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गोरखपुर में SpiceJet की फ्लाइट रद्द, रनवे पर रात बिताने को मजबूर हुए यात्री; एयरलाइन की परिचालन चुनौतियां भी चर्चा में

गोरखपुर। दुबई से गोरखपुर आने वाली SpiceJet की फ्लाइट SG553 एक नवंबर को अचानक रद्द होने से यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। उड़ान रद्द होने से नाराज यात्रियों ने एयरपोर्ट पर हंगामा किया। हालात ऐसे हो गए कि कुछ यात्री विमान के पास रनवे पर ही अपने सामान के साथ बैठ गए और लेटकर रात बिताने को मजबूर हुए। यात्रियों के बनाए वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद मामला चर्चा में आ गया। यात्रियों ने एयरलाइन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए पूछा कि जब गोरखपुर एयरपोर्ट पर रात नौ बजे के बाद उड़ानों के संचालन की अनुमति नहीं थी, तो उन्हें विमान में बोर्डिंग क्यों कराई गई?

विमान के पास बैग का तकिया बनाकर सोए यात्री

फ्लाइट रद्द होने के बाद एयरपोर्ट पर यात्रियों की नाराजगी साफ दिखाई दी। सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो में कई यात्री अपने बैग और अन्य सामान के साथ जमीन पर बैठे और लेटे नजर आए। कुछ यात्रियों ने बैग को ही तकिया बना लिया। इस दौरान केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के जवान भी वहां सुरक्षा की निगरानी करते दिखाई दिए।

एक महिला यात्री ने वीडियो बनाकर अपनी परेशानी साझा की। उसने कहा कि उसने जिंदगी में कभी नहीं सोचा था कि उसे एयरपोर्ट पर विमान के नीचे इस तरह लेटना पड़ेगा। एक अन्य यात्री ने नाराजगी जताते हुए कहा, ‘यह कैसा भद्दा मजाक है?’ यात्रियों का कहना था कि वे समय पर एयरपोर्ट पहुंचे, लेकिन उड़ान रद्द होने के बाद उन्हें घंटों तक कोई स्पष्ट समाधान नहीं मिला।

पहले बदला समय, फिर विमान में बैठाकर कर दी उड़ान रद्द

यात्रियों के मुताबिक, फ्लाइट SG553 का निर्धारित प्रस्थान समय शाम 5:55 बजे था। एयरलाइन ने बार-बार उड़ान का समय बदला। इसके बाद यात्रियों को विमान में बैठा दिया गया और सुरक्षा संबंधी आवश्यक जानकारी भी दी गई। यात्री करीब एक घंटे तक विमान के भीतर बैठे रहे। इसी बीच अचानक घोषणा की गई कि रात आठ बजे लैंडिंग पर पाबंदी होने के कारण फ्लाइट रद्द की जा रही है।

एक यात्री ने सोशल मीडिया पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि जब एयरपोर्ट पर रात नौ बजे तक ही संचालन की अनुमति थी, तो यात्रियों को विमान में बैठाने और उड़ान की तैयारी कराने की जरूरत क्यों पड़ी? यात्रियों ने एयरलाइन से समय पर जानकारी देने और वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की।

रात नौ बजे तक निर्धारित है एयरपोर्ट का वॉच आवर

गोरखपुर एयरपोर्ट रक्षा मंत्रालय के अधीन संचालित होता है। यहां विमानों के संचालन के लिए रात नौ बजे तक का वॉच आवर निर्धारित है। एक नवंबर को इस समय सीमा को आगे बढ़ाने की अनुमति नहीं मिली थी। इसी परिचालन प्रतिबंध के कारण स्पाइसजेट की संबंधित उड़ान संचालित नहीं हो सकी।

हालांकि, यात्रियों का सवाल एयरपोर्ट की समय सीमा से अधिक एयरलाइन की योजना और सूचना व्यवस्था को लेकर था। उनका कहना था कि यदि निर्धारित समय के भीतर विमान की लैंडिंग संभव नहीं थी, तो उन्हें पहले ही इसकी जानकारी दी जानी चाहिए थी। विमान में बैठाने के बाद उड़ान रद्द किए जाने से यात्रियों की परेशानी और बढ़ गई।

