Ghazipur मेडिकल कॉलेज का गजब मामला! घुटने की MRI कराई, रिपोर्ट मिली ब्रेन की; भाजपा नेता का इलाज अटका
News-Desk
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BJP Leader, Ghazipur Medical College, ghazipur news, Health News, Manihari News, Medical College Hospital, Medical Error, mri report, Raju Mishra, uttar pradesh newsGhazipur। उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में मेडिकल कॉलेज के 300 बेड अस्पताल से जुड़ा एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने अस्पताल की जांच व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मनिहारी द्वितीय से भाजपा के मंडल महामंत्री राजू मिश्रा का आरोप है कि उन्होंने अपने घुटने की एमआरआई कराई, लेकिन उन्हें जो रिपोर्ट दी गई, वह घुटने की नहीं बल्कि ब्रेन की रिपोर्ट थी।
राजू मिश्रा के मुताबिक घुटने में गिल्टी की शिकायत के चलते उन्होंने मेडिकल कॉलेज के अस्पताल में एमआरआई कराई थी। जांच के बाद उन्हें एमआरआई की फिल्म तो मिल गई, लेकिन रिपोर्ट बाद में लेने के लिए बुलाया गया। जब उन्होंने रिपोर्ट लेकर ऑर्थोपेडिक सर्जन को दिखाया तो डॉक्टर ने रिपोर्ट को गलत बताया।
अब गलत रिपोर्ट के कारण उनका इलाज शुरू नहीं हो सका है। अस्पताल प्रशासन ने उन्हें दोबारा एमआरआई कराने के लिए बुलाया है।
घुटने में गिल्टी की शिकायत, 3500 रुपये देकर कराई MRI
पहेतिया उर्फ सरौली निवासी राजू मिश्रा के अनुसार उनके घुटने में गिल्टी की समस्या है। इसी की जांच के लिए उन्होंने 29 सितंबर को मेडिकल कॉलेज के 300 बेड अस्पताल में एमआरआई कराने का निर्णय लिया।
उन्होंने बताया कि जांच के लिए अस्पताल में 3500 रुपये शुल्क जमा किया गया। इसके बाद उनके घुटने की एमआरआई की गई। जांच पूरी होने के बाद उन्हें एमआरआई की फिल्म उपलब्ध करा दी गई, जबकि रिपोर्ट बाद में देने की बात कही गई।
अस्पताल की ओर से उन्हें रिपोर्ट लेने के लिए बुधवार को बुलाया गया था। राजू मिश्रा निर्धारित समय पर अस्पताल पहुंचे और रिपोर्ट प्राप्त कर ली।
इसके बाद उन्होंने रिपोर्ट लेकर निजी क्लीनिक में ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. केके यादव को दिखाया।
डॉक्टर ने रिपोर्ट देखते ही पकड़ ली गड़बड़ी
राजू मिश्रा के मुताबिक जब उन्होंने एमआरआई की रिपोर्ट डॉ. केके यादव को दिखाई तो डॉक्टर ने रिपोर्ट देखकर बताया कि इसमें गड़बड़ी है।
डॉक्टर ने बताया कि जो फिल्म दी गई है, वह घुटने की है, लेकिन रिपोर्ट ब्रेन की बनी हुई है। ऐसे में इस रिपोर्ट के आधार पर घुटने की बीमारी का इलाज शुरू नहीं किया जा सकता।
राजू मिश्रा का कहना है कि डॉक्टर ने उन्हें दोबारा सही तरीके से एमआरआई कराने और उसकी सही रिपोर्ट लेकर आने की सलाह दी। इसके बाद ही घुटने का इलाज शुरू किया जा सकेगा।
इस स्थिति से राजू मिश्रा की परेशानी और बढ़ गई है, क्योंकि उनका कहना है कि बीमारी के इलाज में पहले ही काफी खर्च हो चुका है और अब गलत रिपोर्ट के कारण इलाज आगे नहीं बढ़ पाया।
‘पहले ही काफी खर्च हो चुका, दोबारा 3500 रुपये देना मुश्किल’
राजू मिश्रा ने अस्पताल की जांच व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि एमआरआई के लिए वह पहले ही 3500 रुपये जमा कर चुके हैं। जांच कराने के बाद भी सही रिपोर्ट नहीं मिलने से उनका इलाज शुरू नहीं हो सका।
उनका कहना है कि यदि अब उन्हें फिर से शुल्क जमा करके एमआरआई करानी पड़ती है तो यह उनके लिए अतिरिक्त आर्थिक बोझ होगा।
राजू मिश्रा ने मांग की है कि या तो उनकी पहले जमा की गई पूरी फीस वापस की जाए या फिर अस्पताल की ओर से निशुल्क दोबारा एमआरआई कराने की व्यवस्था की जाए।
उनका कहना है कि गलती मरीज की ओर से नहीं हुई है, इसलिए दोबारा जांच का खर्च भी मरीज पर नहीं डाला जाना चाहिए।
रात करीब आठ बजे अस्पताल ने जारी की घुटने की रिपोर्ट
मामला सामने आने के बाद मेडिकल कॉलेज प्रशासन की ओर से भी कार्रवाई की गई। जानकारी के मुताबिक बुधवार रात करीब 8 बजे राजू मिश्रा की पर्ची संख्या 5527 से संबंधित घुटने की रिपोर्ट जारी कर दी गई।
