उत्तर प्रदेश

मेरठ के IIMT विश्वविद्यालय में MBA छात्रा की संदिग्ध मौत से हड़कंप, हॉस्टल की तीसरी मंजिल से गिरने पर उठे बड़े सवाल

मेरठ के गंगानगर स्थित IIMT विश्वविद्यालय में एमबीए अंतिम वर्ष की छात्रा अनु गुप्ता की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी। बुधवार सुबह हॉस्टल की सीढ़ियों के नीचे छात्रा का लहूलुहान शव मिलने के बाद विश्वविद्यालय परिसर में हड़कंप मच गया। घटना के बाद परिजन, छात्र-छात्राएं और पुलिस प्रशासन देर रात तक पूरे मामले को लेकर सक्रिय रहे।

23 वर्षीय अनु गुप्ता सहारनपुर जिले की रहने वाली थी और विश्वविद्यालय के सरोजनी नायडू गर्ल्स हॉस्टल में रहकर पढ़ाई कर रही थी। घटना के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन, पुलिस और छात्र संगठनों के बीच तनावपूर्ण माहौल देखने को मिला।


सुबह तक परिवार से सामान्य बातचीत, कुछ देर बाद मिली हादसे की खबर

अनु की बड़ी बहन तनु ने बताया कि बुधवार सुबह करीब नौ बजे उनकी अनु से सामान्य बातचीत हुई थी। अनु ने बताया था कि वह अपनी असाइनमेंट फाइल तैयार कर रही है और परीक्षा की तैयारी में जुटी हुई है।

कुछ देर बाद दिल्ली में रहने वाली छोटी बहन शिवांगी ने अनु को कॉल किया, लेकिन फोन उसकी रूममेट ने उठाया। रूममेट ने बताया कि अनु का फोन कमरे में है। इसी दौरान उसने घबराए हुए अंदाज में कहा कि “दीदी कोई लड़की सीढ़ियों से गिर गई है।”

यह सुनते ही परिवार में अफरा-तफरी मच गई। छोटी बहन ने तुरंत बड़ी बहन तनु को फोन किया। परिजनों ने कई बार विश्वविद्यालय प्रशासन से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उनका आरोप है कि उन्हें स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई।


सीसीटीवी फुटेज में दिखी छात्रा की अंतिम गतिविधियां

पुलिस जांच में सामने आया कि अनु तीसरी मंजिल पर स्थित कमरा नंबर 63 में रहती थी। हॉस्टल परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी पुलिस ने कब्जे में ली है।

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक फुटेज में दिखाई दे रहा है कि अनु हॉस्टल की ग्रिल के बीच से निकलकर स्टेयरवेल की ओर गई और कुछ सेकेंड रुकने के बाद नीचे छलांग लगा दी। इसी कारण उसका शव सीढ़ियों के बीचोंबीच पड़ा मिला।

पुलिस ने बताया कि अनु के चेहरे, कंधे और हाथ पर गंभीर चोटों के निशान मिले हैं। हालांकि पूरे मामले की फोरेंसिक जांच भी कराई जा रही है ताकि किसी भी पहलू को नजरअंदाज न किया जाए।


परिजनों ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर लगाए गंभीर आरोप

घटना के बाद विश्वविद्यालय पहुंचे परिजनों ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि उन्हें समय पर सही जानकारी नहीं दी गई और पूरे मामले को दबाने की कोशिश की गई।

परिजनों का आरोप है कि जब वे मेरठ के लिए रवाना हुए तब तक उन्हें यह नहीं बताया गया था कि अनु की हालत गंभीर है। बाद में उन्हें फोन कर कहा गया कि छात्रा अस्पताल में भर्ती है।

अनु की बहन तनु ने कहा कि उनकी बहन बेहद होनहार छात्रा थी और एमबीए प्रथम वर्ष में उसने लगभग 80 प्रतिशत अंक प्राप्त किए थे। परिवार का दावा है कि अनु मानसिक रूप से कमजोर नहीं थी बल्कि भविष्य को लेकर काफी उत्साहित रहती थी।


फर्जी सुसाइड नोट की चर्चा से बढ़ा रहस्य

घटना के बाद पूरे दिन पुलिस और विश्वविद्यालय प्रशासन यह कहते रहे कि मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। लेकिन शाम होते-होते एक नया मोड़ सामने आया।

एक छात्रा विश्वविद्यालय गेट के बाहर पहुंची और उसने दावा किया कि अनु की मौत के बाद फर्जी सुसाइड नोट तैयार करने की कोशिश की गई है। कथित नोट में लिखा गया था कि एक सहपाठी के पिता की मृत्यु हो गई है, मां के निधन के बाद वह मानसिक तनाव में थी और बैक पेपर आने से परेशान थी।

