उत्तर प्रदेश

CRPF जवान पर पत्नी की हत्या का आरोप: भरण-पोषण केस में Agra कोर्ट से लौट रही महिला को ताबड़तोड़ गोलियां मार दीं, मासूम बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल

Agra के फतेहाबाद थाना क्षेत्र के गांव सारंगपुर मार्ग पर शुक्रवार की शाम को ऐसी वारदात हुई, जिसने पूरे इलाके को दहशत और शोक में डुबो दिया। 35 वर्षीय मंजू नाम की महिला, जो भरण-पोषण केस के सिलसिले में कोर्ट से तारीख कर लौट रही थी, तीन गोलियां मारकर बेरहमी से हत्या कर दी गई। परिजनों ने सीधे तौर पर मंजू के पति, जो कि सीआरपीएफ में तैनात है, पर हत्या का आरोप लगाया है।


मंजू की मौत से बच्चों की दुनिया उजड़ी

मंजू की हत्या के बाद का दृश्य झकझोर देने वाला था। उसकी 9 साल की बेटी मोहिनी और 7 वर्षीय बेटा आरके, मां के शव से लिपटकर फूट-फूटकर रोते रहे। मोहिनी बार-बार बेसुध हो रही थी और होश में आते ही कहती,

“अब कौन हमारा ख्याल रखेगा? पापा ने हमसे मां छीन ली…”

पुलिस को दोनों बच्चों को शव से अलग करना पड़ा। यह नजारा देखकर मौके पर मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं।


पति पर हत्या का आरोप, 8 साल से चल रहा था विवाद

पीड़िता के पिता हरी सिंह, जो गढ़ी केसरी, थाना निबोहरा के निवासी हैं, ने बताया कि मंजू की शादी 14 साल पहले राजस्थान के समोना गांव, राजाखेड़ा के मनोज कुमार उर्फ चरन सिंह से हुई थी, जो इस वक्त सीआरपीएफ में राजस्थान में तैनात है।

बीते 8 वर्षों से पति-पत्नी के बीच विवाद चल रहा था, जिसकी वजह से मंजू अपने दोनों छोटे बच्चों के साथ मायके में रह रही थी। पति के खिलाफ भरण-पोषण का केस कोर्ट में दर्ज था और शुक्रवार को उसी मामले की तारीख पर वह दीवानी कोर्ट गई थी।


प्लॉट विवाद और परिवारिक कलह की गहराई

परिजनों ने बताया कि मंजू मेहनत-मजदूरी कर बच्चों का पेट पाल रही थी। उसने फतेहाबाद में एक प्लॉट भी खरीदा था, मगर यह संपत्ति भी विवाद की जड़ बन गई।
करीब एक साल पहले प्लॉट को लेकर ननद से झगड़ा हुआ था, जो कि मारपीट तक पहुंच गया। मामला थाने तक गया, लेकिन विवाद खत्म नहीं हुआ।


बड़ा बेटा अमर भी सदमे में, पिता के पास रह रहा था

मंजू का बड़ा बेटा अमर कुछ समय से अपने पिता मनोज के पास रह रहा था। मां-बेटे के बीच थोड़ी दूरी जरूर थी, लेकिन रिश्तों की डोर अब तक मजबूत थी। अब मां की हत्या की खबर से अमर भी सदमे में है और परिजनों ने बताया कि वह गुमसुम है, किसी से बात नहीं कर रहा।


तीन मासूमों की जिंदगी पर संकट

इस हृदयविदारक घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल इन तीन मासूम बच्चों के भविष्य पर खड़ा हो गया है। एक मां, जिसने गरीबी, संघर्ष और उपेक्षा के बीच भी अपने बच्चों को जीवन दिया, आज उन्हीं बच्चों के लिए एक अंधेरा छोड़ गई है, जिसकी भरपाई शायद ही कभी हो सके।


पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा, आरोपी की तलाश जारी

फतेहाबाद पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। इंस्पेक्टर फतेहाबाद ने बताया कि परिजनों की तहरीर के आधार पर हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया है और सीआरपीएफ जवान मनोज की तलाश की जा रही है
पुलिस के अनुसार, प्रारंभिक जांच में यह पारिवारिक रंजिश और चल रहे कानूनी विवाद का परिणाम लग रहा है।


कानून और समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी

यह घटना केवल एक हत्या नहीं, बल्कि समाज में महिलाओं की असुरक्षा, न्याय प्रक्रिया की जटिलता और घरेलू कलह की गंभीरता की ओर इशारा करती है। एक महिला जिसने अपने बच्चों के लिए जीने का फैसला लिया, वह अपने ही अधिकारों के लिए लड़ते हुए अपनी जान गंवा बैठी।


मंजू की हत्या ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि महिलाओं की सुरक्षा और पारिवारिक न्याय प्रणाली को लेकर हमारे समाज में अभी बहुत काम बाकी है। सवाल यह नहीं कि किसने मारा, सवाल यह है कि एक महिला को कोर्ट से लौटते हुए क्यों गोलियों से भूना गया? और क्या अब इन मासूम बच्चों को इंसाफ मिलेगा?

News-Desk

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