1966 में बना पंचायत सचिवालय अब जर्जर हाल में! Muzaffarnagar CDO के निरीक्षण में खुली तस्वीर, ध्वस्तीकरण के बाद बनेगा नया भवन
News-Desk
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निरीक्षण के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि पंचायत सचिवालय की मौजूदा स्थिति के कारण ग्राम पंचायत सचिव और ग्राम प्रधान द्वारा यहां से नियमित रूप से कार्य संपादित नहीं किया जा रहा है। ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर बेहतर, सुरक्षित और व्यवस्थित पंचायत सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मुख्य विकास अधिकारी ने पुराने भवन का नियमानुसार तकनीकी मूल्यांकन कराने, ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाने और नए पंचायत सचिवालय के निर्माण का प्रस्ताव तत्काल तैयार कर शासन को भेजने के निर्देश दिए हैं।
मामले को लेकर मुख्य विकास अधिकारी ने मौके से ही सक्रियता दिखाते हुए लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता से दूरभाष पर वार्ता की और संबंधित अभियंता को तत्काल मौके पर भेजकर भवन का तकनीकी निरीक्षण एवं आवश्यक परीक्षण कराने के निर्देश दिए।
करीब 60 साल पुराने पंचायत सचिवालय की हालत देखकर प्रशासन गंभीर
विकास खंड शाहपुर के अंतर्गत ग्राम पंचायत काकड़ा में स्थित पंचायत सचिवालय भवन का निर्माण वर्ष 1966 में हुआ था। करीब छह दशक पुराने इस भवन की हालत समय के साथ लगातार खराब होती चली गई।
मुख्य विकास अधिकारी कमलकिशोर कंडारकर द्वारा किए गए स्थलीय निरीक्षण में भवन अत्यंत जर्जर और जीर्ण-शीर्ण अवस्था में पाया गया।
भवन की मौजूदा स्थिति को देखते हुए इसका नियमित उपयोग नहीं किया जा रहा है। ऐसे में पंचायत स्तर पर होने वाले प्रशासनिक और विकास संबंधी कार्यों के संचालन पर भी असर पड़ने की स्थिति बनी हुई है।
निरीक्षण के दौरान मुख्य विकास अधिकारी ने भवन की स्थिति को गंभीरता से लिया और संबंधित अधिकारियों को नियमानुसार तत्काल कार्रवाई आगे बढ़ाने के निर्देश दिए।
पंचायत सचिव और ग्राम प्रधान भी नहीं कर पा रहे नियमित काम
पंचायत सचिवालय किसी भी ग्राम पंचायत की प्रशासनिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण केंद्र होता है। ग्राम पंचायत स्तर की अनेक सेवाएं, विकास योजनाओं से जुड़े कार्य और नागरिक सुविधाओं से संबंधित गतिविधियां पंचायत सचिवालय से संचालित की जाती हैं।
लेकिन काकड़ा पंचायत सचिवालय की जर्जर हालत के कारण ग्राम पंचायत सचिव और ग्राम प्रधान भी भवन से नियमित रूप से काम नहीं कर पा रहे हैं।
मुख्य विकास अधिकारी के निरीक्षण के दौरान यह स्थिति सामने आने के बाद संबंधित विभागों को सक्रिय किया गया।
अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि भवन की तकनीकी स्थिति का नियमानुसार मूल्यांकन कराया जाए और आगे की प्रक्रिया को अनावश्यक रूप से लंबित न रखा जाए।
जर्जर भवन का पहले होगा तकनीकी मूल्यांकन
मुख्य विकास अधिकारी कमलकिशोर कंडारकर ने मौके पर उपस्थित खंड विकास अधिकारी शाहपुर और सहायक खंड विकास अधिकारी पंचायत को जर्जर भवन का नियमानुसार तकनीकी मूल्यांकन कराने के निर्देश दिए।
तकनीकी मूल्यांकन के माध्यम से भवन की वास्तविक स्थिति का आकलन किया जाएगा।
इस प्रक्रिया में यह देखा जाएगा कि भवन की संरचनात्मक स्थिति क्या है और सुरक्षा की दृष्टि से इसके संबंध में आगे क्या कार्रवाई आवश्यक है।
पुराने और जर्जर सरकारी भवनों के मामले में नियमानुसार तकनीकी मूल्यांकन महत्वपूर्ण होता है। सक्षम प्राधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर ही ध्वस्तीकरण और नए निर्माण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाता है।
ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के बाद नए पंचायत सचिवालय का रास्ता होगा साफ
