उत्तर प्रदेश

Power Crisis- यूपी में बिजली संकट गहराया: भीषण गर्मी के बीच अघोषित कटौती से जनता बेहाल, गांवों में 8 घंटे भी नहीं मिल रही सप्लाई

उत्तर प्रदेश में इस समय भीषण गर्मी के साथ बिजली संकट/Power Crisis ने लोगों की परेशानी कई गुना बढ़ा दी है। तेज धूप, हीटवेव और लगातार बढ़ते तापमान के बीच बिजली की आंख-मिचौली ने आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। शहरों से लेकर गांवों तक लोग घंटों बिजली कटौती झेलने को मजबूर हैं। हालत यह है कि कहीं जलापूर्ति प्रभावित हो रही है तो कहीं छोटे उद्योगों का कामकाज ठप पड़ने लगा है।

प्रदेशभर में अघोषित बिजली कटौती को लेकर लोगों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। कई स्थानों पर परेशान लोग बिजली उपकेंद्रों का घेराव कर विरोध प्रदर्शन तक कर रहे हैं। गर्मी और बिजली संकट के दोहरे प्रहार ने आम लोगों की दिनचर्या अस्त-व्यस्त कर दी है।


भीषण गर्मी में बिजली कटौती से रतजगा करने को मजबूर लोग

उत्तर प्रदेश में तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है। कई जिलों में दिन का तापमान 42 से 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच रहा है। ऐसे में बिजली कटौती लोगों के लिए सबसे बड़ी समस्या बनती जा रही है।

शहरी इलाकों में रातभर बिजली की आंख-मिचौली से लोग ठीक से सो नहीं पा रहे। कूलर और एसी बंद होने के कारण बच्चे, बुजुर्ग और बीमार लोग सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।

गांवों की स्थिति और भी ज्यादा खराब बताई जा रही है। जहां सरकार की ओर से 18 घंटे बिजली आपूर्ति का दावा किया जाता है, वहीं कई ग्रामीण क्षेत्रों में केवल 8 से 10 घंटे ही बिजली मिल पा रही है।


अघोषित रोस्टर के तहत हो रही कटौती

बिजली विभाग के अभियंताओं से बातचीत में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। अधिकारियों का कहना है कि आधिकारिक तौर पर शहरी क्षेत्रों के लिए 24 घंटे और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए 18 घंटे बिजली आपूर्ति का रोस्टर निर्धारित है।

हालांकि वास्तविक स्थिति इससे अलग दिखाई दे रही है। अभियंताओं के अनुसार मांग बढ़ते ही उन्हें अघोषित कटौती करने के निर्देश मिलते हैं। सोशल मीडिया ग्रुप्स के जरिए कोड भेजे जाते हैं और उसी के अनुसार अलग-अलग क्षेत्रों में बिजली काटी जाती है।

यानी कई जगहों पर बिना किसी पूर्व सूचना के बिजली कटौती की जा रही है, जिससे लोगों की नाराजगी लगातार बढ़ रही है।


प्रदेश में बिजली मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने की आशंका

ऊर्जा विभाग के अनुमान के अनुसार इस महीने उत्तर प्रदेश में बिजली की अधिकतम मांग 33 हजार मेगावाट तक पहुंच सकती है। भीषण गर्मी के चलते घरों, दफ्तरों और उद्योगों में बिजली की खपत तेजी से बढ़ी है।

विशेषज्ञों का कहना है कि एयर कंडीशनर, कूलर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के लगातार उपयोग से बिजली व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है।

प्रदेश में लगभग 3.73 करोड़ उपभोक्ता हैं, जबकि स्वीकृत भार 8.57 करोड़ किलोवाट तक पहुंच चुका है। इसके मुकाबले उपलब्ध संसाधन काफी कम बताए जा रहे हैं।


संसाधनों और मांग के बीच बढ़ा बड़ा अंतर

जानकारी के अनुसार 132 केवी सब स्टेशनों की कुल क्षमता लगभग 6.25 करोड़ किलोवाट है। यानी स्वीकृत भार और वास्तविक क्षमता के बीच बड़ा अंतर मौजूद है।

विशेषज्ञों का कहना है कि जब उपभोक्ता एक साथ अधिक बिजली उपयोग करते हैं, तब सिस्टम पर दबाव अचानक बढ़ जाता है और ट्रांसफॉर्मर, केबल तथा अन्य उपकरण ओवरलोड होने लगते हैं।

