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‘ऑपरेशन सवेरा’ की बड़ी कामयाबी: Muzaffarnagar में 25 लाख की प्रतिबंधित दवाओं का जखीरा बरामद, अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश, 6 गिरफ्तार

Muzaffarnagar। जनपद में मादक पदार्थों और प्रतिबंधित दवाओं की अवैध तस्करी पर प्रभावी अंकुश लगाने के उद्देश्य से चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन सवेरा – नशे के अंधकार से जीवन के उजाले की ओर’ अभियान के तहत पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। थाना नई मंडी पुलिस और स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) की संयुक्त कार्रवाई में नशीले कैप्सूलों की तस्करी करने वाले एक अंतरराज्यीय नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए छह आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से प्रतिबंधित दवाओं का बड़ा जखीरा बरामद किया है, जिसकी अनुमानित बाजार कीमत करीब 20 से 25 लाख रुपये बताई जा रही है।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजय कुमार वर्मा के निर्देशन, पुलिस अधीक्षक नगर अमृत जैन तथा क्षेत्राधिकारी नई मंडी राजू कुमार साव के पर्यवेक्षण में की गई। मामले की जांच अब केवल बरामदगी तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे नेटवर्क की परतें खोलने का प्रयास किया जा रहा है।


संदिग्ध गतिविधि की सूचना पर पुलिस ने की घेराबंदी, कूकड़ी ग्राउंड से दबोचे गए आरोपी

पुलिस के अनुसार थाना नई मंडी की टीम बिलासपुर चौराहे पर संदिग्ध व्यक्तियों और वाहनों की सघन चेकिंग कर रही थी। इसी दौरान मुखबिर से सूचना मिली कि कुछ लोग कूकड़ी ग्राउंड के पास इकट्ठा होकर आपस में किसी सामान के बंटवारे की बातचीत कर रहे हैं।

सूचना को गंभीरता से लेते हुए पुलिस टीम तत्काल मौके पर पहुंची और संदिग्ध व्यक्तियों को घेर लिया। पूछताछ के दौरान उनके पास रखे कार्टनों के बारे में जानकारी मांगी गई। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि कार्टनों में दवाइयां हैं। संदेह गहराने पर पुलिस ने क्षेत्राधिकारी नई मंडी और ड्रग इंस्पेक्टर को भी मौके पर बुलाया।

अधिकारियों की मौजूदगी में जब कार्टनों की जांच की गई तो उनमें भारी मात्रा में प्रतिबंधित नशीले कैप्सूल पाए गए।


चार कार्टनों से मिले 76,800 प्रतिबंधित नशीले कैप्सूल

पुलिस ने चार कार्टनों की तलाशी के दौरान कुल 76,800 नशीले कैप्सूल बरामद किए। पुलिस के अनुसार बरामद कैप्सूल स्पासमोर और स्पासमेड कंपनी के थे, जिनमें एनआरएक्स एसीटामिनोफिन, ट्रामाडोल हाइड्रोक्लोराइड एवं डाईसाइक्लोमाइन हाइड्रोक्लोराइड युक्त दवाएं शामिल थीं।

प्रारंभिक जांच में इन दवाओं को प्रतिबंधित श्रेणी की नियंत्रित औषधियों के रूप में पाया गया, जिनका वितरण और उपयोग निर्धारित कानूनी प्रक्रिया तथा चिकित्सकीय पर्चे के अनुसार ही किया जा सकता है।

पुलिस ने मौके से ही छह आरोपियों को हिरासत में लेकर आवश्यक कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी।


कैसे काम करता था गिरोह, पूछताछ में सामने आई अहम जानकारी

पुलिस पूछताछ में गिरफ्तार आरोपियों ने बताया कि गिरोह के माध्यम से प्रतिबंधित कैप्सूलों की अवैध खरीद-फरोख्त की जाती थी। आरोपियों के अनुसार इन दवाओं को सामान्य परिस्थितियों में केवल पंजीकृत चिकित्सक के वैध प्रिस्क्रिप्शन पर ही दिया जा सकता है।

पूछताछ के दौरान आरोपियों ने कथित रूप से बताया कि वांछित आरोपी सुमित इन कैप्सूलों की आपूर्ति सचिन गुप्ता को करता था। इसके बाद गिरोह के अन्य सदस्य इन दवाओं को खरीदकर अवैध रूप से अधिक कीमत पर आगे बेचते थे।

पुलिस के अनुसार आरोपियों ने यह भी स्वीकार किया कि प्रतिबंधित दवाओं को अवैध तरीके से खरीदकर ब्लैक मार्केट में दोगुने दामों पर बेचा जाता था। हालांकि इन बयानों की पुष्टि जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी।