हालांकि उस छात्रा ने यह स्पष्ट नहीं किया कि कथित नोट उसे कहां से मिला। पुलिस अब इस पूरे मामले की भी जांच कर रही है।


मां की मौत के बाद घर पर थी अनु, परीक्षा के लिए लौटी थी हॉस्टल

परिवार के अनुसार अनु की मां उषा गुप्ता का 14 फरवरी को निधन हो गया था। इसके बाद से अनु घर पर ही रह रही थी। इसी दौरान उसके हाथ में चोट लगी थी, जिसका ऑपरेशन भी कराया गया था।

विश्वविद्यालय की ओर से 21 मई से परीक्षा शुरू होने की सूचना मिलने के बाद परिजन मंगलवार को उसे हॉस्टल छोड़ने आए थे। परिवार का कहना है कि अनु की उपस्थिति कम होने के कारण उसे परीक्षा से रोकने की बात कही जा रही थी।

हालांकि परिजनों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से बातचीत कर मामला सुलझाया था, जिसके बाद वे वापस सहारनपुर लौट गए थे।


छात्रों का फूटा गुस्सा, विश्वविद्यालय गेट पर घंटों धरना

अनु की मौत की खबर फैलते ही विश्वविद्यालय परिसर में छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा। बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं विश्वविद्यालय गेट पर धरने पर बैठ गए और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी।

छात्रों का आरोप था कि अनु को डिबार किए जाने, भारी जुर्माना लगाए जाने और विभागीय दबाव के कारण मानसिक तनाव झेलना पड़ रहा था। छात्रों ने एचओडी और हॉस्टल वार्डन पर गंभीर आरोप लगाए।

धरने में मेरठ कॉलेज और चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के छात्र नेता भी शामिल हो गए। छात्र कुलपति को मौके पर बुलाने की मांग पर अड़े रहे।

करीब चार घंटे तक चले धरने के बाद छात्रों ने लिखित मांग पत्र सौंपा, जिसमें—

  • अनु के परिवार को 50 लाख रुपये मुआवजा
  • दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई
  • फाइन सिस्टम खत्म करने
  • डिबार छात्रों को बहाल करने

जैसी प्रमुख मांगें शामिल थीं।


पुलिस और प्रशासन देर रात तक जुटे रहे जांच में

घटना की सूचना मिलते ही थाना गंगानगर, भावनपुर और इंचौली पुलिस मौके पर पहुंच गई। सीओ सदर देहात सुधीर सिंह और प्रशिक्षु आईपीएस बजरंग प्रसाद ने भी घटनास्थल का निरीक्षण किया।

फोरेंसिक टीम ने हॉस्टल परिसर से कई महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए। देर रात तक पुलिस, विश्वविद्यालय प्रशासन और छात्रों के बीच बातचीत का दौर चलता रहा।

इसी दौरान एलआईयू टीम की महिला कांस्टेबल के साथ कुछ छात्राओं द्वारा अभद्रता किए जाने की भी सूचना सामने आई, हालांकि पुलिस ने स्थिति को संभाल लिया।


विश्वविद्यालय प्रशासन और पुलिस का बयान

विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. बीपी राकेश ने बयान जारी करते हुए कहा कि छात्रा की मृत्यु हॉस्टल बिल्डिंग से गिरने के कारण हुई है और पुलिस जांच में विश्वविद्यालय पूरा सहयोग कर रहा है।

वहीं पुलिस अधीक्षक देहात अभिजीत कुमार ने कहा कि प्रारंभिक जांच में मामला आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है। उन्होंने बताया कि छात्रा मां की मृत्यु और परीक्षा में बैक आने से तनाव में थी, लेकिन हर पहलू की गहन जांच की जा रही है।


शिक्षण संस्थानों में मानसिक दबाव और छात्र तनाव पर उठे सवाल

इस घटना ने एक बार फिर उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों पर बढ़ते मानसिक दबाव, उपस्थिति नियम, जुर्माना प्रणाली और शैक्षणिक तनाव को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को केवल शैक्षणिक प्रदर्शन पर ही नहीं बल्कि छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी गंभीरता से काम करने की आवश्यकता है। कई छात्र व्यक्तिगत समस्याओं, पारिवारिक परिस्थितियों और करियर के दबाव के बीच मानसिक तनाव का सामना करते हैं।


मेरठ के IIMT विश्वविद्यालय में MBA छात्रा अनु गुप्ता की मौत ने पूरे शिक्षा जगत को झकझोर कर रख दिया है। जहां एक ओर परिवार और छात्र विश्वविद्यालय प्रशासन पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं, वहीं पुलिस सभी पहलुओं की जांच में जुटी हुई है। इस घटना ने छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य, शैक्षणिक दबाव और विश्वविद्यालय प्रशासन की जिम्मेदारियों को लेकर एक बड़ी बहस खड़ी कर दी है।

 

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