500 पैट्रियट मिसाइलें, अरबों का खर्च और चुनाव का इंतजार: Zelenskyy की युद्ध रणनीति पर कितने सवाल?
कीव/वॉशिंगटन। रूस के साथ जारी युद्ध के बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर Zelenskyy ने एक बार फिर अमेरिका और यूरोपीय सहयोगियों से हवाई सुरक्षा के लिए बड़ी सैन्य मदद मांगी है। अमेरिका ने यूक्रेन को 500 पैट्रियट PAC-3 MSE मिसाइलों की संभावित बिक्री को मंजूरी दे दी है। इस सौदे की अनुमानित कीमत 2.1 अरब डॉलर यानी करीब 19 हजार करोड़ रुपये है। इसका वित्तीय बोझ कनाडा, जर्मनी, नॉर्वे और यूरोपीय सहयोगियों के जरिए उठाया जाएगा।
इस फैसले के साथ एक बड़ा सवाल भी खड़ा हो रहा है। आखिर यूक्रेन को लगातार हथियार और आर्थिक सहायता देने की यह व्यवस्था कब तक चलेगी? युद्ध के चार साल से अधिक समय बाद भी यूक्रेन की सुरक्षा बाहरी सैन्य सहायता पर निर्भर है। जेलेंस्की हर महीने बड़ी संख्या में मिसाइलों की मांग कर रहे हैं, जबकि युद्ध का आर्थिक और मानवीय बोझ यूक्रेन के साथ उसके सहयोगियों पर भी बढ़ रहा है। ऐसे में उनकी युद्ध रणनीति, खर्च की प्राथमिकताओं और राजनीतिक जवाबदेही पर बहस होना स्वाभाविक है।
500 मिसाइलों की मंजूरी, लेकिन यूक्रेन को तुरंत नहीं मिलेगी आपूर्ति
अमेरिकी विदेश विभाग ने 30 अक्टूबर को 500 पैट्रियट PAC-3 MSE मिसाइलों की संभावित बिक्री को मंजूरी दी। यह पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम के आधुनिक इंटरसेप्टर संस्करणों में शामिल हैं, जिनका इस्तेमाल बैलिस्टिक मिसाइलों और अन्य हवाई खतरों को रोकने के लिए किया जाता है। इस सौदे में मिसाइलों के साथ संबंधित उपकरण, स्पेयर पार्ट्स और तकनीकी सहायता भी शामिल है।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, करीब 2.1 अरब डॉलर की इस खरीद के लिए कनाडा, जर्मनी और नॉर्वे वित्तीय योगदान देंगे। यूरोपीय संघ के समर्थन वाले यूक्रेन सहायता ऋण से जुड़े राष्ट्रीय फंड भी इसमें इस्तेमाल होंगे। यानी अमेरिका मिसाइलों की बिक्री को मंजूरी दे रहा है, लेकिन इसका पूरा वित्तीय भार अमेरिकी सरकार नहीं उठाएगी।
सबसे अहम बात यह है कि मंजूरी मिलने का मतलब तत्काल आपूर्ति नहीं है। मिसाइलों के निर्माण और डिलीवरी में लंबा समय लग सकता है। जेलेंस्की ने भी इस पर चिंता जताते हुए अमेरिका से मौजूदा भंडार से मिसाइलें उपलब्ध कराने का आग्रह किया है।
जेलेंस्की की मांग: हर महीने 100 मिसाइलें चाहिए
जेलेंस्की ने अमेरिकी मंजूरी का स्वागत किया, लेकिन कहा कि मौजूदा प्रक्रिया के तहत मिसाइलों की आपूर्ति में कई साल लग सकते हैं। उनके मुताबिक, यूक्रेन को सर्दियों के दौरान रूसी हमलों से बचने के लिए तत्काल अतिरिक्त हवाई सुरक्षा की जरूरत है। उन्होंने अमेरिका और यूरोपीय सहयोगियों से अपने मौजूदा भंडार में उपलब्ध मिसाइलों को पहले यूक्रेन भेजने और बाद में नए उत्पादन से उनकी भरपाई करने का सुझाव दिया है।
जेलेंस्की ने अक्टूबर के पिछले दो सप्ताह में यूक्रेन के अहम ठिकानों पर रूस के 30 से अधिक हमलों का दावा किया। उनका कहना है कि रूस बिजली व्यवस्था, घरों को गर्म रखने वाली सुविधाओं, पानी की आपूर्ति और पुलों जैसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को निशाना बना रहा है। यूक्रेन की मांग है कि सर्दियों से पहले उसकी एयर डिफेंस क्षमता को मजबूत किया जाए।
हालांकि, हर महीने 100 मिसाइलों की मांग और 500 मिसाइलों के नए सौदे के बीच एक व्यावहारिक सवाल भी है। इतनी महंगी मिसाइलों का उत्पादन, आपूर्ति और लगातार इस्तेमाल लंबे समय तक कैसे संभव होगा? क्या यूक्रेन के सहयोगी अपनी सुरक्षा जरूरतों और अपने सैन्य भंडार को प्रभावित किए बिना यह सहायता जारी रख पाएंगे?
