया, जिसमें कई लोग खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।


🔴 WhatsApp कॉल से शुरू हुई एक करोड़ की साजिश

Meerut jewellery fraud की शुरुआत बुधवार दोपहर करीब 1:02 बजे हुई, जब कृष्णा नाम के व्यक्ति ने WhatsApp कॉल के जरिए रघुनंदन ज्वेलर्स के संचालक के बेटे तन्मय अग्रवाल से संपर्क किया। कॉल करने वाले ने खुद को एक बड़ा ग्राहक बताते हुए लगभग एक करोड़ रुपये के सोने के आभूषण खरीदने की इच्छा जताई।

बातचीत के दौरान कृष्णा ने भरोसा दिलाया कि वह स्वयं शोरूम नहीं आ पाएगा, लेकिन अपने भतीजे को भेज रहा है, जो आभूषण पसंद करेगा। बड़े ऑर्डर और आत्मविश्वास भरी बातचीत के कारण किसी को भी संदेह नहीं हुआ।


🔴 कथित भतीजे की एंट्री और आभूषणों का चयन

करीब 20 मिनट बाद एक युवक रघुनंदन ज्वेलर्स के शोरूम में पहुंचा और उसने खुद को कृष्णा का भतीजा बताया। उसने बेहद सहजता और पेशेवर अंदाज में लगभग 601 ग्राम सोने के आभूषण—गले का हार, अंगूठियां, बुंदे और अन्य जेवरात—पसंद कर लिए।

Meerut jewellery fraud के इस चरण में सब कुछ सामान्य व्यापारिक प्रक्रिया जैसा ही प्रतीत हो रहा था। आभूषण चयन के बाद ज्वेलर्स ने WhatsApp कॉल पर ही कृष्णा से भुगतान के बारे में बात की और ऑनलाइन ट्रांजैक्शन की मांग रखी।


🔴 नकद भुगतान का प्रस्ताव और नया मोड़

कृष्णा ने ऑनलाइन भुगतान करने में असमर्थता जताते हुए कहा कि वह फिलहाल नकद राशि शोरूम भेज रहा है और बाद में नकद वापस लेकर ऑनलाइन पेमेंट कर देगा। यह बात भी सुनने में असामान्य नहीं लगी, क्योंकि सर्राफा व्यापार में बड़े लेन-देन कभी-कभी इस तरह भी होते हैं।

लगभग आधे घंटे बाद शोरूम पर चार लोग पहुंचे। इनमें से दो ने खुद को सदर बाजार मेरठ का निवासी बताया, जबकि दो ने मुजफ्फरपुर से होने की बात कही।


🔴 एक करोड़ की नकदी और आभूषण लेकर फरार युवक

Meerut jewellery fraud के सबसे संवेदनशील क्षण में चारों लोगों ने मिलकर करीब एक करोड़ रुपये नकद रघुनंदन ज्वेलर्स को सौंप दिए। भुगतान मिलने के बाद कृष्णा का कथित भतीजा आभूषण लेकर शोरूम से निकल गया।

यहीं तक सब कुछ एक सामान्य व्यापारिक सौदे जैसा लग रहा था, लेकिन इसके बाद जो हुआ, उसने पूरे मामले को ठगी और भ्रम के जाल में बदल दिया।


🔴 अचानक बदला रुख, पैसे वापस मांगने लगे लोग

कथित भतीजे के जाते ही नकद भुगतान करने वाले चारों लोगों ने ज्वेलर्स से अपने पैसे वापस मांगने शुरू कर दिए। उनका कहना था कि उनका कृष्णा या उसके भतीजे से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने दावा किया कि यह रकम उन्होंने आभूषण खरीदने के लिए नहीं, बल्कि किसी अन्य उद्देश्य से दी थी।

इस बात को लेकर शोरूम में तीखी बहस शुरू हो गई। ज्वेलर्स का साफ कहना था कि उन्होंने आभूषणों के बदले पैसे लिए हैं, ऐसे में रकम लौटाने का सवाल ही नहीं उठता।


🔴 हंगामा, पुलिस की एंट्री और जांच शुरू

Meerut jewellery fraud के इस विवाद ने देखते ही देखते हंगामे का रूप ले लिया। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और सभी पक्षों से पूछताछ शुरू की गई। भुगतान करने वाले लोगों का कहना है कि उन्हें भी किसी ने झांसे में लेकर भेजा था और वे खुद ठगी के शिकार हैं।

पुलिस को आशंका है कि यह पूरा मामला एक सुनियोजित ठगी है, जिसमें WhatsApp कॉल, नकद लेन-देन और फर्जी पहचान का इस्तेमाल किया गया।


🔴 बुलियन ट्रेडर्स एसोसिएशन का बयान

इस मामले पर बुलियन ट्रेडर्स एसोसिएशन के महामंत्री विजय आनंद अग्रवाल ने बताया कि पहली नजर में यह मामला बेहद पेशेवर तरीके से रचा गया लगता है। उन्होंने कहा कि ज्वेलरी कारोबार में इस तरह की घटनाएं व्यापारियों के लिए बड़ा खतरा हैं और इससे बाजार में अविश्वास का माहौल बनता है।


🔴 CCTV फुटेज और डिजिटल साक्ष्यों की जांच

Meerut jewellery fraud की परतें खोलने के लिए पुलिस शोरूम और आसपास के इलाकों के CCTV फुटेज खंगाल रही है। WhatsApp कॉल, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, नकदी की सोर्स और आभूषणों की मूवमेंट—हर पहलू की जांच की जा रही है।

पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कृष्णा नाम का व्यक्ति वास्तव में कौन है, उसने किस मोबाइल नंबर और पहचान का इस्तेमाल किया और क्या इस गिरोह ने पहले भी इस तरह की घटनाओं को अंजाम दिया है।


🔴 व्यापारियों में दहशत, नए सवाल

इस Meerut jewellery fraud के बाद सर्राफा बाजार में दहशत का माहौल है। व्यापारी यह सोचने को मजबूर हैं कि बड़े ऑर्डर और नकद भुगतान के नाम पर किसी पर भरोसा करना कितना सुरक्षित है। कई व्यापारियों ने सुरक्षा नियमों और भुगतान प्रक्रिया को और सख्त करने की बात कही है।


मेरठ ज्वेलरी फ्रॉड का यह मामला केवल एक करोड़ की ठगी भर नहीं, बल्कि आधुनिक ठगी के बदलते तरीकों की गंभीर चेतावनी है। WhatsApp कॉल, नकद भुगतान और फर्जी पहचान के इस जाल ने यह साफ कर दिया है कि व्यापारिक दुनिया में सतर्कता अब विकल्प नहीं, बल्कि आवश्यकता बन चुकी है। पुलिस जांच के नतीजे यह तय करेंगे कि इस साजिश का मास्टरमाइंड कौन है और इस ठगी के पीछे कितनी गहरी साजिश छिपी हुई है।

 

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