मुख्य विकास अधिकारी ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि तकनीकी मूल्यांकन के बाद निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार जिला पंचायत राज अधिकारी के माध्यम से भवन के ध्वस्तीकरण की कार्रवाई कराई जाए।
इसके साथ ही नवीन पंचायत सचिवालय के निर्माण के लिए प्रस्ताव तत्काल तैयार कर शासन को भेजने के निर्देश भी दिए गए हैं।
प्रशासन का उद्देश्य ग्रामवासियों को सुरक्षित और बेहतर पंचायत सेवाएं उपलब्ध कराना है।
नया पंचायत सचिवालय बनने से ग्रामीणों को विभिन्न सरकारी और पंचायत स्तर की सेवाएं एक व्यवस्थित स्थान पर उपलब्ध हो सकेंगी।
CDO ने मौके से ही PWD के अधिशासी अभियंता को किया फोन
निरीक्षण के दौरान मुख्य विकास अधिकारी ने मामले को केवल निर्देश देने तक सीमित नहीं रखा।
उन्होंने तत्काल लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता से दूरभाष पर वार्ता की।
मुख्य विकास अधिकारी ने संबंधित अभियंता को मौके पर भेजकर भवन का तकनीकी निरीक्षण और आवश्यक परीक्षण शीघ्र कराने के निर्देश दिए।
इस कार्रवाई का उद्देश्य तकनीकी मूल्यांकन की प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा कराना है, ताकि आगे की प्रशासनिक कार्रवाई में देरी न हो।
क्यों महत्वपूर्ण है जर्जर भवन का तकनीकी परीक्षण?
किसी पुराने भवन को ध्वस्त करने या उसके स्थान पर नया निर्माण करने से पहले उसकी तकनीकी स्थिति का मूल्यांकन आवश्यक प्रक्रिया होती है।
विशेषज्ञ अभियंता भवन की संरचनात्मक स्थिति का निरीक्षण करते हैं।
इस दौरान दीवारों, छत, नींव और अन्य महत्वपूर्ण हिस्सों की स्थिति का आकलन किया जाता है।
तकनीकी रिपोर्ट के आधार पर यह तय करने में सहायता मिलती है कि भवन की मरम्मत संभव है या सुरक्षा की दृष्टि से उसका ध्वस्तीकरण आवश्यक है।
काकड़ा पंचायत सचिवालय के मामले में भी यही प्रक्रिया अपनाने के निर्देश दिए गए हैं।
1966 में बना भवन, अब नए पंचायत सचिवालय की तैयारी
वर्ष 1966 में निर्मित पंचायत सचिवालय भवन ने लगभग छह दशक का लंबा समय देखा है।
समय के साथ भवन की स्थिति खराब होती गई और अब वह अत्यंत जर्जर अवस्था में पहुंच चुका है।
प्रशासन ने अब पुराने भवन के स्थान पर नए पंचायत सचिवालय के निर्माण की दिशा में कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
इसके लिए पहले तकनीकी मूल्यांकन, उसके बाद नियमानुसार ध्वस्तीकरण और फिर नवीन भवन निर्माण का प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा।
ग्रामवासियों को बेहतर पंचायत सेवाएं उपलब्ध कराना प्राथमिकता
नवीन पंचायत सचिवालय के निर्माण का उद्देश्य केवल एक नया भवन तैयार करना नहीं है।
पंचायत सचिवालय गांव की स्थानीय प्रशासनिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है।
ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं की जानकारी, प्रमाण पत्रों से संबंधित प्रक्रिया, विकास कार्यों की जानकारी और पंचायत स्तर की विभिन्न सेवाओं के लिए सचिवालय की आवश्यकता होती है।
यदि पंचायत सचिवालय भवन सुरक्षित और व्यवस्थित नहीं होगा तो इसका सीधा प्रभाव स्थानीय सेवाओं पर पड़ सकता है।
इसी को देखते हुए मुख्य विकास अधिकारी ने नए पंचायत सचिवालय का प्रस्ताव तत्काल तैयार करने के निर्देश दिए हैं।
DPRO को समयबद्ध कार्रवाई के सख्त निर्देश
मुख्य विकास अधिकारी कमलकिशोर कंडारकर ने जिला पंचायत राज अधिकारी, मुजफ्फरनगर को भी पूरे मामले में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी औपचारिकताएं समयबद्ध तरीके से पूरी की जाएं।
भवन के तकनीकी मूल्यांकन से लेकर ध्वस्तीकरण और नवीन पंचायत सचिवालय के प्रस्ताव तक की प्रक्रिया नियमानुसार आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्य विकास अधिकारी ने यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि नए पंचायत सचिवालय के निर्माण की प्रक्रिया में किसी प्रकार का अनावश्यक विलंब न हो।
जर्जर सरकारी भवनों को लेकर सतर्कता क्यों जरूरी?
