आखिर असली जानवर कौन है?

जानवरो के प्रति हिंसा की आज एक घिनोनी घटना सामने आई है…जो केरल में उस मादा हाथी के साथ हुआ..वो करने वाले इंसान तो कहे नही जा सकते..उसको पटाखों से भरा फल खिलाया गया

जिसके कारण वो तड़प तड़प के मर गई..वो गर्भवती थी..एक साथ दो जान छीन ली गई जो प्रदेश 100% साक्षरता का दंभ भरता है….इन लोगो को अपनी साक्षरता पर भी शर्म आनी चाहिए.. इसको लेकर लोग संवेदनशील हो रहे है

पर ये क्रूरता तो हम रोज करते है..और अपने आस पास देखते है..

आवारा पशुओं के साथ जो सडको पर सलूक होता है.. हम सब जानते है..आपमे से कुछ लोग जरूर होंगे जो बेवजह पशुओं को मारते है..ये दुनिया केवल इंसानों की बकौती नही है…पशुओं पक्षियों का भी उतना ही हक है जितना हमारा है.. पर हमने केवल छीना और बर्बाद किया है..

इसके अलावा ..आवारा पशु कटान मूलतः गौ मांस के लिए उनका कटान किया जाता है..ये एक दंडनीय अपराध होने के साथ साथ आस्था से जुड़ा मसला भी है..

पर आप देखते है.. कैसे रोजमरा आपको ये खबर पढ़ने को मिल जाती है.. लॉक डाउन में ही.. डेढ दर्जन से ज्यादा घटनाएं हुई..अपराधियों को पुलिस ने पकड़ा.. वो तो दोषी है ही..

पर जो लोग आस्था की बात करते है.. सवाल उन पर भी है…वो आस्था तब क्यों नही जागती जब आप उसी पशु को कूड़ा और पॉलीथिन खाते हुए देखते है..उनको आवारा छोड़ा क्यों जाता है..

जो लोग गौसेवा करते भी है.. उनकी भी कोई मदद नही करता है.. तो आईना तो उन आस्था रखने वाले लोगो को भी देखना चाहिए

लेखक:

अपने मन की वेदना को लेखन के माध्यम से प्रदर्शित करते, सामाजिक मुद्दो पर अपनी राय बेबाकी से रखने वाले श्री निशान्त शर्मा  मूल रूप से मुजफ्फरनगर के रहने वाले हैं और एक स्वतन्त्र लेखक हैं। आज के परिपेक्ष्य में समाज को आईना दिखाती उनकी यह रचना सोचने पर मजबूर कर देती हैं कि समाज का स्तर किस ओर जा रहा हैं और अपने निजी स्वार्थ के कारण एक तबका देश हित को कैसे नजरअंदाज करता हैं?

 

आखिर पुलिस और डॉक्टरों पर हमलो का दोषी कौन है?

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