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कार में युवती को बैठाकर पुलिस को चकमा देने का ‘नशे का खेल’ बेनकाब! Muzaffarnagar में 50 किलो गांजे के साथ तीन युवक और महिला गिरफ्तार

Muzaffarnagar नशे के अवैध कारोबार और मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे “ऑपरेशन सवेरा—नशे के अंधकार से जीवन के उजाले की ओर” अभियान के तहत मुजफ्फरनगर पुलिस और एसओजी की संयुक्त टीम ने बड़ी कार्रवाई की है। बामनहेड़ी रेलवे स्टेशन के पास संदिग्ध वाहनों की चेकिंग के दौरान पुलिस ने एक आई-10 कार से करीब 50 किलोग्राम अवैध गांजा बरामद करने का दावा किया है, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 10 लाख रुपये बताई गई है।

इस कार्रवाई में पुलिस ने कार सवार तीन युवकों और एक महिला को मौके से गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, सहायक पुलिस अधीक्षक एवं क्षेत्राधिकारी नगर सिद्धार्थ मिश्रा की मौजूदगी में कार की तलाशी ली गई, जिसमें भारी मात्रा में अवैध मादक पदार्थ बरामद हुआ।

मामले में प्रारंभिक पूछताछ के दौरान कई चौंकाने वाले दावे सामने आए हैं। पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों ने कथित तौर पर बताया कि महिला को कार में इसलिए साथ रखा जाता था, ताकि रास्ते में पुलिस और अन्य जांच एजेंसियों को वाहन पर आसानी से शक न हो।

इतना ही नहीं, पुलिस पूछताछ में कथित रूप से यह बात भी सामने आई है कि गांजे की खेप छत्तीसगढ़ से गाजियाबाद तक पहुंचाने के बदले कार सवार लोगों को प्रत्येक चक्कर के हिसाब से भुगतान किया जाता था। पुलिस अब इस कथित नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने के साथ उन दो आरोपियों की तलाश में जुटी है, जिनके नाम गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में सामने आए हैं।


‘ऑपरेशन सवेरा’ में पुलिस को मिली बड़ी कामयाबी

मुजफ्फरनगर जनपद में अवैध मादक पदार्थों की खरीद-बिक्री और तस्करी के खिलाफ पुलिस द्वारा लगातार अभियान चलाया जा रहा है।

इसी क्रम में “ऑपरेशन सवेरा—नशे के अंधकार से जीवन के उजाले की ओर” अभियान के तहत थाना सिविल लाइन पुलिस और एसओजी की टीम संदिग्ध लोगों और वाहनों पर नजर रख रही थी।

पुलिस के अनुसार मुखबिर से सूचना मिली थी कि अवैध मादक पदार्थ की खेप लेकर कुछ लोग क्षेत्र से गुजर सकते हैं।

सूचना को गंभीरता से लेते हुए थाना सिविल लाइन पुलिस और एसओजी की संयुक्त टीम ने बामनहेड़ी रेलवे स्टेशन के पास चेकिंग अभियान शुरू किया।

संदिग्ध व्यक्तियों और वाहनों की सघन तलाशी ली जा रही थी। इसी दौरान पुलिस टीम की नजर एक आई-10 कार पर पड़ी।

पुलिस ने कार को जांच के लिए रुकवाया।

इसके बाद जो कुछ सामने आया, उसने पुलिस टीम को भी सतर्क कर दिया।


आई-10 कार रोकी तो सामने आया 50 किलो गांजे का मामला

पुलिस के मुताबिक, संदिग्ध आई-10 कार को रोकने के बाद उसकी तलाशी ली गई।

सहायक पुलिस अधीक्षक एवं क्षेत्राधिकारी नगर सिद्धार्थ मिश्रा की उपस्थिति में वाहन को चेक किया गया।

तलाशी के दौरान कार से करीब 50 किलोग्राम अवैध गांजा बरामद होने का दावा किया गया।

बरामद मादक पदार्थ की अनुमानित कीमत करीब 10 लाख रुपये बताई गई है।

पुलिस ने गांजे के साथ तस्करी में इस्तेमाल की जा रही आई-10 कार को भी कब्जे में ले लिया।