यही वजह है कि कई इलाकों में ट्रांसफॉर्मर फुंकने, केबल जलने और लाइन ट्रिपिंग की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं।


बिजली चोरी भी बनी बड़ी चुनौती

ऊर्जा विभाग के अधिकारियों के अनुसार स्वीकृत भार के अलावा लगभग 15 प्रतिशत बिजली चोरी भी होती है। इससे सिस्टम पर अतिरिक्त दबाव बढ़ जाता है।

बिजली चोरी की वजह से वितरण व्यवस्था प्रभावित होती है और लाइन लॉस बढ़ने लगता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर बिजली चोरी पर प्रभावी नियंत्रण नहीं किया गया तो आने वाले समय में संकट और गहरा सकता है।


ओवरलोड से जवाब दे रहे उपकरण

राज्य में 33 केवी स्तर पर डिस्कॉम की स्थापित ट्रांसफॉर्मेशन क्षमता लगभग 62,123 एमवीए बताई जा रही है। पीक आवर्स में जब बिजली की मांग अचानक बढ़ जाती है तो डायवर्सिटी फैक्टर लगभग एक अनुपात एक हो जाता है।

इस स्थिति में सिस्टम पर अत्यधिक लोड पड़ता है और उपकरण जवाब देने लगते हैं। कई जगहों पर ट्रांसफॉर्मर ओवरलोड होकर बंद हो रहे हैं, जिससे लंबे समय तक बिजली बाधित हो रही है।


जलापूर्ति और उद्योगों पर भी पड़ा असर

बिजली संकट का असर केवल घरेलू जीवन तक सीमित नहीं है। कई शहरों में जलापूर्ति व्यवस्था प्रभावित हो रही है क्योंकि पानी सप्लाई करने वाले पंप बिजली कटौती के कारण समय पर नहीं चल पा रहे।

इसके अलावा छोटे और मध्यम उद्योगों को भी भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। मशीनें बंद होने और उत्पादन प्रभावित होने से कारोबारी परेशान हैं।

व्यापारिक संगठनों का कहना है कि लगातार बिजली कटौती से उत्पादन लागत बढ़ रही है और कामकाज प्रभावित हो रहा है।


उपकेंद्रों पर बढ़ रहा लोगों का गुस्सा

भीषण गर्मी और लगातार बिजली कटौती के चलते लोगों का गुस्सा अब खुलकर सामने आने लगा है। कई जिलों में लोग बिजली उपकेंद्रों पर पहुंचकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि बिना सूचना घंटों बिजली गायब रहती है, जबकि बिजली बिल लगातार बढ़ रहे हैं। ग्रामीण इलाकों में स्थिति ज्यादा गंभीर बताई जा रही है।


विशेषज्ञों ने बताए समाधान के रास्ते

ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ती मांग को देखते हुए बिजली वितरण ढांचे को तेजी से मजबूत करने की जरूरत है।

इसके लिए—

  • नए सब स्टेशन स्थापित करने
  • ट्रांसफॉर्मर क्षमता बढ़ाने
  • बिजली चोरी रोकने
  • स्मार्ट ग्रिड सिस्टम लागू करने
  • और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है।

विशेषज्ञों के मुताबिक आने वाले वर्षों में बिजली की मांग और तेजी से बढ़ेगी, इसलिए अभी से मजबूत योजना बनाना जरूरी है।


लोगों को सतर्क रहने की सलाह

चिकित्सकों और प्रशासन ने लोगों को भीषण गर्मी के दौरान सतर्क रहने की सलाह दी है। विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों का ध्यान रखने को कहा गया है।

लोगों को पर्याप्त पानी पीने, दोपहर में बाहर निकलने से बचने और बिजली जाने की स्थिति में वैकल्पिक व्यवस्था रखने की सलाह दी जा रही है।


 

उत्तर प्रदेश में बढ़ती गर्मी और बिजली संकट ने आम लोगों की मुश्किलें कई गुना बढ़ा दी हैं। अघोषित कटौती, ओवरलोड सिस्टम और बढ़ती मांग के बीच जनता राहत की उम्मीद लगाए बैठी है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले दिनों में बिजली संकट और गंभीर रूप ले सकता है, जिसका असर आम जीवन से लेकर उद्योगों तक हर क्षेत्र पर दिखाई देगा।

 

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