वैश्विक

Modi–Netanyahu की दोस्ती और ‘गठबंधन का षट्कोण’: पश्चिम एशिया में नई रणनीति की आहट

Modi Israel visit alliance की शुरुआत के साथ ही पश्चिम एशिया की राजनीति और वैश्विक कूटनीति में नई हलचल साफ दिखाई देने लगी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इजरायल दौरे को केवल एक द्विपक्षीय यात्रा के रूप में नहीं, बल्कि एक व्यापक रणनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu (बेंजामिन नेतन्याहू) ने इस दौरे को कट्टरपंथी ताकतों के खिलाफ उभरते वैश्विक और क्षेत्रीय गठजोड़ की दिशा में एक अहम कदम करार दिया है।

नेतन्याहू के बयान संकेत देते हैं कि भारत–इजरायल संबंध अब पारंपरिक रक्षा, तकनीक और व्यापार सहयोग से आगे बढ़कर एक ऐसे मंच की ओर जा रहे हैं, जिसका असर पूरे पश्चिम एशिया और उससे बाहर तक महसूस किया जा सकता है।


🔴 ‘खास दोस्ती’ से आगे रणनीतिक साझेदारी

इजरायली प्रधानमंत्री ने प्रधानमंत्री मोदी को ‘खास दोस्त’ बताते हुए भारत को एक उभरती हुई वैश्विक शक्ति के रूप में रेखांकित किया। उनके अनुसार, भारत और इजरायल के रिश्ते अब केवल द्विपक्षीय हितों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह साझेदारी क्षेत्रीय स्थिरता, सुरक्षा और साझा चुनौतियों से निपटने के लिए एक बड़े ढांचे का आधार बन सकती है।

Modi Israel visit alliance को लेकर नेतन्याहू का यह आकलन बताता है कि इजरायल भारत को न सिर्फ एशिया की शक्ति के रूप में देख रहा है, बल्कि उसे पश्चिम एशिया की भविष्य की रणनीतिक संरचना में भी अहम स्थान देना चाहता है।


🔴 क्या है ‘गठबंधन का षट्कोण’?

नेतन्याहू द्वारा प्रस्तुत की गई अवधारणा को उन्होंने ‘हेक्सागन ऑफ अलायंस’ यानी गठबंधन का षट्कोण नाम दिया है। इस प्रस्तावित ढांचे में भारत के साथ-साथ अरब देश, कुछ अफ्रीकी देश, भूमध्यसागरीय क्षेत्र के देश जैसे ग्रीस और साइप्रस, तथा एशिया के अन्य साझेदार देश शामिल हो सकते हैं।

इस गठबंधन की सोच को IMEC यानी इंडिया–मिडिल ईस्ट–यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर से जोड़ा जा रहा है, जिसका उद्देश्य कनेक्टिविटी, व्यापार और आर्थिक विकास को नई गति देना है। नेतन्याहू के मुताबिक, यह गठबंधन उन देशों का समूह होगा जो साझा वास्तविकताओं, चुनौतियों और लक्ष्यों पर सहमत हैं।


🔴 कट्टरपंथी ध्रुवों के मुकाबले साझा रणनीति

नेतन्याहू का कहना है कि यह प्रस्तावित गठबंधन शिया और सुन्नी ध्रुवों जैसे कट्टरपंथी एक्सिस के मुकाबले एक संतुलित और व्यावहारिक रणनीति तैयार कर सकता है। उनके अनुसार, भले ही इन देशों के दृष्टिकोण अलग-अलग हों, लेकिन साझा सुरक्षा, स्थिरता और भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए सहयोग अपरिहार्य है।

Modi Israel visit alliance को इस संदर्भ में देखा जाए तो यह केवल सैन्य या सुरक्षा सहयोग नहीं, बल्कि एक व्यापक भू-राजनीतिक सोच का हिस्सा बनता दिख रहा है।


🔴 भारत की भूमिका: संतुलन और रणनीति

भारत की विदेश नीति पारंपरिक रूप से संतुलन पर आधारित रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने भारत–इजरायल संबंधों को भरोसे, नवाचार और शांति की साझा प्रतिबद्धता पर टिका बताया है, लेकिन नई दिल्ली किसी भी सख्त गुटीय राजनीति से दूरी बनाए रखने के लिए जानी जाती है।

भारत के चीन, रूस और अमेरिका—तीनों के साथ समानांतर संबंध हैं। इसके साथ ही भारत के ईरान के साथ भी ऐतिहासिक और रणनीतिक रिश्ते रहे हैं, जबकि सऊदी अरब के साथ सहयोग लगातार गहरा हो रहा है। ऐसे में Modi Israel visit alliance में भारत की भूमिका को लेकर कूटनीतिक संतुलन बेहद अहम माना जा रहा है।


