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Muzaffarnagar में रजिस्ट्रेशन विभाग की नीतियों के खिलाफ आंदोलन तेज: दस्तावेज लेखक, स्टांप विक्रेता और अधिवक्ता एकजुट, मुख्यमंत्री से तत्काल हस्तक्षेप की मांग

Muzaffarnagar  रजिस्ट्रेशन विभाग की नई नीतियों के विरोध में चल रहा आंदोलन अब निर्णायक चरण में पहुंचता दिखाई दे रहा है। प्रदेशभर के तहसील मुख्यालयों पर दस्तावेज लेखक, स्टांप विक्रेता और अधिवक्ता संयुक्त रूप से धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि यह विरोध केवल उनके रोजगार तक सीमित नहीं है, बल्कि आम नागरिकों, किसानों, मजदूरों, ग्रामीण परिवारों और मध्यमवर्गीय लोगों के हितों से भी सीधे जुड़ा हुआ है।

संयुक्त संघर्ष समिति का दावा है कि नई व्यवस्थाओं के कारण पंजीकरण प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक जटिल और महंगी होती जा रही है, जिससे आम जनता को भी कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।


संयुक्त संघर्ष समिति ने सरकार की नीतियों पर जताई नाराजगी

सदर तहसील परिसर में चल रहे धरना-प्रदर्शन के दौरान संयुक्त संघर्ष समिति के अध्यक्ष एडवोकेट योगेंद्र कांबोज ने पत्रकार वार्ता में कहा कि रजिस्ट्रेशन विभाग की वर्तमान नीतियों ने हजारों परिवारों के रोजगार पर संकट खड़ा कर दिया है। उन्होंने कहा कि दस्तावेज लेखक, स्टांप विक्रेता और अधिवक्ता लंबे समय से सरकार का ध्यान इस ओर आकर्षित करने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन अभी तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है।

उन्होंने बताया कि आंदोलन से संबंधित मांगों का विस्तृत ज्ञापन नगर विधायक एवं राज्य मंत्री कपिल देव अग्रवाल, मंत्री अनिल कुमार तथा जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को भेजा गया है। ज्ञापन में मुख्यमंत्री से पूरे मामले में व्यक्तिगत हस्तक्षेप कर प्रभावित वर्गों को राहत देने की अपील की गई है।

समिति का कहना है कि यदि समय रहते समाधान नहीं निकाला गया तो इसका असर आम जनता के साथ-साथ सरकार की जनछवि पर भी पड़ सकता है।


आंदोलन को अधिवक्ताओं और स्टांप विक्रेताओं का मिला व्यापक समर्थन

संयुक्त संघर्ष समिति के अनुसार यह आंदोलन अब केवल दस्तावेज लेखकों तक सीमित नहीं है। प्रदेशभर में अधिवक्ता संगठन, स्टांप विक्रेता संघ तथा दस्तावेज लेखक संगठन एक मंच पर आ चुके हैं।

समिति का दावा है कि लगभग 70 प्रतिशत आम, ग्रामीण और मध्यमवर्गीय आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इन नई व्यवस्थाओं से प्रभावित हो रही है। उनका कहना है कि रजिस्ट्रेशन से जुड़े कार्य आम नागरिकों के जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, इसलिए इन सेवाओं में किसी भी प्रकार की जटिलता का असर व्यापक स्तर पर दिखाई देता है।


पहली मांग: नई दस्तावेज लेखन नीति पर पुनर्विचार हो

संयुक्त संघर्ष समिति की पहली प्रमुख मांग दस्तावेज लेखन एवं पंजीकरण व्यवस्था में लागू नई नीति को लेकर है।

समिति का कहना है कि पूरी तरह पेपरलेस व्यवस्था लागू किए जाने के बाद हजारों दस्तावेज लेखकों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है। उनका आरोप है कि नई प्रणाली लागू करते समय जमीनी स्तर की व्यावहारिक समस्याओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया।

आंदोलनकारियों का कहना है कि तकनीकी सुधारों का स्वागत किया जाना चाहिए, लेकिन ऐसी व्यवस्था नहीं बनाई जानी चाहिए जिससे वर्षों से इस क्षेत्र में कार्य कर रहे लोगों का रोजगार प्रभावित हो जाए।


दूसरी मांग: रियल टाइम खतौनी व्यवस्था में सुधार किया जाए

संघर्ष समिति की दूसरी प्रमुख मांग खतौनी व्यवस्था से जुड़ी हुई है।

समिति के अनुसार वर्तमान रियल टाइम खतौनी प्रणाली में बड़ी संख्या में त्रुटियां सामने आ रही हैं। उनका दावा है कि तैयार की जा रही खतौनियों में 50 से 60 प्रतिशत तक गलतियां पाई जा रही हैं, जिससे किसानों और आम नागरिकों को अतिरिक्त आर्थिक और प्रशासनिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

समिति ने मांग की है कि कानूनगो, तहसीलदार और उप जिलाधिकारी स्तर पर त्रुटियों के निस्तारण के लिए निश्चित समय सीमा निर्धारित की जाए। इसके साथ ही शिकायतों के समाधान के लिए अलग से एक ऑनलाइन पोर्टल विकसित किया जाए ताकि नागरिकों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।