इससे पहले राजू मिश्रा को जो रिपोर्ट मिली थी, उसे डॉक्टर ने ब्रेन की रिपोर्ट बताया था। ऐसे में अस्पताल प्रशासन की ओर से बाद में घुटने से संबंधित रिपोर्ट जारी किए जाने के बाद मामले में स्थिति और स्पष्ट करने की जरूरत सामने आई है।
अस्पताल प्रशासन अब पूरे मामले की जांच कर रहा है कि मरीज की घुटने की एमआरआई के साथ ब्रेन की रिपोर्ट कैसे जुड़ गई।
प्राचार्य ने कहा- दोबारा MRI के लिए बुलाया गया है
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य प्रोफेसर आनंद मिश्रा ने मामले में अस्पताल का पक्ष रखते हुए बताया कि एमआरआई की रिपोर्ट ऑनलाइन आती है।
उन्होंने बताया कि अस्पताल में वर्तमान में दो टेक्नीशियन तैनात हैं। राजू मिश्रा ने शिकायत दर्ज कराई है कि उन्हें घुटने की फिल्म मिली, जबकि रिपोर्ट ब्रेन की मिली है।
प्राचार्य के अनुसार शिकायत के बाद राजू मिश्रा को बृहस्पतिवार, 1 अक्टूबर को दोबारा एमआरआई के लिए बुलाया गया है।
अस्पताल प्रशासन की ओर से मामले को लेकर आगे की प्रक्रिया की जा रही है।
फिल्म घुटने की, रिपोर्ट ब्रेन की कैसे हुई?
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब मरीज की जांच घुटने की हुई और उसे घुटने की फिल्म भी मिली, तो उसके साथ ब्रेन की रिपोर्ट कैसे जारी हो गई।
एमआरआई जैसी जांच में मरीज की पहचान, जांच किए गए शरीर के हिस्से, इमेजिंग डेटा और रिपोर्ट के बीच सही मिलान बेहद महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में किसी दूसरे अंग से संबंधित रिपोर्ट मरीज को मिलना स्वाभाविक रूप से गंभीर सवाल खड़े करता है।
हालांकि, यह तकनीकी गड़बड़ी किस स्तर पर हुई, इसकी वास्तविक वजह अभी मेडिकल कॉलेज प्रशासन की जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। फिलहाल अस्पताल प्रशासन ने मरीज को दोबारा जांच के लिए बुलाया है।
इलाज में देरी से परेशान हैं राजू मिश्रा
राजू मिश्रा के लिए यह मामला केवल रिपोर्ट की गलती तक सीमित नहीं है। उनका कहना है कि घुटने की समस्या के कारण वह पहले से इलाज की जरूरत महसूस कर रहे हैं और इसी उद्देश्य से एमआरआई कराई गई थी।
लेकिन जब रिपोर्ट गलत मिली तो डॉक्टर ने इलाज शुरू करने से पहले दोबारा जांच कराने की बात कही। इससे उपचार में देरी हो गई।
राजू मिश्रा का कहना है कि बीमारी के इलाज पर पहले ही काफी खर्च हो चुका है। ऐसे में दोबारा एमआरआई के लिए शुल्क देना उनके लिए परेशानी पैदा करेगा।
इसी कारण उन्होंने अस्पताल प्रशासन से फीस वापस करने या बिना अतिरिक्त शुल्क के दोबारा जांच कराने की मांग की है।
मरीज की शिकायत के बाद अब दोबारा जांच की तैयारी
मेडिकल कॉलेज प्रशासन के अनुसार शिकायत को संज्ञान में लिया गया है और राजू मिश्रा को दोबारा एमआरआई कराने के लिए बुलाया गया है।
अब दोबारा होने वाली जांच और उसकी रिपोर्ट से यह स्पष्ट होगा कि घुटने की वास्तविक स्थिति क्या है और डॉक्टर किस आधार पर उपचार शुरू करेंगे।
वहीं, अस्पताल के स्तर पर यह भी देखना महत्वपूर्ण होगा कि पहली रिपोर्ट में हुई कथित गड़बड़ी किस वजह से हुई और भविष्य में इस तरह की स्थिति दोबारा न हो, इसके लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
गाजीपुर मेडिकल कॉलेज की व्यवस्था पर उठे सवाल
Ghazipur Medical College से जुड़े इस मामले ने मरीजों को मिलने वाली जांच रिपोर्ट की प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। खासकर तब, जब मरीज को एक अंग की जांच के बाद दूसरे अंग से संबंधित रिपोर्ट मिलने का आरोप है।
राजू मिश्रा ने अस्पताल प्रशासन के सामने अपनी शिकायत रखी है और दोबारा जांच की मांग की है। प्रशासन की ओर से भी उन्हें दोबारा एमआरआई के लिए बुलाया गया है।
फिलहाल यह स्पष्ट होना बाकी है कि पहली रिपोर्ट में हुई गड़बड़ी किस स्तर पर हुई और अस्पताल की ऑनलाइन रिपोर्टिंग व्यवस्था में यह मामला कैसे सामने आया। जब तक इसकी जांच पूरी नहीं हो जाती, इसे मेडिकल लापरवाही का अंतिम निष्कर्ष मानना उचित नहीं होगा।