🔴 विशेषज्ञों की चेतावनी: बढ़ सकता है ध्रुवीकरण

अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि नेतन्याहू की यह पहल पश्चिम एशिया में ध्रुवीकरण को और कठोर बना सकती है। अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, किंग्स कॉलेज लंदन के सुरक्षा अध्ययन के एसोसिएट प्रोफेसर एंड्रियास क्रिग का कहना है कि इस तरह के गठबंधन से ईरान और तुर्किये जैसे देशों को ‘घेराबंदी’ का नैरेटिव मिल सकता है।

उनके अनुसार, कुछ संभावित साझेदार देश इजरायल के बहुत करीब दिखने से हिचक सकते हैं। भारत की प्राथमिकताएं मुख्य रूप से रक्षा, तकनीक और व्यापार हैं, न कि किसी एक देश की क्षेत्रीय महत्वाकांक्षाएं।


🔴 पीएम मोदी का दूसरा इजरायल दौरा

प्रधानमंत्री मोदी 25 से 26 फरवरी तक दो दिवसीय इजरायल यात्रा पर हैं। यह उनका दूसरा इजरायल दौरा है। इससे पहले जुलाई 2017 में वे इजरायल जाने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने थे, जिसने दोनों देशों के रिश्तों को नई दिशा दी थी।

इस बार की यात्रा में प्रधानमंत्री मोदी यरुशलम में एक इनोवेशन इवेंट में भाग लेंगे और याद वाशेम का दौरा भी करेंगे, जिसे ऐतिहासिक और मानवीय दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।


🔴 क्नेसेट में संबोधन की संभावना

दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी के इजरायली संसद क्नेसेट को संबोधित करने की संभावना भी जताई जा रही है। यदि ऐसा होता है, तो यह दोनों लोकतांत्रिक देशों के बीच राजनीतिक गर्मजोशी का मजबूत संकेत होगा। इससे पहले 2015 में पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी क्नेसेट को संबोधित कर चुके हैं।

इसके अलावा प्रधानमंत्री मोदी की मुलाकात इजरायल के राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग से भी तय है।


🔴 तेज हुए कूटनीतिक संपर्क

Modi Israel visit alliance से पहले भी दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संपर्क तेज रहे हैं। विदेश मंत्री एस. जयशंकर और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल हाल के महीनों में इजरायल का दौरा कर चुके हैं। वहीं कई इजरायली मंत्री और प्रतिनिधिमंडल भारत आए हैं।

नई दिल्ली में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट में इजरायल की मजबूत मौजूदगी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उभरती तकनीकों में बढ़ते सहयोग की ओर इशारा किया है।


🔴 पश्चिम एशिया की बदलती तस्वीर

कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा भारत–इजरायल संबंधों को नई ऊंचाई देने के साथ-साथ पश्चिम एशिया की रणनीतिक तस्वीर को भी प्रभावित कर सकता है। यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है, जब वैश्विक शक्ति संतुलन तेजी से बदल रहा है और कनेक्टिविटी, तकनीक व सुरक्षा नए गठबंधनों की धुरी बनते जा रहे हैं।


प्रधानमंत्री मोदी का इजरायल दौरा केवल द्विपक्षीय संबंधों का विस्तार नहीं, बल्कि पश्चिम एशिया और उससे आगे की कूटनीति में संभावित बदलाव का संकेत है। ‘गठबंधन के षट्कोण’ की अवधारणा जहां नई संभावनाएं खोलती है, वहीं भारत के लिए संतुलन, रणनीतिक स्वायत्तता और दीर्घकालिक हितों की कसौटी भी बनकर उभरती दिख रही है।

News-Desk

News Desk एक समर्पित टीम है, जिसका उद्देश्य उन खबरों को सामने लाना है जो मुख्यधारा के मीडिया में अक्सर नजरअंदाज हो जाती हैं। हम निष्पक्षता, सटीकता, और पारदर्शिता के साथ समाचारों को प्रस्तुत करते हैं, ताकि पाठकों को हर महत्वपूर्ण विषय पर सटीक जानकारी मिल सके। आपके विश्वास के साथ, हम खबरों को बिना किसी पूर्वाग्रह के आप तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। किसी भी सवाल या जानकारी के लिए, हमें संपर्क करें: [email protected]

News-Desk has 20768 posts and counting. See all posts by News-Desk

Avatar Of News-Desk

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

3 × two =