Uzbekistan में मोदी की कविताओं ने छू लिया दिल, छात्रों ने हिंदी में सुनाई PM की रचनाएं; 11 समझौतों से भारत-उज्बेक रिश्तों को नई ऊंचाई
News-Desk
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प्रधानमंत्री के लिए यह क्षण इसलिए भी खास रहा क्योंकि कविता सुनाने वाले छात्रों की हिंदी मातृभाषा नहीं है। इसके बावजूद उन्होंने कविताओं की भावनाओं और भावार्थ को जिस तरह प्रस्तुत किया, उससे प्रधानमंत्री भावुक हो गए।
मोदी ने छात्रों की सराहना करते हुए कहा कि हिंदी उनकी मातृभाषा नहीं है, फिर भी उन्होंने कविताओं में छिपी भावनाओं को उसी तरह समझकर पेश किया, जैसी भावनाएं उनके दिल में थीं।
इस सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ प्रधानमंत्री ने उज्बेकिस्तान में भारत, महात्मा गांधी और भारतीय सभ्यता को लेकर बढ़ती रुचि का भी उल्लेख किया। उन्होंने तमिल साहित्य की प्रसिद्ध कृति तिरुक्कुरल के उज्बेक भाषा में अनुवाद का सुझाव भी दिया।
लेकिन प्रधानमंत्री की इस यात्रा की अहमियत केवल सांस्कृतिक संबंधों तक सीमित नहीं रही। दोनों देशों ने अपने रिश्तों को ‘स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ से बढ़ाकर ‘कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ के स्तर तक पहुंचाया और 11 समझौतों, एमओयू तथा सहमतियों का आदान-प्रदान किया।
हिंदी मातृभाषा नहीं, फिर भी कविताओं में दिखी भावनाओं की गहराई
ताशकंद के महात्मा गांधी सेंटर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने जब उज्बेक छात्रों ने हिंदी में उनकी कविताएं सुनाईं तो कार्यक्रम का माहौल भावुक हो गया।
छात्रों ने न केवल हिंदी में कविताओं का पाठ किया, बल्कि उनके भाव और संवेदनाओं को भी प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।
मोदी ने इस प्रस्तुति को विशेष बताया। उन्होंने कहा कि छात्रों की मातृभाषा हिंदी नहीं है, इसके बावजूद उन्होंने कविता के भावों को पूरी तरह समझा।
प्रधानमंत्री के लिए यह क्षण भारत की भाषा और साहित्य के बढ़ते वैश्विक प्रभाव का उदाहरण भी था।
उज्बेकिस्तान में ‘नमस्ते’ से लेकर योग तक भारत की बढ़ती पहचान
कार्यक्रम में भारत और भारतीय संस्कृति का अध्ययन करने वाले एक उज्बेक इंडोलॉजिस्ट ने भारत के प्रति स्थानीय लोगों के आकर्षण का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि दुनिया में शायद बहुत कम देश ऐसे होंगे जहां लोगों के बीच भारत को लेकर इतनी आत्मीयता दिखाई देती है।
उनके मुताबिक, उज्बेकिस्तान में लगभग हर नागरिक ‘नमस्ते’ शब्द से परिचित है।
भारतीय कला, नृत्य, संगीत, दर्शन और योग को लेकर भी लोगों की दिलचस्पी लगातार बढ़ रही है।
यह सांस्कृतिक जुड़ाव दोनों देशों के राजनीतिक और आर्थिक संबंधों के साथ-साथ लोगों के बीच रिश्तों को भी मजबूत करने वाला पहलू है।
महात्मा गांधी के नाम पर बने केंद्र में मोदी का संदेश
प्रधानमंत्री ने ताशकंद स्थित महात्मा गांधी सेंटर का दौरा ऐसे समय में किया जब भारत और उज्बेकिस्तान अपने द्विपक्षीय रिश्तों को नई व्यापकता देने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