तीसरी मांग: सभी दस्तावेजों का सुरक्षित डिजिटल रिकॉर्ड बनाया जाए

संयुक्त संघर्ष समिति ने पंजीकरण के बाद दस्तावेजों के संरक्षण को भी महत्वपूर्ण मुद्दा बताया है।

समिति का कहना है कि कई बार नागरिकों के मूल दस्तावेज खो जाते हैं या क्षतिग्रस्त हो जाते हैं। ऐसी स्थिति में प्रमाणित प्रतिलिपि प्राप्त करने की प्रक्रिया काफी कठिन और समय लेने वाली होती है।

इसलिए समिति ने सरकार से मांग की है कि पुराने और नए सभी पंजीकृत दस्तावेजों का सुरक्षित डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाए तथा उन्हें ऑनलाइन उपलब्ध कराया जाए, जिससे भविष्य में प्रमाणित प्रतियां आसानी से प्राप्त की जा सकें।

विशेषज्ञों का भी मानना है कि डिजिटल रिकॉर्ड प्रणाली से पारदर्शिता और सुरक्षा दोनों में सुधार हो सकता है।


चौथी मांग: स्टांप विक्रेताओं का कमीशन बढ़ाया जाए

स्टांप विक्रेताओं ने भी अपनी आर्थिक समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है।

समिति का कहना है कि ऑनलाइन स्टांप वितरण व्यवस्था लागू होने के बाद स्टांप विक्रेताओं का कमीशन कम कर दिया गया, जबकि उन्हें कंप्यूटर, प्रिंटर, इंटरनेट, ऑपरेटर और अन्य तकनीकी संसाधनों पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ रहा है।

आंदोलनकारियों का आरोप है कि निजी एजेंसियों को पर्याप्त भुगतान किया जा रहा है, जबकि वर्षों से इस व्यवसाय से जुड़े स्टांप विक्रेताओं की आय लगातार घट रही है। इससे हजारों परिवारों की आजीविका प्रभावित हो रही है।


पांचवीं मांग: दस्तावेज लेखन शुल्क में तत्काल संशोधन

संयुक्त संघर्ष समिति की पांचवीं प्रमुख मांग दस्तावेज लेखन शुल्क से संबंधित है।

समिति का कहना है कि वर्तमान शुल्क संरचना लगभग चार से पांच दशक पहले निर्धारित की गई थी। तब से कार्यप्रणाली पूरी तरह बदल चुकी है और आज अधिकांश प्रक्रिया ऑनलाइन एवं कंप्यूटरीकृत हो गई है।

इसके बावजूद दस्तावेज लेखन शुल्क में आवश्यक संशोधन नहीं किया गया है। समिति ने सरकार से मांग की है कि वर्तमान परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए नई शुल्क सूची तत्काल जारी की जाए, जिससे इस व्यवसाय से जुड़े लोगों को आर्थिक राहत मिल सके।


मुख्यमंत्री से शीघ्र निर्णय लेने की अपील

संयुक्त संघर्ष समिति ने मुख्यमंत्री से पूरे मामले का स्वयं संज्ञान लेने की अपील करते हुए कहा है कि यदि समय रहते समाधान नहीं निकाला गया तो प्रदेशभर में आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है।

समिति का कहना है कि उनका उद्देश्य टकराव नहीं बल्कि संवाद के माध्यम से समाधान निकालना है। इसलिए सरकार को संबंधित संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर व्यावहारिक और संतुलित समाधान तलाशना चाहिए।


पत्रकार वार्ता में बड़ी संख्या में अधिवक्ता और प्रतिनिधि रहे मौजूद

पत्रकार वार्ता में संयुक्त संघर्ष समिति के अध्यक्ष एडवोकेट योगेंद्र कांबोज के अलावा हाजी कमरूज्जमा, एडवोकेट हेमंत अरोरा, एडवोकेट संजय शिवम, एडवोकेट मनोज पाल, रवी जैन, किशनचंद कंबोज, रंजीत त्यागी, अशोक त्यागी, कुलदीप गुप्ता, शशिकांत शर्मा, अभिनव मुद्गल, अशोक माहेश्वरी, विजय कुमार, नूर मोहम्मद सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता, दस्तावेज लेखक और स्टांप विक्रेता उपस्थित रहे।

प्रतिनिधियों ने एक स्वर में कहा कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

मुजफ्फरनगर सहित प्रदेशभर में रजिस्ट्रेशन विभाग की नई नीतियों के विरोध में चल रहा आंदोलन अब व्यापक स्वरूप लेता दिखाई दे रहा है। संयुक्त संघर्ष समिति का कहना है कि उनकी मांगें केवल रोजगार से जुड़ी नहीं हैं, बल्कि पंजीकरण प्रक्रिया को अधिक सरल, पारदर्शी और आम नागरिकों के लिए सुविधाजनक बनाने से भी संबंधित हैं। फिलहाल सभी की निगाहें राज्य सरकार के अगले कदम और मुख्यमंत्री स्तर पर संभावित हस्तक्षेप पर टिकी हुई हैं, क्योंकि आंदोलनकारी समाधान के लिए सकारात्मक वार्ता की उम्मीद जता रहे हैं।

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