इन छह आरोपियों को पुलिस ने किया गिरफ्तार

पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान इस प्रकार की गई है—

  • जावेद पुत्र मोहम्मद इसरायल निवासी ग्राम भिक्की, थाना सिखेड़ा, वर्तमान निवासी ग्राम शेरनगर, मुजफ्फरनगर।
  • नौशाद पुत्र मोहम्मद अहसान निवासी सहावली, थाना नई मंडी।
  • मोहम्मद आजाद पुत्र नासिर अली निवासी लुसाना मोड़, थाना बुढाना।
  • नवीन कुमार पुत्र ओमपाल सिंह निवासी दयानंद नगर, थाना कोतवाली नगर, जनपद शामली।
  • मोहम्मद कासिफ पुत्र मोहम्मद रिजवान निवासी हारून की कोठी के पास, अंबा विहार, थाना खालापार।
  • सचिन गुप्ता पुत्र ब्रह्मपाल निवासी साउथ कृष्णापुरी, थाना खालापार, मुजफ्फरनगर।

पुलिस ने बताया कि इस मामले में सुमित नामक एक आरोपी अभी वांछित है, जिसकी गिरफ्तारी के लिए अलग-अलग टीमें गठित कर दी गई हैं।


ड्रग तस्करी के पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी पुलिस

पुलिस अधिकारियों के अनुसार जांच केवल गिरफ्तार आरोपियों तक सीमित नहीं रहेगी। इस गिरोह के फॉरवर्ड और बैकवर्ड लिंक की भी गहन जांच की जा रही है।

यह पता लगाया जा रहा है कि प्रतिबंधित दवाओं की आपूर्ति कहां से हो रही थी, किन माध्यमों से इन्हें विभिन्न जिलों या राज्यों तक पहुंचाया जा रहा था तथा इस अवैध कारोबार से जुड़े अन्य लोग कौन हैं।

साथ ही गिरफ्तार आरोपियों के विस्तृत आपराधिक इतिहास की भी जांच की जा रही है, ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि वे पहले भी इस प्रकार के अपराधों में शामिल रहे हैं या नहीं।


‘ऑपरेशन सवेरा’ का उद्देश्य— नशे के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई

जनपद में चलाया जा रहा ‘ऑपरेशन सवेरा’ अभियान युवाओं को नशे की गिरफ्त से बचाने और प्रतिबंधित मादक पदार्थों एवं दवाओं की अवैध तस्करी पर रोक लगाने के उद्देश्य से संचालित किया जा रहा है।

पुलिस का कहना है कि इस अभियान के तहत लगातार खुफिया सूचनाएं जुटाई जा रही हैं और ऐसे नेटवर्क पर विशेष निगरानी रखी जा रही है, जो समाज में नशे का कारोबार फैलाने का प्रयास कर रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रामाडोल जैसी नियंत्रित दवाओं का अवैध उपयोग सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है। इसलिए इनके अवैध कारोबार पर प्रभावी नियंत्रण अत्यंत आवश्यक है।


इन पुलिसकर्मियों ने निभाई महत्वपूर्ण भूमिका

इस कार्रवाई में थाना नई मंडी और एसओजी की संयुक्त टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पुलिस टीम में प्रभारी निरीक्षक आनंद देव मिश्र, उपनिरीक्षक ओमप्रकाश सिंह, संदीप कुमार, आकाश कुमार, शुभम चौहान, एसओजी प्रभारी मोहित चौधरी, मुख्य आरक्षी रोहिताश कुमार, कांस्टेबल ललित मोरल, प्रशांत सिरोही, मोहम्मद इस्फाक, सर्विलांस सेल के मुख्य आरक्षी विकास सिरोही, कांस्टेबल अमन कुमार, रवि कुमार, राहुल कश्यप, आरक्षी हीरा सिंह, बोली सिंह, रोहित कुमार, हिमांशु चौधरी, मुनेश कुमार, राजीव अत्री तथा दिनेश बाना सहित अन्य पुलिसकर्मी शामिल रहे।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस प्रकार के अभियानों को भविष्य में भी लगातार जारी रखा जाएगा ताकि प्रतिबंधित दवाओं और मादक पदार्थों की अवैध तस्करी पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।

मुजफ्फरनगर में ‘ऑपरेशन सवेरा’ के तहत की गई यह कार्रवाई प्रतिबंधित दवाओं की अवैध तस्करी के खिलाफ पुलिस की महत्वपूर्ण सफलता मानी जा रही है। पुलिस ने छह आरोपियों को गिरफ्तार कर बड़ी मात्रा में नशीले कैप्सूल बरामद किए हैं, जबकि पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने के लिए विस्तृत जांच जारी है। अधिकारियों के अनुसार वांछित आरोपी की गिरफ्तारी, आपूर्ति श्रृंखला की पहचान और इस अवैध कारोबार से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी गहन जांच की जाएगी। जांच पूरी होने के बाद सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

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