कार में सवार तीन युवकों और एक महिला को मौके से गिरफ्तार कर लिया गया।


मध्य प्रदेश, बिहार और छत्तीसगढ़ से जुड़े मिले गिरफ्तार आरोपी

पुलिस के अनुसार गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान अलग-अलग राज्यों के निवासियों के रूप में हुई है।

गिरफ्तार आरोपियों में मिथलेश पुत्र कान्ते सिंह निवासी चाकघाट, थाना चाकघाट, जिला रीवा, मध्य प्रदेश शामिल है।

दूसरे आरोपी की पहचान रोहित उर्फ मुन्ना पुत्र सीताराम निवासी पकड़ी बाजार, थाना पकड़ी बाजार, जिला शिवान, बिहार के रूप में बताई गई है।

तीसरे गिरफ्तार आरोपी का नाम संदीप पुत्र हरिराम निवासी रिविल गंज, थाना रिविल गंज, जिला छपरा, बिहार बताया गया है।

वहीं गिरफ्तार महिला की पहचान ममता यादव निवासी ग्राम जुटमिल, थाना जुटमिल, जिला रायगढ़, छत्तीसगढ़ के रूप में हुई है।

अलग-अलग राज्यों से जुड़े आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस अब इस पूरे कथित नेटवर्क के अंतरराज्यीय संपर्कों की जांच कर रही है।


महिला को साथ रखने के पीछे का ‘प्लान’ सुनकर पुलिस भी हुई सतर्क

इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाला दावा गिरफ्तार महिला को कार में साथ लेकर चलने के कथित उद्देश्य को लेकर सामने आया है।

पुलिस के अनुसार प्रारंभिक पूछताछ में ममता यादव से कार में साथ आने का कारण पूछा गया।

पुलिस का दावा है कि पूछताछ के दौरान महिला ने बताया कि वाहन में महिला के मौजूद होने के कारण पुलिस या अन्य अधिकारी आसानी से शक नहीं करते।

इसी कथित रणनीति के तहत उसे कार में साथ लाया जाता था।

पुलिस के मुताबिक महिला को प्रत्येक चक्कर के लिए छह हजार रुपये दिए जाने की बात भी पूछताछ में सामने आई है।

हालांकि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में सामने आए इन दावों की आगे जांच की जा रही है और पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर विस्तृत विवेचना के बाद स्पष्ट होगी।


पुलिस को चकमा देने के लिए महिला बनी थी कथित ‘सुरक्षा कवच’?

यदि पुलिस पूछताछ में सामने आए दावों की जांच में पुष्टि होती है, तो यह मामला नशा तस्करी के बदलते तौर-तरीकों की ओर भी इशारा करता है।

पुलिस का दावा है कि महिला को कार में साथ रखने का मकसद वाहन को सामान्य पारिवारिक यात्रा जैसा दिखाना था।

आरोपियों को कथित रूप से उम्मीद रहती थी कि कार में महिला को देखकर चेकिंग के दौरान वाहन पर संदेह कम होगा।

लेकिन बामनहेड़ी रेलवे स्टेशन के पास पुलिस और एसओजी की चेकिंग में यह कथित योजना सफल नहीं हो सकी।

पुलिस ने कार को रुकवाकर तलाशी ली और 50 किलोग्राम अवैध गांजा बरामद करने का दावा किया।


छत्तीसगढ़ से गाजियाबाद तक जुड़ रही नशे की खेप की कड़ियां

प्रारंभिक पूछताछ में पुलिस को गांजा तस्करी के कथित नेटवर्क से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी मिलने का दावा किया गया है।

गिरफ्तार आरोपियों ने पुलिस को कथित तौर पर बताया कि बरामद गांजा वीरेश कुमार महतो उर्फ राजा निवासी झंडापुर, थाना साहिबाबाद, कमिश्नरेट गाजियाबाद का है।

पूछताछ में इस कथित नेटवर्क के दूसरे साझेदार के रूप में महेश यादव उर्फ डीपी यादव निवासी लोनी, कमिश्नरेट गाजियाबाद का नाम सामने आया है।

पुलिस का दावा है कि दोनों मिलकर अवैध गांजे का कारोबार करते हैं।

अब पुलिस इस पूरे कथित नेटवर्क की तह तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।


छत्तीसगढ़ से खरीदा जाता था गांजा, कार से पहुंचती थी खेप!