महात्मा गांधी का नाम दोनों देशों के बीच साझा सांस्कृतिक और वैचारिक संवाद का महत्वपूर्ण प्रतीक है।
गांधी के विचारों, भारतीय दर्शन और भारत की सभ्यतागत परंपराओं को लेकर उज्बेकिस्तान में अकादमिक और सांस्कृतिक रुचि का उल्लेख कार्यक्रम के दौरान भी हुआ।
मोदी ने इस रुचि को दोनों देशों के बीच लोगों के स्तर पर बढ़ते संबंधों का सकारात्मक संकेत बताया।
तिरुक्कुरल का उज्बेक भाषा में अनुवाद कराने का सुझाव
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कार्यक्रम के दौरान तमिल साहित्य की महान कृति तिरुक्कुरल का भी उल्लेख किया।
उन्होंने सुझाव दिया कि तिरुक्कुरल का उज्बेक भाषा में अनुवाद किया जाना चाहिए। प्रधानमंत्री के मुताबिक, इससे उज्बेकिस्तान के लोगों को भारतीय दर्शन और विचार परंपरा को और बेहतर तरीके से समझने का अवसर मिलेगा।
मोदी ने प्राचीन भाषाओं में मौजूद दार्शनिक विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि मानव सभ्यता के शुरुआती दौर से ही इंसान की सोच और चिंतन काफी गहरा रहा है।
यह सुझाव भारतीय भाषाओं और साहित्य को मध्य एशिया के लोगों तक पहुंचाने की दिशा में एक सांस्कृतिक पहल के तौर पर भी देखा जा सकता है।
क्या है तिरुक्कुरल?
तिरुक्कुरल, जिसे सामान्य तौर पर ‘कुरल’ भी कहा जाता है, तमिल साहित्य की सबसे प्रसिद्ध कृतियों में शामिल है।
इसे कवि और दार्शनिक तिरुवल्लुवर से जोड़ा जाता है। इसमें नैतिकता, सदाचार, सामाजिक व्यवहार, जीवन मूल्यों और व्यावहारिक ज्ञान से संबंधित विचार प्रस्तुत किए गए हैं।
इसकी रचना के काल को लेकर विद्वानों के बीच अलग-अलग मत हैं और इसे प्राचीन तमिल साहित्य की महत्वपूर्ण कृतियों में माना जाता है।
तिरुक्कुरल किसी एक धार्मिक समुदाय तक सीमित नहीं है। इसकी शिक्षाओं में मानव आचरण और जीवन के सामान्य मूल्यों पर जोर दिया गया है।
इसी व्यापक मानवीय दृष्टिकोण के कारण प्रधानमंत्री ने इसके उज्बेक अनुवाद को दोनों देशों के सांस्कृतिक संवाद के लिए उपयोगी बताया।
भारत-उज्बेकिस्तान संबंध अब ‘कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 29 से 30 अगस्त तक की दो दिवसीय उज्बेकिस्तान यात्रा का सबसे बड़ा कूटनीतिक परिणाम दोनों देशों के संबंधों को नया दर्जा मिलना रहा।
भारत और उज्बेकिस्तान ने अपने संबंधों को स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप से बढ़ाकर कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप कर दिया।
यह बदलाव दोनों देशों के बीच सहयोग को केवल किसी एक क्षेत्र तक सीमित रखने के बजाय व्यापक रणनीतिक सहयोग की दिशा में ले जाने का संकेत देता है।
भारत और मध्य एशिया के बीच संपर्क, व्यापार, संस्कृति, सुरक्षा और क्षेत्रीय सहयोग के लिहाज से उज्बेकिस्तान का महत्व काफी बढ़ा है।
11 समझौतों और सहमतियों से सहयोग का दायरा बढ़ेगा
प्रधानमंत्री की यात्रा के दौरान भारत और उज्बेकिस्तान के बीच 11 समझौतों, एमओयू और सहमतियों का आदान-प्रदान हुआ।
इन समझौतों का व्यापक उद्देश्य दोनों देशों के बीच विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करना है।
