US Supreme Court का ऐतिहासिक फैसला: जन्म लेते ही मिलेगी अमेरिकी नागरिकता, ट्रम्प का आदेश असंवैधानिक घोषित
US Supreme Court ने जन्मजात नागरिकता (Birthright Citizenship) को लेकर एक महत्वपूर्ण संवैधानिक फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि अमेरिका में जन्म लेने वाला प्रत्येक बच्चा जन्म से अमेरिकी नागरिक होगा, चाहे उसके माता-पिता देश में अवैध रूप से रह रहे हों या फिर किसी अस्थायी वीजा पर अमेरिका में मौजूद हों।
पांच के मुकाबले चार जजों के बहुमत से दिए गए इस फैसले में अदालत ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के उस कार्यकारी आदेश (Executive Order) को असंवैधानिक करार देते हुए निरस्त कर दिया, जिसमें कुछ श्रेणियों के बच्चों को जन्म के आधार पर नागरिकता देने पर रोक लगाने की कोशिश की गई थी।
मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स ने बहुमत का फैसला लिखा।
158 वर्षों से लागू व्यवस्था को बरकरार रखा
अमेरिका में जन्मजात नागरिकता का अधिकार पिछले लगभग 158 वर्षों से लागू संवैधानिक व्यवस्था का हिस्सा है। यह अधिकार अमेरिकी संविधान के 14वें संशोधन (14th Amendment) के तहत सुनिश्चित किया गया है।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि यह संवैधानिक अधिकार है और इसे केवल किसी कार्यकारी आदेश या सामान्य कानून के माध्यम से समाप्त नहीं किया जा सकता।
ट्रम्प ने शपथ ग्रहण के दिन जारी किया था आदेश
डोनाल्ड ट्रम्प ने 20 जनवरी 2025 को राष्ट्रपति पद की शपथ लेने के कुछ घंटे बाद ही एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए थे। इस आदेश का उद्देश्य ऐसे बच्चों को जन्म से नागरिकता मिलने पर रोक लगाना था, जिनके माता-पिता अवैध रूप से अमेरिका में रह रहे हों या अस्थायी वीजा पर आए हों।
हालांकि, आदेश जारी होने के तुरंत बाद कई संघीय जिला अदालतों ने उस पर अस्थायी रोक लगा दी थी। इसके चलते यह आदेश प्रभावी नहीं हो सका और मामला अंततः सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा।
अब सर्वोच्च अदालत ने अंतिम निर्णय देते हुए इस आदेश को असंवैधानिक घोषित कर दिया है।
संविधान में संशोधन के बिना नहीं बदल सकता कानून
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि अमेरिकी संसद (कांग्रेस) सामान्य कानून बनाकर जन्मजात नागरिकता के अधिकार को सीमित नहीं कर सकती।
यदि भविष्य में इस व्यवस्था में कोई बदलाव करना हो, तो उसके लिए अमेरिकी संविधान में संशोधन करना आवश्यक होगा।
यह टिप्पणी जन्मजात नागरिकता से जुड़े संवैधानिक संरक्षण को और मजबूत करती है।
क्या था 14वें संशोधन का उद्देश्य?
अमेरिकी गृहयुद्ध समाप्त होने के बाद वर्ष 1868 में संविधान का 14वां संशोधन लागू किया गया था।
इस संशोधन का मूल उद्देश्य गुलामी का सामना कर चुके अश्वेत समुदाय को पूर्ण अमेरिकी नागरिकता प्रदान करना था। समय के साथ इसकी व्याख्या इस रूप में की गई कि अमेरिका में जन्म लेने वाले सभी बच्चों पर यह प्रावधान लागू होगा, चाहे उनके माता-पिता की नागरिकता या इमिग्रेशन स्थिति कुछ भी हो।
ट्रम्प क्यों करना चाहते थे बदलाव?
डोनाल्ड ट्रम्प और उनके समर्थकों का तर्क रहा है कि जन्मजात नागरिकता के वर्तमान नियम का दुरुपयोग किया जाता है। उनका दावा है कि कुछ विदेशी नागरिक अमेरिका में बच्चे के जन्म के उद्देश्य से आते हैं, ताकि बच्चे को अमेरिकी नागरिकता मिल सके।
इसी प्रवृत्ति को आलोचक अक्सर “बर्थ टूरिज्म” के नाम से संबोधित करते हैं।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि संवैधानिक अधिकारों को केवल नीति परिवर्तन के आधार पर समाप्त नहीं किया जा सकता।
भारतीय परिवारों के लिए क्यों अहम है यह फैसला?
यह फैसला विशेष रूप से उन भारतीय परिवारों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जो अमेरिका में H-1B या अन्य वैध अस्थायी वीजा पर रह रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद ऐसे परिवारों के अमेरिका में जन्म लेने वाले बच्चों को पहले की तरह जन्म के साथ अमेरिकी नागरिकता मिलती रहेगी।
इस फैसले से हजारों भारतीय पेशेवरों और उनके परिवारों को कानूनी स्पष्टता मिली है।
क्या बच्चे की नागरिकता से माता-पिता को भी मिलेगा फायदा?
इस फैसले के बावजूद एक महत्वपूर्ण बात नहीं बदली है।
यदि किसी बच्चे को जन्म के आधार पर अमेरिकी नागरिकता मिलती है, तो उसके माता-पिता को स्वतः अमेरिकी नागरिकता या ग्रीन कार्ड नहीं मिल जाता।
उन्हें अपने वीजा और इमिग्रेशन स्टेटस के अनुसार अलग कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होगा।
मौजूदा अमेरिकी कानून के अनुसार अमेरिकी नागरिक बच्चा अपने माता-पिता के लिए स्थायी निवास (ग्रीन कार्ड) की सिफारिश तभी कर सकता है, जब उसकी आयु 21 वर्ष हो जाए।
भारतीय मूल के बच्चों के लिए OCI का विकल्प
भारत दोहरी नागरिकता (Dual Citizenship) की अनुमति नहीं देता।
यदि भारतीय माता-पिता के यहां अमेरिका में बच्चे का जन्म होता है, तो बच्चे को अमेरिकी नागरिकता मिलती है। ऐसे मामलों में माता-पिता उसके लिए ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया (OCI) कार्ड बनवा सकते हैं।
OCI कार्ड धारकों को भारत आने-जाने के लिए आजीवन वीजा सुविधा सहित कई अन्य सुविधाएं प्राप्त होती हैं।
ट्रम्प के कई करीबी भी इसी व्यवस्था से बने अमेरिकी नागरिक
इस मामले की एक दिलचस्प बात यह भी है कि डोनाल्ड ट्रम्प के कई प्रमुख सहयोगियों को भी जन्मजात नागरिकता के इसी संवैधानिक प्रावधान का लाभ मिला था।
इनमें विदेश मंत्री मार्को रुबियो, काश पटेल तथा उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की पत्नी उषा वेंस जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं, जिनका जन्म अमेरिका में हुआ और उन्हें जन्म के साथ अमेरिकी नागरिकता प्राप्त हुई।
फैसले का व्यापक प्रभाव
विशेषज्ञों के अनुसार यदि ट्रम्प का आदेश लागू हो जाता, तो हर वर्ष अमेरिका में जन्म लेने वाले लगभग 2.5 लाख बच्चों की कानूनी स्थिति प्रभावित हो सकती थी।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने फिलहाल उस संवैधानिक व्यवस्था को बरकरार रखा है, जिसके तहत अमेरिका में जन्म लेने वाला प्रत्येक बच्चा जन्म से अमेरिकी नागरिक माना जाता है।