गिरफ्तार आरोपियों से हुई प्रारंभिक पूछताछ में कथित तौर पर तस्करी के तरीके की जानकारी भी सामने आई है।

पुलिस के मुताबिक आरोपियों ने बताया कि महेश यादव रुपये लेकर छत्तीसगढ़ जाता था और वहां से गांजा खरीदने के बाद उसे कार में रखवा देता था।

इसके बाद गिरफ्तार लोगों को कथित रूप से कार गाजियाबाद तक पहुंचाने की जिम्मेदारी दी जाती थी।

गांजे से भरी कार गाजियाबाद पहुंचाने के बाद प्रत्येक व्यक्ति को भुगतान किए जाने की बात सामने आई है।

पुलिस इस कथित तस्करी मार्ग, गांजा खरीदने वाले स्रोत और गाजियाबाद में खेप प्राप्त करने वाले लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।


हर चक्कर के 10-10 हजार रुपये मिलने का दावा

पुलिस पूछताछ में गिरफ्तार आरोपियों ने कथित तौर पर बताया कि कार को गाजियाबाद पहुंचाने के बदले प्रत्येक व्यक्ति को हर चक्कर के 10-10 हजार रुपये दिए जाते थे।

पुलिस के मुताबिक यह भुगतान वीरेश कुमार महतो उर्फ राजा द्वारा किए जाने की बात सामने आई है।

वहीं कार में साथ चलने वाली महिला को प्रत्येक चक्कर के छह हजार रुपये दिए जाने का दावा किया गया है।

इस कथित भुगतान व्यवस्था से पुलिस को आशंका है कि नशा तस्करी का यह नेटवर्क संगठित तरीके से संचालित किया जा रहा था।

अब पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आरोपी इससे पहले कितनी बार गांजे की खेप एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचा चुके हैं।


तस्करी में इस्तेमाल आई-10 कार भी कथित सरगना की बताई गई

पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में यह भी सामने आया है कि गांजा ले जाने में इस्तेमाल की गई आई-10 कार वीरेश कुमार महतो उर्फ राजा की है।

इस जानकारी के बाद पुलिस वाहन से जुड़े दस्तावेजों और उसके इस्तेमाल की जानकारी भी जुटा रही है।

जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी होगा कि कार इससे पहले कितनी बार लंबी दूरी की यात्राओं में इस्तेमाल की गई और क्या पूर्व में भी इसके जरिए मादक पदार्थों की खेप पहुंचाई गई थी।

वाहन के आवागमन और कथित तस्करी नेटवर्क से जुड़े संपर्कों की जानकारी पूरे मामले की जांच में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।


चार गिरफ्तार, अब दो कथित मुख्य आरोपियों की तलाश

पुलिस ने मौके से तीन युवकों और एक महिला को गिरफ्तार कर लिया है।

वहीं पूछताछ में सामने आए वीरेश कुमार महतो उर्फ राजा और महेश यादव उर्फ डीपी यादव की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीम गठित की गई है।

पुलिस दोनों वांछित आरोपियों की तलाश कर रही है।

उनकी गिरफ्तारी के बाद पूरे कथित नेटवर्क के संचालन, मादक पदार्थ की खरीद, परिवहन और बिक्री से जुड़ी अन्य जानकारियां सामने आने की उम्मीद है।


