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Panchbali Bhog in Pitru Paksha : पितृपक्ष में क्यों जरूरी है पंचबली भोग?

पितृपक्ष में पितरों को श्रद्धा से पूजने के साथ उनके लिए विशेष भोजन भी कराया जाता है। तो क्या आप पंचबलि कर्म Panchbali Bhog से परिचित हैं?

श्राद्ध भोजन के नियम की मुख्य बातें-

पंचबलि का मतलब होता है पितरों के लिए पांच लोगों को भोजन खिलाना,पंचबलि में ब्राह्मण के अलावा गाय, कुत्ता, कौवा और चींटी शामिल हैं इन सभी प्राणियों के मुख से सीधे पितरों को भोजन मिलता है।राजेश जैन एस्ट्रोलॉजर

श्राद्ध पितरों के निमित्त किया जाता है और उनके ही निमित्त भोजन भी कराया जाता है। मान्यता है कि जो कुछ भी पितरों के नाम पर उनके वंशज पितृपक्ष में करते हैं, वह सब उनके पितरों को मिलता है, लेकिन यह दान और भोजन उन तक किस माध्यम से पहुंचता है, इसे जान लेना चाहिए। यानि जब भी श्राद्ध का भोजन कराएं, उसे पांच स्थान या पांच प्राणियों के पास जरूर रखें।

पितरों के तर्पण और पिंडदान के साथ ही भोजन का भी बहुत महत्त्व होता है। इसलिए आपका पंचबलि कर्म के बारे में जानना जरूरी है। तो आइए आपको इससे जुड़ी सभी बातों से परिचित कराएं।

श्राद्ध का समय तरीका भी जानें।
श्राद्ध हमेशा दक्षिण दिशा की ओर मुख करके करना चाहिए और भोजन भी दक्षिण दिशा में ही परोसना चाहिए। श्राद्ध हमेशा कुतप बेला में करना चाहिए और ये समय दिन के अपरान्ह 11:36 मिनिट से 12:24 मिनिट के बीच ही होता है। इसलिए इसी समय पितृगणों के निमित्त धूप डालकर, तर्पण, दान व ब्राह्मण भोजन कराना चाहिए।राजेश जैन एस्ट्रोलॉजर

क्या है पंचबलि कर्म?
पंचबलि कर्म का मतलब है, ब्राह्मण के अलावा चार अन्य प्राणियों के लिए पितरों के नाम पर भोजन खिलाना। पंचबलि में गाय, कुत्ता, चींटी और कौवा आते हैं। इन पांच लोगों के लिए पांच स्थान पर भोज रखना चाहिए। यहां पंचबलि का मतलब होता है पांच लोगों के भोज से। राजेश जैन एस्ट्रोलॉजर

प्रथम गौ बलि: घर से पश्चिम दिशा में गाय को महुआ या पलाश के पत्ते पर रखकर भोजन देना चाहिए। भोजन देते हुए ‘गोभ्यो नम:’ कहकर प्रणाम करें।

द्वितीय श्वान बलि: पत्ते पर भोजन रखकर कुत्ते को भोजन कराना चाहिए। कोशिश करें कि ये कुत्ता दक्षिण दिशा की ओर मुख कर खाना खाए।

तृतीय काक बलि: कौऐ के लिए छत पर या भूमि पर रखकर भोज देना चाहिए।

चतुर्थ पिपीलिकादि बलि: चींटी, कीड़े-मकौड़ों आदि के बिल के आगे भोजन का चूरा रखना चाहिए।

पंचम ब्राह्मण भोज : ब्राह्मण भोजन घर पर कराएं और महुए या पलाश के पत्ते पर उन्हें भोज परसें।

श्राद्ध यदि विधिवत किया जाए तो वह पितरों तक निश्चित रूप से पहुंचता है। मान्यता है कि इन पंचबलि के मुख से सीधे पितरों को भोजन मिलता है।

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