पुराने और जर्जर सरकारी भवन कई बार सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं।
विशेष रूप से लंबे समय से बने भवनों में यदि नियमित मरम्मत और रखरखाव न हो तो उनकी संरचनात्मक मजबूती प्रभावित हो सकती है।
बारिश और अन्य मौसमी परिस्थितियों के दौरान कमजोर भवनों में खतरा और बढ़ सकता है।
ऐसे में भवनों का समय-समय पर तकनीकी परीक्षण कराना और आवश्यकतानुसार मरम्मत अथवा ध्वस्तीकरण की कार्रवाई करना महत्वपूर्ण होता है।
काकड़ा पंचायत सचिवालय की स्थिति सामने आने के बाद प्रशासन ने तकनीकी मूल्यांकन कराने का निर्णय लिया है।
पंचायत सचिवालय ग्रामीण प्रशासन की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी
ग्राम पंचायत स्तर पर पंचायत सचिवालय का विशेष महत्व होता है।
ग्रामीणों को कई आवश्यक सेवाओं के लिए पंचायत सचिव और ग्राम प्रधान से संपर्क करना पड़ता है।
पंचायत सचिवालय के माध्यम से विकास कार्यों की योजना, सरकारी योजनाओं की जानकारी, पंचायत बैठकों और विभिन्न प्रशासनिक गतिविधियों का संचालन किया जाता है।
एक व्यवस्थित पंचायत सचिवालय ग्रामीणों और स्थानीय प्रशासन के बीच संपर्क को मजबूत करता है।
लेकिन यदि भवन ही जर्जर हो और उसका नियमित उपयोग संभव न हो तो पंचायत स्तर की कार्यप्रणाली प्रभावित हो सकती है।
स्थलीय निरीक्षण में सामने आई वास्तविक स्थिति
प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा किए जाने वाले स्थलीय निरीक्षण का उद्देश्य योजनाओं और सरकारी व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति जानना होता है।
कई बार विभागीय दस्तावेजों में दर्ज जानकारी और मौके की वास्तविक स्थिति में अंतर हो सकता है।
मुख्य विकास अधिकारी द्वारा काकड़ा पंचायत सचिवालय का निरीक्षण किए जाने के बाद भवन की जर्जर स्थिति को लेकर तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
निरीक्षण के दौरान मौके पर संबंधित अधिकारियों की मौजूदगी में भवन की स्थिति देखी गई और आगे की प्रक्रिया तय की गई।
नए भवन के प्रस्ताव को शासन भेजने की तैयारी
पुराने पंचायत सचिवालय भवन की तकनीकी जांच और ध्वस्तीकरण की नियमानुसार प्रक्रिया पूरी होने के बाद नए भवन का प्रस्ताव तैयार किया जाएगा।
मुख्य विकास अधिकारी ने प्रस्ताव को तत्काल शासन को भेजने के निर्देश दिए हैं।
शासन स्तर से आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद नवीन पंचायत सचिवालय के निर्माण का रास्ता साफ हो सकेगा।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि पूरी प्रक्रिया में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए।
खंड विकास अधिकारी और सहायक खंड विकास अधिकारी को मिली जिम्मेदारी
निरीक्षण के दौरान मुख्य विकास अधिकारी ने मौके पर उपस्थित खंड विकास अधिकारी शाहपुर और सहायक खंड विकास अधिकारी पंचायत को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।
दोनों अधिकारियों को भवन का सक्षम प्राधिकारी से नियमानुसार तकनीकी मूल्यांकन कराने के लिए कहा गया है।
तकनीकी रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद जिला पंचायत राज अधिकारी के माध्यम से ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
इसके साथ ही नए पंचायत सचिवालय के निर्माण का प्रस्ताव तैयार करने की कार्रवाई भी की जाएगी।
पुराने भवन से नए पंचायत सचिवालय तक, कई चरणों में पूरी होगी प्रक्रिया
काकड़ा पंचायत सचिवालय के पुराने भवन के स्थान पर नया भवन बनने की प्रक्रिया कई चरणों में पूरी होगी।
सबसे पहले भवन का तकनीकी मूल्यांकन कराया जाएगा।