गिरोह में और कितने लोग? पुलिस खंगाल रही गिरफ्तार आरोपियों के लिंक

थाना सिविल लाइन पुलिस गिरफ्तार आरोपियों के संपर्कों की भी जांच कर रही है।

पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि गिरफ्तार लोगों का संबंध अन्य मादक पदार्थ तस्करों से है या नहीं।

इसके अलावा आरोपियों के विस्तृत आपराधिक इतिहास की जानकारी भी जुटाई जा रही है।

अलग-अलग राज्यों से आरोपियों के जुड़े होने के कारण पुलिस इस मामले को व्यापक नेटवर्क की संभावना के नजरिए से भी देख रही है।

हालांकि जांच पूरी होने से पहले किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।


मध्य प्रदेश से बिहार और छत्तीसगढ़ तक फैली जांच की दिशा

गिरफ्तार आरोपियों के पते मध्य प्रदेश, बिहार और छत्तीसगढ़ से जुड़े होने के कारण जांच का दायरा मुजफ्फरनगर और गाजियाबाद तक सीमित नहीं रह सकता।

पुलिस को अब यह पता लगाना होगा कि सभी आरोपी एक-दूसरे के संपर्क में कैसे आए।

उन्हें कथित तस्करी नेटवर्क से किसने जोड़ा?

गांजा कहां से खरीदा जाता था?

छत्तीसगढ़ में मादक पदार्थ उपलब्ध कराने वाले लोग कौन हैं?

गाजियाबाद पहुंचने के बाद गांजा किसे दिया जाता था?

और वहां से इसकी आपूर्ति किन क्षेत्रों में की जाती थी?

इन तमाम सवालों के जवाब आगे की जांच में सामने आ सकते हैं।


बामनहेड़ी रेलवे स्टेशन के पास बिछाया गया चेकिंग का जाल

पुलिस के अनुसार मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर बामनहेड़ी रेलवे स्टेशन के पास संदिग्ध लोगों और वाहनों की सघन चेकिंग की जा रही थी।

पुलिस और एसओजी की संयुक्त टीम ने क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी थी।

इसी दौरान संदिग्ध आई-10 कार दिखाई दी।

कार को रोककर सहायक पुलिस अधीक्षक एवं क्षेत्राधिकारी नगर सिद्धार्थ मिश्रा की मौजूदगी में तलाशी ली गई।

तलाशी में 50 किलोग्राम गांजा बरामद होने का दावा किया गया।

इसके बाद चारों लोगों को मौके से गिरफ्तार कर लिया गया।


‘ऑपरेशन सवेरा’ के तहत नशे के नेटवर्क पर पुलिस का प्रहार

मुजफ्फरनगर पुलिस द्वारा नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ “ऑपरेशन सवेरा” अभियान चलाया जा रहा है।

अभियान का उद्देश्य नशे के अवैध कारोबार में शामिल लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई करना और समाज को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना है।

बामनहेड़ी रेलवे स्टेशन के पास की गई कार्रवाई को इसी अभियान की महत्वपूर्ण सफलता के रूप में देखा जा रहा है।

50 किलोग्राम गांजा बरामद होने और चार आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस अब कथित नेटवर्क के अन्य सदस्यों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।


10 लाख का गांजा, एक कार और चार गिरफ्तार—लेकिन जांच अभी बाकी

पुलिस की कार्रवाई में करीब 10 लाख रुपये कीमत का 50 किलोग्राम गांजा बरामद होने का दावा किया गया है।

इसके साथ ही तस्करी में इस्तेमाल आई-10 कार को भी कब्जे में लिया गया है।

चार लोगों की गिरफ्तारी के बावजूद जांच अभी शुरुआती चरण में है।

पूरे मामले में दो अन्य लोगों के नाम सामने आए हैं, जिनकी गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं।

पुलिस गिरफ्तार आरोपियों के आपराधिक इतिहास, संपर्कों और कथित नेटवर्क की अन्य कड़ियों की जांच कर रही है।


महिला की मौजूदगी को ‘ढाल’ बनाने का कथित तरीका बना चर्चा का विषय

इस पूरे मामले में महिला को वाहन में साथ रखने का कथित तरीका सबसे अधिक चर्चा में है।