मिसाइलों की कमी और रूस के हमले यूक्रेन के लिए बड़ी चुनौती
यूक्रेन की हवाई सुरक्षा के सामने मिसाइलों की कमी गंभीर समस्या बनी हुई है। जेलेंस्की ने पहले कहा था कि इस साल अमेरिका से उसे औसतन हर महीने केवल 12 पैट्रियट मिसाइलें मिलीं, जबकि रूसी बैलिस्टिक मिसाइल हमलों को रोकने के लिए कहीं अधिक इंटरसेप्टर की जरूरत पड़ती है। CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, अक्टूबर की शुरुआत में यूक्रेन का पैट्रियट मिसाइलों का मौजूदा भंडार खत्म होने की स्थिति में पहुंच गया था।
29 अक्टूबर को मध्य यूक्रेन के निप्रो शहर में रेलवे स्टेशन पर हुए ड्रोन हमले में 14 लोगों की मौत की खबर भी सामने आई थी। ऐसे हमले यूक्रेन के लिए नागरिकों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा को और कठिन बनाते हैं। रूस की सैन्य कार्रवाई से पैदा हुए खतरे को देखते हुए कीव लगातार पश्चिमी देशों से अतिरिक्त हथियारों की मांग कर रहा है।
यूरोप और कनाडा क्यों उठा रहे हैं हथियारों का खर्च?
यूरोपीय देशों और कनाडा की यूक्रेन को सहायता केवल रूस-यूक्रेन युद्ध तक सीमित रणनीतिक फैसला नहीं है। यूरोपीय देशों का मानना है कि यूक्रेन की सैन्य स्थिति कमजोर होने से यूरोप की व्यापक सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। इसी वजह से वे हथियारों, आर्थिक सहायता, सैनिक प्रशिक्षण और रक्षा उत्पादन में सहयोग कर रहे हैं।
कनाडा सरकार के अनुसार, 2022 से अब तक उसने यूक्रेन के लिए 25.5 अरब कनाडाई डॉलर से अधिक की आर्थिक, सैन्य और मानवीय सहायता देने की प्रतिबद्धता जताई है। कनाडा ने अपने सैन्य प्रशिक्षण मिशन ऑपरेशन यूनिफायर को 2029 तक बढ़ाया है। इसके तहत यूक्रेनी सैनिकों को प्रशिक्षण और सैन्य उपकरण उपलब्ध कराने में मदद की जा रही है।
कनाडा और यूक्रेन ने ड्रोन, ड्रोन रोधी तकनीक, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध उपकरण और गोला-बारूद के उत्पादन में भी सहयोग बढ़ाने की योजना बनाई है। इस सहायता का उद्देश्य यूक्रेन की रक्षा क्षमता को मजबूत करना है, लेकिन इसके साथ सहयोगी देशों के रक्षा बजट और संसाधनों पर भी दबाव बढ़ता है।
युद्ध जारी रखने की रणनीति पर सवाल: हथियारों से कब निकलेगा समाधान?
जेलेंस्की की सरकार का तर्क है कि रूस के हमलों से बचने और यूक्रेन की संप्रभुता की रक्षा के लिए पर्याप्त सैन्य क्षमता जरूरी है। इस दृष्टिकोण से पैट्रियट मिसाइलों की मांग को सुरक्षा की आवश्यकता के रूप में देखा जाता है। दूसरी ओर, युद्ध की अवधि बढ़ने के साथ यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या केवल हथियारों की आपूर्ति से स्थायी समाधान हासिल किया जा सकता है।
यूक्रेन को मिलने वाली सैन्य सहायता का बड़ा हिस्सा सहयोगी देशों के बजट और संसाधनों से आता है। ऐसे में जवाबदेही, खर्च की पारदर्शिता और युद्ध के साथ-साथ कूटनीतिक समाधान की दिशा में प्रगति पर सवाल उठाना जरूरी है। क्या कीव की रणनीति में युद्ध के अंत की कोई स्पष्ट और व्यावहारिक समयसीमा है? क्या सैन्य सहायता के साथ शांति वार्ता के लिए भी उतनी ही गंभीर कोशिश हो रही है? इन सवालों का जवाब केवल नई मिसाइलों की संख्या से नहीं मिलेगा।
मार्शल लॉ के कारण चुनाव स्थगित, जेलेंस्की की राजनीतिक जवाबदेही पर बहस
