अयोध्या चढ़ावा विवाद पर Pramod Tyagi का बड़ा बयान: ‘यह चोरी नहीं, भारत की पहचान और सनातन की प्रतिष्ठा की लड़ाई है’
Shyama Charan Panwar
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Pramod Tyagi, अयोध्या, उत्तर प्रदेश समाचार, चढ़ावा विवाद, प्रमोद त्यागी, बयान, राजनीति, राम मंदिर, राम मंदिर समाचार, विश्व हिन्दू महासंघ भारत, सनातनVishva Hindu Mahasangh Bharat के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रमोद त्यागी (एडवोकेट) ने अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावे से जुड़े विवाद पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे केवल वित्तीय अनियमितता का मामला मानने से इनकार किया है। उन्होंने दावा किया कि यह विवाद भारत की सांस्कृतिक पहचान, धार्मिक आस्था और राष्ट्रीय विमर्श से जुड़ा हुआ है। उन्होंने अपने बयान में कहा कि राम मंदिर को लेकर जिस प्रकार की चर्चाएं और आरोप लगाए जा रहे हैं, उन्हें व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखने की आवश्यकता है।
Pramod Tyagi ने कहा कि कुछ लोग चढ़ावे से जुड़े मामले को आधार बनाकर पूरे राम मंदिर, ट्रस्ट और करोड़ों रामभक्तों को कठघरे में खड़ा करने का प्रयास कर रहे हैं। उनके अनुसार यदि किसी कर्मचारी द्वारा कथित अनियमितता की जाती है तो उसकी जिम्मेदारी संबंधित व्यक्ति की तय होनी चाहिए, पूरे संस्थान या श्रद्धालुओं की नहीं।

‘चोरी से ज्यादा बड़ा मुद्दा नैरेटिव का है’
प्रमोद त्यागी ने अपने बयान में कहा कि अयोध्या से जुड़े विवाद को केवल कानूनी या प्रशासनिक विषय के रूप में नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसके माध्यम से एक व्यापक सामाजिक और वैचारिक बहस खड़ी करने का प्रयास हो रहा है।
उन्होंने कहा कि उनके अनुसार कुछ लोग इस घटनाक्रम के आधार पर यह संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि राम मंदिर की व्यवस्था पर भरोसा नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि इस प्रकार की चर्चाओं का उद्देश्य लोगों की धार्मिक आस्था को प्रभावित करना है।
भारत की पहचान को लेकर भी रखी अपनी राय
प्रमोद त्यागी ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में अयोध्या और राम मंदिर वैश्विक स्तर पर भारत की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का प्रमुख केंद्र बनकर उभरे हैं। उन्होंने दावा किया कि राम मंदिर बनने के बाद देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और इससे भारत की सांस्कृतिक छवि को नई पहचान मिली है।
उन्होंने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि भारत की पहचान को लेकर भी एक वैचारिक विमर्श चल रहा है और इसी संदर्भ में अयोध्या से जुड़े विवादों को देखा जाना चाहिए।
‘कर्मचारी की गलती को पूरे ट्रस्ट से जोड़ना उचित नहीं’
विश्व हिन्दू महासंघ भारत के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि यदि किसी संस्थान में कोई कर्मचारी नियमों का उल्लंघन करता है और उसके विरुद्ध कार्रवाई होती है, तो पूरे संस्थान को दोषी ठहराना न्यायसंगत नहीं माना जा सकता।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि किसी घर में चोरी होती है तो मकान मालिक को चोर नहीं कहा जाता। इसी प्रकार यदि किसी व्यक्ति पर आरोप है तो जांच के आधार पर उसी की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
‘राम मंदिर को लेकर भावनाओं का सम्मान होना चाहिए’
प्रमोद त्यागी ने कहा कि करोड़ों लोगों की आस्था राम मंदिर से जुड़ी हुई है। उन्होंने अपील की कि किसी भी विवाद या जांच को तथ्यों और कानून के आधार पर आगे बढ़ाया जाए तथा पूरे धार्मिक समुदाय या श्रद्धालुओं पर सामान्यीकृत टिप्पणी करने से बचा जाए।
उन्होंने कहा कि यदि किसी स्तर पर कोई अनियमितता हुई है तो संबंधित एजेंसियों को निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई करनी चाहिए।
सोशल मीडिया और राजनीतिक बयानबाजी पर भी जताई चिंता
अपने बयान में प्रमोद त्यागी ने कहा कि सोशल मीडिया पर बिना जांच पूरी हुए विभिन्न प्रकार की टिप्पणियां और निष्कर्ष सामने आ रहे हैं। उनके अनुसार संवेदनशील धार्मिक विषयों पर संयमित भाषा और जिम्मेदार सार्वजनिक विमर्श आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि किसी भी मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही निकाला जाना चाहिए।
कानूनी प्रक्रिया का इंतजार जरूरी
अयोध्या में चढ़ावे से जुड़े मामले की जांच संबंधित एजेंसियों द्वारा की जा रही है। ऐसे मामलों में अंतिम निष्कर्ष जांच, उपलब्ध साक्ष्यों और सक्षम प्राधिकरण के निर्णय के बाद ही स्पष्ट होंगे।
प्रमोद त्यागी ने अपने बयान के अंत में कहा कि उनके अनुसार यह केवल एक प्रशासनिक विवाद नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक पहचान और आस्था से जुड़ा विषय है। उन्होंने समाज से अपील की कि तथ्यों और कानून के साथ-साथ धार्मिक संवेदनाओं का भी सम्मान किया जाए।