पुलिस का दावा है कि महिला को इसलिए साथ रखा जाता था, ताकि वाहन पर आसानी से संदेह न हो।

यदि जांच में इस दावे की पुष्टि होती है तो यह नशा तस्करों द्वारा पुलिस चेकिंग से बचने के लिए अपनाए जा रहे नए तरीकों का उदाहरण हो सकता है।

मादक पदार्थों की तस्करी में शामिल नेटवर्क अक्सर जांच एजेंसियों से बचने के लिए अपने तरीकों में बदलाव करते रहते हैं।

यही कारण है कि संदिग्ध वाहनों की नियमित और प्रभावी चेकिंग महत्वपूर्ण मानी जाती है।


नशे की कमाई के लिए युवाओं को बनाया जा रहा कथित ‘कैरियर’?

पुलिस पूछताछ में प्रत्येक चक्कर के बदले भुगतान की बात सामने आने के बाद एक और गंभीर सवाल खड़ा हो गया है।

क्या संगठित नशा तस्कर रुपये का लालच देकर लोगों को मादक पदार्थ पहुंचाने के लिए ‘कैरियर’ के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं?

गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में सामने आए कथित भुगतान के तरीके से ऐसी आशंका को बल मिलता है।

पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि गिरफ्तार आरोपी केवल खेप पहुंचाने का काम करते थे या कथित नेटवर्क में उनकी भूमिका इससे अधिक थी।


नशा तस्करी का कथित रूट भी जांच के घेरे में

छत्तीसगढ़ से गांजा खरीदकर गाजियाबाद पहुंचाने के कथित दावे के बाद पूरे परिवहन मार्ग की जांच भी महत्वपूर्ण हो गई है।

इतनी लंबी दूरी तय करने के दौरान वाहन किन-किन स्थानों से गुजरता था?

रास्ते में चालक और अन्य लोग कहां रुकते थे?

क्या अलग-अलग चक्कर में अलग-अलग मार्गों का इस्तेमाल किया जाता था?

क्या वाहन पर किसी प्रकार के विशेष पहचान चिह्न या फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल होता था?

इन पहलुओं की जानकारी विस्तृत जांच के बाद ही सामने आ सकती है।


पुलिस के सामने अब नेटवर्क की जड़ तक पहुंचने की चुनौती

50 किलोग्राम गांजा बरामद कर चार लोगों की गिरफ्तारी पुलिस के लिए बड़ी कार्रवाई है, लेकिन कथित नेटवर्क की पूरी जड़ तक पहुंचना अब अगली चुनौती होगी।

पुलिस को उन लोगों की पहचान करनी होगी, जो गांजा उपलब्ध कराते थे।

उन लोगों तक भी पहुंचना होगा, जो गाजियाबाद में खेप प्राप्त करते थे।

इसके अलावा आगे इसकी आपूर्ति किन लोगों और क्षेत्रों में होती थी, यह भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।

यदि पुलिस पूरे कथित सप्लाई नेटवर्क तक पहुंचती है तो नशे के कारोबार से जुड़े अन्य लोगों की गिरफ्तारी भी हो सकती है।


सिविल लाइन पुलिस और SOG की संयुक्त कार्रवाई

इस बड़ी कार्रवाई को थाना सिविल लाइन पुलिस और एसओजी की संयुक्त टीम ने अंजाम दिया।

थाना सिविल लाइन की टीम में उपनिरीक्षक प्रदीप कुमार, उपनिरीक्षक खुशीलाल, कांस्टेबल मनीष अत्री, कांस्टेबल योगेंद्र तथा महिला कांस्टेबल रेशु और स्वाति शामिल रहीं।

वहीं एसओजी टीम की ओर से एसओजी प्रभारी मोहित सिंह, उपनिरीक्षक भूपेंद्र सिंह, हेड कांस्टेबल पिंटू और कांस्टेबल ललित ने कार्रवाई में भाग लिया।