इसके बाद सक्षम स्तर से रिपोर्ट तैयार होगी।
यदि भवन को ध्वस्तीकरण योग्य पाया जाता है तो नियमानुसार पुराने भवन को हटाने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
इसके साथ ही नए पंचायत सचिवालय के निर्माण का प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा जाएगा।
इन सभी प्रक्रियाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।
CDO की सक्रियता से तेज हुई प्रशासनिक कार्रवाई
मुख्य विकास अधिकारी कमलकिशोर कंडारकर द्वारा स्थलीय निरीक्षण किए जाने के बाद काकड़ा पंचायत सचिवालय का मामला प्रशासनिक प्राथमिकता में आ गया है।
निरीक्षण के दौरान तत्काल संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए।
लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता से फोन पर वार्ता कर तकनीकी टीम को मौके पर भेजने को कहा गया।
जिला पंचायत राज अधिकारी को भी सभी औपचारिकताएं समयबद्ध रूप से पूरी करने के निर्देश दिए गए।
इस सक्रियता से अब भवन के तकनीकी परीक्षण और आगे की कार्रवाई में तेजी आने की उम्मीद है।
नए पंचायत सचिवालय से ग्रामीणों को क्या होगा फायदा?
नए पंचायत सचिवालय का निर्माण होने से ग्राम पंचायत स्तर पर प्रशासनिक सेवाओं को बेहतर तरीके से संचालित किया जा सकेगा।
ग्रामवासियों को सुरक्षित भवन में पंचायत संबंधी सेवाएं उपलब्ध हो सकेंगी।
ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव के नियमित रूप से बैठने और कार्य करने के लिए उपयुक्त स्थान उपलब्ध होगा।
सरकारी योजनाओं और विकास कार्यों से जुड़ी जानकारी ग्रामीणों तक अधिक व्यवस्थित तरीके से पहुंचाई जा सकेगी।
पंचायत स्तर की बैठकों और अन्य गतिविधियों के संचालन में भी सुविधा होगी।
समयबद्ध कार्रवाई पर CDO का जोर, देरी हुई तो बढ़ सकती हैं मुश्किलें
मुख्य विकास अधिकारी ने नवीन पंचायत सचिवालय निर्माण की प्रक्रिया में किसी प्रकार का अनावश्यक विलंब न होने देने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं।
इसका कारण यह भी है कि वर्तमान भवन का नियमित उपयोग नहीं हो पा रहा है।
ऐसे में जितनी अधिक देरी होगी, ग्राम पंचायत स्तर पर नियमित कार्यों के संचालन में उतनी ही परेशानी बनी रह सकती है।
इसी को देखते हुए तकनीकी मूल्यांकन, ध्वस्तीकरण और नवीन निर्माण प्रस्ताव की प्रक्रिया को तेजी से पूरा करने पर जोर दिया गया है।
काकड़ा के ग्रामीणों को सुरक्षित पंचायत सेवाएं देने की दिशा में बढ़ा कदम
काकड़ा पंचायत सचिवालय की जर्जर स्थिति सामने आने के बाद प्रशासन ने पुराने भवन के भविष्य और नए निर्माण को लेकर दिशा तय कर दी है।
अब भवन की तकनीकी जांच होगी।
नियमानुसार ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी।
इसके बाद नवीन पंचायत सचिवालय के निर्माण का प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा।
मुख्य विकास अधिकारी ने पूरी प्रक्रिया को समयबद्ध रूप से पूरा करने के निर्देश दिए हैं।
छह दशक पुराने भवन पर अब प्रशासन का बड़ा फैसला
वर्ष 1966 में बने पंचायत सचिवालय भवन की जर्जर स्थिति को देखते हुए प्रशासन अब नए भवन की दिशा में कदम बढ़ा रहा है।
मुख्य विकास अधिकारी कमलकिशोर कंडारकर के निरीक्षण के बाद संबंधित विभागों को सक्रिय कर दिया गया है।
लोक निर्माण विभाग के अभियंता द्वारा तकनीकी परीक्षण के बाद आगे की प्रक्रिया तय होगी।
जिला पंचायत राज अधिकारी को सभी औपचारिकताएं पूरी कर नए पंचायत सचिवालय के निर्माण प्रस्ताव की कार्रवाई आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।