यह कूटनीतिक स्तर पर केवल दस्तावेजों का आदान-प्रदान नहीं है, बल्कि दोनों देशों की साझेदारी को अधिक संस्थागत और व्यापक बनाने की दिशा में एक कदम माना जा रहा है।
भारत की मध्य एशिया नीति में उज्बेकिस्तान की भूमिका पहले से महत्वपूर्ण रही है। अब कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप के नए दर्जे से संबंधों को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।
उज्बेकिस्तान ने PM मोदी को दिया सर्वोच्च नागरिक सम्मान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा के दौरान उन्हें उज्बेकिस्तान का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘ऑली दाराजली डस्टलिक’ भी प्रदान किया गया।
रविवार को उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव ने प्रधानमंत्री मोदी को यह सम्मान प्रदान किया।
यह किसी विदेशी देश की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मिला 36वां सर्वोच्च सम्मान बताया गया।
सम्मान समारोह भारत और उज्बेकिस्तान के बीच बढ़ते राजनीतिक विश्वास का भी प्रतीक रहा।
मोदी के अंतरराष्ट्रीय सम्मानों की सूची में एक और बड़ा नाम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को विभिन्न देशों की ओर से समय-समय पर सर्वोच्च नागरिक और राष्ट्रीय सम्मान प्रदान किए गए हैं।
उज्बेकिस्तान का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भी इसी कड़ी में जुड़ा है।
इस सम्मान को दोनों देशों के बीच संबंधों में प्रधानमंत्री मोदी के योगदान और द्विपक्षीय साझेदारी को मजबूत करने के प्रयासों की मान्यता के रूप में प्रस्तुत किया गया।
ताशकंद से बिश्केक तक मोदी का व्यस्त कूटनीतिक कार्यक्रम
उज्बेकिस्तान की यात्रा के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक पहुंचे, जहां उनका कूटनीतिक कार्यक्रम और भी व्यापक रहा।
उन्होंने ईरान, किर्गिस्तान और अर्मेनिया के नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें कीं।
प्रधानमंत्री ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान से मुलाकात की। पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने के बाद दोनों नेताओं की यह पहली मुलाकात बताई गई है।
इसके अलावा मोदी ने अर्मेनिया के प्रधानमंत्री निकोल पशिन्यान और किर्गिस्तान के राष्ट्रपति सदिर जपरोव से भी मुलाकात की।
इन बैठकों में द्विपक्षीय संबंधों के साथ क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा का महत्व बढ़ गया है।
ईरान के राष्ट्रपति से मुलाकात पर दुनिया की नजर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान की मुलाकात खास कूटनीतिक महत्व रखती है।
पश्चिम एशिया में जारी तनाव और संघर्ष के बीच भारत के ईरान के साथ ऐतिहासिक और रणनीतिक संबंध हैं।
ऐसे समय में दोनों नेताओं की बैठक क्षेत्रीय घटनाक्रम के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण है।
भारत लंबे समय से पश्चिम एशिया में स्थिरता, संवाद और कूटनीतिक समाधान के पक्ष में अपनी स्थिति रखता रहा है।
अर्मेनिया और किर्गिस्तान के साथ भी अहम मुलाकात