पुलिस टीम की संयुक्त कार्रवाई के बाद अब पूरे मामले की जांच आगे बढ़ाई जा रही है।


गिरफ्तार आरोपियों का खंगाला जा रहा आपराधिक इतिहास

थाना सिविल लाइन पुलिस गिरफ्तार आरोपियों के विस्तृत आपराधिक इतिहास के बारे में जानकारी जुटा रही है।

पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि क्या आरोपी इससे पहले भी मादक पदार्थों की तस्करी या किसी अन्य आपराधिक गतिविधि में शामिल रहे हैं।

इसके लिए संबंधित राज्यों और जिलों की पुलिस से भी जानकारी जुटाई जा सकती है।

आपराधिक इतिहास और पुराने मामलों की जानकारी मिलने के बाद आरोपियों की कथित भूमिका को और स्पष्ट रूप से समझने में मदद मिलेगी।


वीरेश उर्फ राजा और महेश यादव की गिरफ्तारी के लिए टीम गठित

पुलिस पूछताछ में नाम सामने आने के बाद वीरेश कुमार महतो उर्फ राजा और महेश यादव उर्फ डीपी यादव की गिरफ्तारी के लिए विशेष टीम गठित की गई है।

पुलिस दोनों आरोपियों की तलाश कर रही है।

उनकी गिरफ्तारी पूरे मामले की जांच के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार लोगों ने इन्हीं दोनों पर कथित गांजा कारोबार संचालित करने का आरोप लगाया है।

फिलहाल इन आरोपों की स्वतंत्र जांच की जा रही है।


50 किलो गांजे की बरामदगी ने खोली अंतरराज्यीय नेटवर्क की जांच

बामनहेड़ी रेलवे स्टेशन के पास हुई कार्रवाई अब केवल गांजा बरामदगी के एक मामले तक सीमित नहीं रह गई है।

अलग-अलग राज्यों के चार लोगों की गिरफ्तारी, छत्तीसगढ़ से गांजा खरीदने का कथित दावा और गाजियाबाद तक खेप पहुंचाने की बात ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है।

पुलिस के सामने अब कथित सप्लाई चेन के प्रत्येक हिस्से को जोड़ने की चुनौती है।

जांच में मोबाइल संपर्क, यात्रा संबंधी जानकारी, वाहन का रिकॉर्ड और आरोपियों के आपसी संबंध महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।


‘ऑपरेशन सवेरा’ में बड़ी कार्रवाई, लेकिन असली नेटवर्क तक पहुंचना बाकी

मुजफ्फरनगर पुलिस और एसओजी ने 50 किलोग्राम गांजा बरामद कर तीन युवकों और एक महिला को गिरफ्तार किया है।

लेकिन पुलिस के लिए असली परीक्षा अब शुरू हुई है।

पूछताछ में सामने आए दो कथित मुख्य आरोपियों तक पहुंचना, गांजा खरीदने के स्रोत का पता लगाना और गाजियाबाद के बाद होने वाली कथित सप्लाई की जानकारी जुटाना जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।

फिलहाल पुलिस पूरे मामले की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हुई है।

“ऑपरेशन सवेरा” के तहत मुजफ्फरनगर पुलिस और एसओजी की संयुक्त टीम द्वारा बामनहेड़ी रेलवे स्टेशन के पास की गई कार्रवाई में 50 किलोग्राम अवैध गांजा और आई-10 कार बरामद करने का दावा किया गया है। मामले में मध्य प्रदेश, बिहार और छत्तीसगढ़ से जुड़े तीन युवकों और एक महिला को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस पूछताछ में महिला को वाहन में कथित तौर पर इसलिए साथ रखने की बात सामने आई है, ताकि चेकिंग के दौरान कार पर आसानी से शक न हो। दो अन्य आरोपियों की तलाश में टीम गठित की गई है, जबकि गिरफ्तार लोगों के आपराधिक इतिहास और पूरे कथित अंतरराज्यीय नेटवर्क की कड़ियों की जांच जारी है।

 

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