अगले दिन अतिरिक्त उड़ान से यात्रियों को पहुंचाया गया

स्पाइसजेट के प्रवक्ता ने बताया कि गोरखपुर एयरपोर्ट पर लागू परिचालन समय की पाबंदी के कारण एक नवंबर की उड़ान रद्द करनी पड़ी। एयरलाइन ने यात्रियों को हुई असुविधा पर खेद जताते हुए कहा कि उनकी यात्रा पूरी कराने के लिए दो नवंबर को अतिरिक्त व्यावसायिक उड़ान SG9553 संचालित की गई। इस उड़ान के माध्यम से रद्द हुई फ्लाइट के यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाया गया।

स्पाइसजेट की परिचालन और वित्तीय चुनौतियां भी चर्चा में

गोरखपुर की इस घटना के बीच स्पाइसजेट की परिचालन स्थिति और वित्तीय चुनौतियां भी चर्चा में हैं। एयरलाइन पिछले कुछ समय से विमानों की उपलब्धता, उड़ानों में देरी, कर्मचारियों के वेतन भुगतान और वित्तीय दबाव जैसी समस्याओं का सामना कर रही है। इन चुनौतियों का असर उसके उड़ान संचालन और समय-सारिणी पर पड़ने की खबरें भी सामने आती रही हैं।

सितंबर 2026 में सामने आई रिपोर्टों के अनुसार, नागरिक उड्डयन मंत्रालय और विमानन नियामक डीजीसीए स्पाइसजेट की वित्तीय और परिचालन स्थिति पर निगरानी रख रहे थे। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ने भी कहा था कि एयरलाइन के संचालन और वित्तीय स्थिति की समीक्षा की जा रही है, ताकि यात्रियों की सुविधा और विमानन सुरक्षा से कोई समझौता न हो। सरकार की ओर से एयरलाइन को इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी योजना के तहत 150 करोड़ रुपये की सहायता दिए जाने की जानकारी भी सामने आई थी।

इसके अलावा, डीजीसीए के आंकड़ों पर आधारित सितंबर 2026 की एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त में स्पाइसजेट की 48.05 प्रतिशत उड़ानें दो घंटे से अधिक देरी से संचालित हुई थीं। इसी अवधि में सभी निर्धारित घरेलू एयरलाइनों का औसत आंकड़ा 1.39 प्रतिशत बताया गया था। रिपोर्ट में विमानों की सीमित उपलब्धता और रखरखाव के कारण कुछ विमानों के परिचालन से बाहर रहने को भी देरी की वजहों में शामिल किया गया था।

एयरलाइन ने अपनी क्षमता बढ़ाने के लिए 20 विमानों को लीज पर लेने की योजना भी घोषित की थी। इनमें 15 बोइंग और पांच एयरबस विमान शामिल बताए गए थे। इस कदम का उद्देश्य बेड़े की क्षमता बढ़ाना और उड़ानों के संचालन को मजबूत करना था। हालांकि, विमान शामिल करने की योजना और वास्तविक परिचालन स्थिरता के बीच कितना अंतर कम हुआ है, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।

यात्रियों की सुविधा और समय पर सूचना देना बड़ी चुनौती

गोरखपुर एयरपोर्ट पर हुई घटना ने उड़ान रद्द होने की स्थिति में यात्रियों को समय पर सूचना देने, वैकल्पिक व्यवस्था करने और उन्हें उचित सुविधाएं उपलब्ध कराने की जरूरत को फिर सामने ला दिया है। एयरपोर्ट की परिचालन समय-सीमा पहले से निर्धारित थी, ऐसे में एयरलाइन की जिम्मेदारी थी कि वह उसी के अनुरूप उड़ान की योजना और यात्रियों की बोर्डिंग का प्रबंधन करे।

स्पाइसजेट ने अगले दिन अतिरिक्त उड़ान संचालित कर यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने की बात कही है, लेकिन इस घटना के दौरान यात्रियों को हुई परेशानी और विमान में बैठाने के बाद अचानक उड़ान रद्द किए जाने को लेकर उठे सवाल बने हुए हैं। यात्रियों के लिए केवल यात्रा पूरी कराना ही नहीं, बल्कि उड़ान से जुड़ी सही जानकारी और समय पर सहायता मिलना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

गोरखपुर की घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि एयरलाइंस को एयरपोर्ट की परिचालन समय-सीमा और अन्य प्रतिबंधों का आकलन बोर्डिंग से पहले ही क्यों नहीं करना चाहिए, ताकि यात्रियों को आखिरी समय में ऐसी परेशानी का सामना न करना पड़े।

यह समाचार इंटरनेट पर उपलब्ध जानकारी एवं मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है।

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