उत्तर प्रदेश

मेरठ-नोएडा में ISI के ‘Honeytrap’ नेटवर्क का सनसनीखेज खुलासा, युवकों का ब्रेनवॉश कर देश विरोधी गतिविधियों में फंसाने का आरोप

Uttar Pradesh के मेरठ और नोएडा में कथित तौर पर पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी Inter-Services Intelligence यानी ISI से जुड़े एक संदिग्ध ‘Honeytrap’ मॉड्यूल का खुलासा होने के बाद सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मच गया है। यूपी ATS ने इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया है, जिन पर सोशल मीडिया और ऑनलाइन संपर्कों के जरिए युवाओं का ब्रेनवॉश करने का आरोप है।

गिरफ्तार आरोपियों में मेरठ निवासी तुषार चौहान और दिल्ली निवासी समीर शामिल बताए जा रहे हैं। जांच एजेंसियों का दावा है कि दोनों सीधे पाकिस्तान में बैठे कथित गैंगस्टर और ISI एजेंट बताए जा रहे शहजाद भट्टी के संपर्क में थे।


सोशल मीडिया के जरिए शुरू हुआ संपर्क, ‘फिजा’ नाम की महिला पर गंभीर आरोप

जांच एजेंसियों के अनुसार इस पूरे मामले में एक महिला हैंडलर “फिजा” की भूमिका भी सामने आई है। बताया जा रहा है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए पहले युवाओं से दोस्ती की जाती थी और फिर धीरे-धीरे उन्हें भावनात्मक रूप से प्रभावित किया जाता था।

ATS सूत्रों के मुताबिक दिल्ली निवासी समीर ने ही तुषार का संपर्क फिजा से कराया था। इसके बाद फोन कॉल, चैट और इंटरनेट के माध्यम से लगातार बातचीत हुई। जांच एजेंसियों का आरोप है कि इसी दौरान तुषार का कथित तौर पर मानसिक रूप से ब्रेनवॉश किया गया।

हालांकि इन आरोपों की जांच अभी जारी है और एजेंसियां डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पूरे नेटवर्क की पड़ताल कर रही हैं।


‘ताबीज’ और मानसिक प्रभाव का दावा, परिवार ने सुनाई चौंकाने वाली बातें

तुषार की मां ऋतु ने मीडिया से बातचीत में कई गंभीर दावे किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि फिजा नाम की महिला ने उनके बेटे को एक “ताबीज” दिया था और उसे हमेशा गले में पहनने के लिए कहा था।

परिवार का कहना है कि इसके बाद तुषार के व्यवहार में बड़ा बदलाव दिखाई देने लगा। मां के अनुसार वह परिवार के लोगों से अलग तरह की बातें करने लगा था और उसका स्वभाव भी बदल गया था।

परिजनों का दावा है कि वह कथित तौर पर इस रिश्ते को लेकर इतना प्रभावित हो गया था कि परिवार के विरोध करने पर आक्रामक प्रतिक्रिया देने लगा।

हालांकि पुलिस और जांच एजेंसियां इन दावों की भी जांच कर रही हैं और अभी तक आधिकारिक तौर पर किसी निष्कर्ष की घोषणा नहीं की गई है।


मोबाइल फोन बना जांच का सबसे बड़ा सुराग

जांच एजेंसियों के मुताबिक इस पूरे मामले की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी मोबाइल फोन और डिजिटल चैट रिकॉर्ड हैं। पुलिस ने आरोपियों के मोबाइल फोन जब्त कर लिए हैं और उन्हें फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है।

मेरठ के ब्रह्मपुरी थाना पुलिस के माध्यम से मोबाइल डेटा की गहन जांच कराई जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि चैट हिस्ट्री, कॉल रिकॉर्ड, सोशल मीडिया संपर्क और अन्य डिजिटल साक्ष्यों से पूरे नेटवर्क के बारे में अहम जानकारी मिल सकती है।

परिवार ने भी मांग की है कि मोबाइल फोन की बारीकी से जांच की जाए ताकि यह पता चल सके कि इस नेटवर्क से और कितने लोग जुड़े हुए थे।


क्या होता है ‘हनीट्रैप’?

सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार “हनीट्रैप” ऐसी रणनीति को कहा जाता है जिसमें किसी व्यक्ति को भावनात्मक, रोमांटिक या व्यक्तिगत संबंधों के जरिए अपने प्रभाव में लिया जाता है। इसके बाद उससे संवेदनशील जानकारी हासिल करने, मानसिक रूप से प्रभावित करने या अवैध गतिविधियों में शामिल करने की कोशिश की जाती है।

डिजिटल युग में सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए ऐसे मामलों में तेजी आई है। सुरक्षा एजेंसियां लगातार लोगों को ऑनलाइन संपर्कों को लेकर सतर्क रहने की सलाह देती रही हैं।


युवाओं को निशाना बनाने के आरोप ने बढ़ाई चिंता

इस मामले में सबसे गंभीर बात यह मानी जा रही है कि कथित तौर पर कम उम्र के युवाओं को निशाना बनाया जा रहा था। जांच एजेंसियों का कहना है कि सोशल मीडिया के जरिए पहले दोस्ती और भरोसा कायम किया जाता था, फिर धीरे-धीरे मानसिक रूप से प्रभावित करने की कोशिश की जाती थी।

विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बढ़ती निर्भरता के बीच साइबर सुरक्षा और मानसिक जागरूकता दोनों बेहद जरूरी हो गई हैं।


ATS कई पहलुओं पर कर रही जांच

Uttar Pradesh Anti-Terrorism Squad फिलहाल पूरे मामले की कई एंगल से जांच कर रही है। एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या यह नेटवर्क केवल ऑनलाइन संपर्क तक सीमित था या इसके पीछे कोई बड़ा संगठित मॉड्यूल काम कर रहा था।

सूत्रों के अनुसार जांच एजेंसियां आरोपियों के बैंकिंग रिकॉर्ड, सोशल मीडिया अकाउंट्स और अंतरराष्ट्रीय संपर्कों की भी जांच कर रही हैं।

हालांकि अभी तक जांच जारी है और आधिकारिक रूप से विस्तृत चार्जशीट या अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है।


सोशल मीडिया के दौर में बढ़ती साइबर सतर्कता की जरूरत

विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला एक बार फिर सोशल मीडिया के जरिए होने वाले संभावित साइबर और मनोवैज्ञानिक खतरों को सामने लाता है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर अनजान लोगों से संपर्क और निजी जानकारी साझा करना कई बार गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है।

सुरक्षा एजेंसियां लगातार लोगों, खासकर युवाओं को सतर्क रहने और संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधियों की जानकारी तुरंत पुलिस को देने की सलाह देती रही हैं।


मेरठ और नोएडा में सामने आए कथित ISI ‘हनीट्रैप’ मॉड्यूल के खुलासे ने सुरक्षा एजेंसियों के साथ-साथ आम लोगों की चिंता भी बढ़ा दी है। जांच एजेंसियां अब डिजिटल साक्ष्यों और मोबाइल डेटा के जरिए पूरे नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी हैं। यह मामला सोशल मीडिया के दौर में साइबर सतर्कता, मानसिक सुरक्षा और युवाओं को ऑनलाइन जालसाजी से बचाने की आवश्यकता को भी गंभीरता से सामने लाता है।

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