प्रधानमंत्री ने अर्मेनिया के प्रधानमंत्री निकोल पशिन्यान और किर्गिस्तान के राष्ट्रपति सदिर जपरोव से भी द्विपक्षीय बातचीत की।
अर्मेनिया भारत के लिए काकेशस क्षेत्र में महत्वपूर्ण साझेदार है, जबकि किर्गिस्तान मध्य एशिया में भारत के लिए अहम देश है।
इन बैठकों से भारत की मध्य एशिया और उससे जुड़े व्यापक क्षेत्र में सक्रिय कूटनीतिक भागीदारी की तस्वीर सामने आती है।
बिश्केक समिट की थीम- शांति, विकास और समृद्धि
बिश्केक में होने वाले शिखर सम्मेलन की थीम ‘शांति, विकास और समृद्धि के लिए मिलकर आगे बढ़ना’ रखी गई है।
इसमें भारत, चीन, रूस, पाकिस्तान, ईरान समेत 10 सदस्य देशों के नेता हिस्सा ले रहे हैं।
एक ही मंच पर क्षेत्र के प्रमुख देशों की मौजूदगी इस बैठक को रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बनाती है।
ऐसे बहुपक्षीय मंचों पर क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक सहयोग, संपर्क, व्यापार और साझा चुनौतियों पर चर्चा का अवसर मिलता है।
वर्ल्ड नोमैड गेम्स के उद्घाटन में भी शामिल होंगे मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बिश्केक में आयोजित होने वाले 6वें वर्ल्ड नोमैड गेम्स के उद्घाटन समारोह में भी हिस्सा लेंगे।
नोमैड गेम्स मध्य एशिया की पारंपरिक खेल संस्कृति और खानाबदोश सभ्यताओं की विरासत को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने वाला आयोजन है।
प्रधानमंत्री की इसमें मौजूदगी भारत और मध्य एशियाई देशों के बीच सांस्कृतिक संबंधों को भी रेखांकित करती है।
भारत के लिए मध्य एशिया केवल रणनीतिक या आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि सदियों पुराने सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संपर्कों के कारण भी विशेष महत्व रखता है।
भारत की मध्य एशिया नीति को मिला सांस्कृतिक रंग
मोदी की ताशकंद यात्रा से लेकर बिश्केक कार्यक्रम तक एक बात स्पष्ट दिखाई देती है—भारत की मध्य एशिया नीति में संस्कृति और सभ्यतागत संपर्क को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया जा रहा है।
ताशकंद में हिंदी कविता, महात्मा गांधी, योग, भारतीय दर्शन और तिरुक्कुरल की चर्चा हुई, जबकि बिश्केक में नोमैड गेम्स जैसे सांस्कृतिक आयोजन में भागीदारी हो रही है।
इससे कूटनीति का वह पहलू सामने आता है जिसमें केवल सरकारों के बीच रिश्ते नहीं, बल्कि लोगों और संस्कृतियों के बीच संबंधों को भी मजबूत करने पर जोर दिया जाता है।
उज्बेक छात्रों की हिंदी ने बदल दिया कार्यक्रम का माहौल
प्रधानमंत्री के उज्बेकिस्तान दौरे का सबसे भावुक दृश्य शायद हिंदी कविता का वह कार्यक्रम रहा जिसमें छात्रों ने मोदी की कविताएं सुनाईं।
यह दृश्य इसलिए खास रहा क्योंकि हिंदी उन छात्रों की मातृभाषा नहीं है।
फिर भी कविता की भावनाओं को समझकर उनका पाठ करना केवल भाषा सीखने की क्षमता नहीं, बल्कि भारतीय साहित्य और विचारों के प्रति उनकी रुचि को भी दर्शाता है।
मोदी ने छात्रों की इसी भावना की सराहना की।
भाषा बनी भारत-उज्बेकिस्तान संबंधों की नई कड़ी
भारत और उज्बेकिस्तान के बीच संबंधों में भाषा और साहित्य की भूमिका लगातार बढ़ सकती है।
