Budaun में मंदिर की जमीन को लेकर विवाद, महंत प्रयागदास ने ली जीवित समाधि की चेतावनी; गड्ढे में बैठने से मचा हड़कंप
Budaun। कादरचौक क्षेत्र के लभारी गांव में रामजानकी मंदिर के बराबर स्थित जमीन को लेकर विवाद गहरा गया। शनिवार को नायब तहसीलदार की मौजूदगी में राजस्व टीम ने पट्टे की भूमि की पैमाइश की तो ग्रामीणों में नाराजगी फैल गई। मंदिर की जमीन होने का दावा करते हुए महंत प्रयागदास ने जीवित समाधि लेने की घोषणा कर दी। रविवार सुबह समाधि के लिए गड्ढा खोदा गया और महंत उसमें बैठ गए। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और उन्हें ऐसा करने से रोकने का प्रयास किया। बाद में ग्रामीणों के समझाने पर महंत गड्ढे से बाहर आ गए।
मंदिर के पास की जमीन को लेकर दो दशक से विवाद
ग्रामीणों के मुताबिक, रामजानकी मंदिर के बराबर स्थित यह भूमि चकबंदी से पहले वर्ष 2001 में मंदिर की मानी जाती थी। मंदिर परिसर से जुड़ी इस जमीन पर लंबे समय से धार्मिक आयोजन, मेला और नखासा आयोजित होता रहा है। ग्रामीणों का दावा है कि भूमि पर मंदिर का कब्जा रहा है और इसका उपयोग धार्मिक गतिविधियों के लिए किया जाता रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि बाद में चकबंदी प्रक्रिया के दौरान गाटा संख्या में बदलाव हुआ और जमीन के पट्टे कर दिए गए। करीब दो दशक पहले हुए इन पट्टों को लेकर मंदिर पक्ष लगातार आपत्ति जताता रहा है। इसी जमीन के स्वामित्व और पट्टों की वैधता को लेकर अब विवाद फिर सामने आ गया है।
राजस्व टीम की पैमाइश के विरोध में महंत ने किया ऐलान
शनिवार को नायब तहसीलदार की मौजूदगी में लेखपाल और कानूनगो की टीम लभारी गांव पहुंची। टीम ने पट्टे की भूमि की पैमाइश शुरू की तो इसकी जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर एकत्र हो गए। उन्होंने पैमाइश का विरोध किया। महंत प्रयागदास ने जमीन को मंदिर की संपत्ति बताते हुए पट्टे की कार्रवाई पर सवाल उठाए और विरोध स्वरूप जीवित समाधि लेने की घोषणा कर दी।
रविवार को समाधि के लिए खोदे गए गड्ढे में बैठे महंत
रविवार सुबह महंत के समाधि लेने की तैयारी की सूचना पर पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। पुलिसकर्मियों ने उन्हें गड्ढे में बैठने से रोकने और समझाने का प्रयास किया। महंत ने नायब तहसीलदार को दोपहर 12 बजे तक मौके पर बुलाने की मांग रखी। उनका कहना था कि अधिकारी आकर उनकी शिकायत सुनें और जमीन के पट्टे निरस्त करें।
महंत के अनुसार, तय समय तक नायब तहसीलदार मौके पर नहीं पहुंचे तो वह समाधि के लिए खोदे गए गड्ढे में बैठ गए। उन्होंने आरोप लगाया कि नायब तहसीलदार ने उनके साथ अभद्रता की थी। महंत ने मांग की कि अधिकारी मौके पर आकर उनसे माफी मांगें और पट्टे निरस्त करें, तभी वह गड्ढे से बाहर निकलेंगे। इस दौरान मौके पर तनाव की स्थिति बन गई। बाद में ग्रामीणों ने उन्हें समझाया, जिसके बाद महंत गड्ढे से बाहर आ गए।
पुराने राजस्व अभिलेखों की जांच कराने की मांग
ग्रामीणों की मांग है कि विवादित जमीन के पुराने राजस्व अभिलेखों और चकबंदी से पहले की स्थिति की जांच कराई जाए। उनका कहना है कि जमीन के पुराने रिकॉर्ड और मंदिर के उपयोग से जुड़े तथ्यों को सामने लाए बिना पट्टों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकती। ग्रामीण चाहते हैं कि प्रशासन पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर विवाद का समाधान करे।
एसडीएम बोले- मंदिर की जमीन पट्टे में शामिल नहीं
एसडीएम सदर सांई आश्रित शांखमुरी ने बताया कि आईजीआरएस पोर्टल पर पट्टे से संबंधित शिकायत प्राप्त हुई थी। इसी के आधार पर शनिवार को राजस्व टीम ने मौके पर जाकर पैमाइश की थी। एसडीएम के अनुसार, मंदिर की जमीन पट्टे में शामिल नहीं है। उन्होंने बताया कि पुलिस मौके पर मौजूद थी और महंत को समझाकर गड्ढे से बाहर निकाल लिया गया है।
फिलहाल विवादित भूमि को लेकर ग्रामीणों के दावों और प्रशासन के पक्ष में अंतर बना हुआ है। एक ओर ग्रामीण पुराने राजस्व रिकॉर्ड और मंदिर के पारंपरिक उपयोग के आधार पर जांच की मांग कर रहे हैं, वहीं प्रशासन का कहना है कि मंदिर की जमीन पट्टे में शामिल नहीं है। ऐसे में जमीन की वास्तविक स्थिति और पट्टों से जुड़े विवाद का समाधान राजस्व अभिलेखों की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
लभारी गांव में मंदिर के पास की जमीन को लेकर विवाद अब प्रशासन और ग्रामीणों के बीच जांच तथा पट्टों की वैधता का मुद्दा बन गया है। ग्रामीण पुराने अभिलेखों की जांच चाहते हैं, जबकि प्रशासन ने मंदिर की जमीन को पट्टे से अलग बताया है।