यूक्रेन में राष्ट्रपति चुनाव मार्च 2024 में होने थे, लेकिन रूस के पूर्ण पैमाने पर हमले के बाद फरवरी 2022 में लागू किए गए मार्शल लॉ के कारण चुनाव नहीं हो सके। यूक्रेन के मौजूदा कानूनी प्रावधानों के तहत मार्शल लॉ लागू रहने के दौरान राष्ट्रीय और स्थानीय चुनावों पर रोक है। इसलिए जेलेंस्की का राष्ट्रपति पद पर बने रहना युद्धकालीन कानूनी व्यवस्था से जुड़ा है, न कि चुनाव कराकर नए कार्यकाल की शुरुआत से।
यूक्रेन की संसद में गठित कार्यसमूह ने भी मई 2026 में कहा था कि मार्शल लॉ के दौरान चुनाव कराना संभव नहीं है। इसके अलावा, देश के कुछ हिस्सों पर रूसी कब्जा, लाखों विस्थापित नागरिक, विदेशों में रह रहे यूक्रेनी मतदाता और मोर्चे पर तैनात सैनिक चुनाव आयोजन को बेहद जटिल बनाते हैं।
फिर भी, लंबे समय तक चुनाव नहीं होने से राजनीतिक जवाबदेही और लोकतांत्रिक निगरानी को लेकर बहस जारी है। युद्ध की परिस्थितियां चुनाव स्थगित करने का कानूनी आधार देती हैं, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि सरकार के फैसलों, सैन्य खर्च और नीतियों पर सवाल उठाना बंद हो जाना चाहिए। जेलेंस्की प्रशासन को यह स्पष्ट करना होगा कि युद्धकालीन खर्च और सैन्य रणनीति की समीक्षा किस तरह हो रही है तथा सामान्य लोकतांत्रिक प्रक्रिया बहाल करने की योजना क्या है।
पुतिन की चेतावनी और युद्ध का बढ़ता अंतरराष्ट्रीय दायरा
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूरोपीय देशों को चेतावनी दी है कि रूस के साथ टकराव बढ़ाने के गंभीर परिणाम हो सकते हैं। उनका कहना है कि रूस यूरोप के साथ युद्ध नहीं चाहता, लेकिन यदि कोई देश सीधे टकराव का रास्ता अपनाता है तो उसे इसके नतीजों के लिए तैयार रहना चाहिए। पुतिन ने यह भी कहा है कि बड़े स्तर पर संघर्ष बढ़ने की स्थिति में किसी की जीत नहीं होगी।
इस बयान और यूक्रेन को लगातार मिल रही सैन्य सहायता के बीच यूरोप के सामने दोहरी चुनौती है। एक तरफ उसे यूक्रेन की सुरक्षा में सहयोग करना है, दूसरी तरफ रूस के साथ सीधे सैन्य टकराव और क्षेत्रीय अस्थिरता को रोकना है। ऐसे माहौल में हर नया हथियार सौदा युद्ध की सैन्य क्षमता के साथ-साथ उसके राजनीतिक और आर्थिक परिणामों को भी प्रभावित करता है।
500 मिसाइलों से सुरक्षा मजबूत होगी, लेकिन शांति का रास्ता अब भी अस्पष्ट
500 पैट्रियट मिसाइलों की संभावित बिक्री यूक्रेन की हवाई सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है, लेकिन यह सौदा युद्ध के अंत की गारंटी नहीं देता। मिसाइलों की आपूर्ति में देरी, उत्पादन की सीमाएं, बढ़ता रक्षा खर्च और रूस के लगातार हमले यूक्रेन के सामने गंभीर चुनौतियां हैं। दूसरी ओर, यूरोपीय देशों और कनाडा को भी यह तय करना होगा कि वे कितने समय तक और किस सीमा तक आर्थिक तथा सैन्य सहायता जारी रख सकते हैं।
जेलेंस्की के सामने चुनौती केवल रूस के हमलों को रोकने की नहीं, बल्कि अपने देश के नागरिकों को यह भरोसा दिलाने की भी है कि लगातार बढ़ते सैन्य खर्च और युद्धकालीन प्रतिबंधों के बीच यूक्रेन का भविष्य किस दिशा में जा रहा है। हथियारों की मांग अपनी जगह है, लेकिन युद्ध का राजनीतिक समाधान, जवाबदेही और लोकतांत्रिक व्यवस्था की बहाली भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं।
500 मिसाइलों की मंजूरी से यूक्रेन की रक्षा क्षमता को मदद मिल सकती है, लेकिन असली सवाल अब भी कायम है—क्या अरबों डॉलर के हथियार युद्ध को समाप्त करने की दिशा में ले जा रहे हैं, या यूक्रेन और उसके सहयोगियों को एक लंबे और महंगे संघर्ष में और अधिक उलझा रहे हैं?