हिंदी सीखने वाले छात्र, भारतीय दर्शन का अध्ययन करने वाले इंडोलॉजिस्ट और भारतीय कला-संस्कृति में रुचि रखने वाले लोग दोनों समाजों के बीच स्वाभाविक संपर्क तैयार करते हैं।
यदि तिरुक्कुरल जैसी भारतीय साहित्यिक कृतियों का उज्बेक भाषा में अनुवाद होता है, तो भारतीय ज्ञान परंपरा को और व्यापक पाठक वर्ग तक पहुंचाया जा सकता है।
महात्मा गांधी से तिरुवल्लुवर तक सांस्कृतिक संवाद
ताशकंद में महात्मा गांधी सेंटर और प्रधानमंत्री के संबोधन में तिरुक्कुरल का उल्लेख भारतीय संस्कृति की विविधता को सामने लाता है।
एक तरफ गांधी आधुनिक भारत के नैतिक और राजनीतिक विमर्श के वैश्विक प्रतीक हैं, तो दूसरी तरफ तिरुवल्लुवर और तिरुक्कुरल प्राचीन तमिल ज्ञान परंपरा के महत्वपूर्ण प्रतिनिधि हैं।
इन दोनों संदर्भों को एक ही सांस्कृतिक संवाद में सामने रखना भारत की बहुभाषी और बहुस्तरीय सभ्यतागत विरासत को भी रेखांकित करता है।
कूटनीति से आगे बढ़कर लोगों के रिश्ते
भारत-उज्बेकिस्तान संबंध अब केवल सरकारी बैठकों और समझौतों तक सीमित नहीं दिखाई देते।
भारतीय संगीत, नृत्य, योग, दर्शन और भाषा को लेकर उज्बेकिस्तान में बढ़ती रुचि दोनों देशों के लोगों के बीच रिश्तों को गहरा करने का आधार बन सकती है।
इसी तरह भारत में भी मध्य एशिया की संस्कृति, इतिहास और परंपराओं को लेकर रुचि बढ़ी है।
इस तरह की पारस्परिक समझ किसी भी रणनीतिक साझेदारी को लंबे समय तक टिकाऊ बनाने में मदद करती है।
अब रिश्तों का अगला पड़ाव क्या होगा?
कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप का नया दर्जा मिलने के बाद दोनों देशों के सामने अब इसे वास्तविक सहयोग में बदलने की चुनौती होगी।
11 समझौतों और सहमतियों के बाद उनका प्रभाव जमीन पर दिखाई देना महत्वपूर्ण होगा।
व्यापार, निवेश, शिक्षा, तकनीक, संस्कृति और लोगों के बीच संपर्क जैसे क्षेत्रों में ठोस प्रगति होने पर इस नई साझेदारी का वास्तविक महत्व और स्पष्ट होगा।
ताशकंद से बिश्केक तक मोदी का संदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस यात्रा में एक तरफ उज्बेकिस्तान के साथ रणनीतिक संबंधों को नई ऊंचाई मिली, तो दूसरी तरफ हिंदी, भारतीय संस्कृति और प्राचीन साहित्य के माध्यम से भारत की सॉफ्ट पावर की तस्वीर भी सामने आई।
उज्बेक छात्रों द्वारा हिंदी में मोदी की कविताएं सुनाना एक भावनात्मक क्षण था। तिरुक्कुरल के उज्बेक अनुवाद का सुझाव सांस्कृतिक सहयोग के विस्तार का संकेत रहा।
उज्बेकिस्तान द्वारा प्रधानमंत्री मोदी को अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान से सम्मानित किया जाना राजनीतिक संबंधों में विश्वास का प्रतीक रहा।
इसके बाद बिश्केक में ईरान, अर्मेनिया और किर्गिस्तान के नेताओं के साथ मुलाकातों ने यात्रा के रणनीतिक दायरे को और व्यापक कर दिया।
ताशकंद में कविता से लेकर बिश्केक में शिखर सम्मेलन तक, प्रधानमंत्री के कार्यक्रम ने यह संकेत दिया कि भारत मध्य एशिया के साथ अपने रिश्तों को केवल कूटनीतिक बैठकों तक सीमित नहीं रखना चाहता, बल्कि संस्कृति, भाषा, व्यापार, रणनीतिक सहयोग और लोगों के बीच संपर्क के व्यापक आधार पर आगे बढ़ाना चाहता है।

