Vikramshila Express में बम की फर्जी सूचना देने वाला गिरफ्तार! “मज़े के लिए फोन किया था…” — जीआरपी ने दिल्ली के मोनू को इटावा से दबोचा💥
Vikramshila Express ट्रेन में आतंकवादी और बम होने की झूठी सूचना देने वाले युवक को जीआरपी (Government Railway Police) ने देर रात इटावा से गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी की पहचान पश्चिमी दिल्ली निवासी मोनू उर्फ रामनरेश के रूप में हुई है। पूछताछ में उसने चौकाने वाला खुलासा किया — उसने यह सब “सिर्फ मज़े के लिए” किया था!
कैसे दी गई फर्जी बम की सूचना?
जीआरपी अधिकारियों के अनुसार, मोनू ने अपने मोबाइल फोन से सीधे जीआरपी इटावा थाने के नंबर पर कॉल किया और बताया कि विक्रमशिला एक्सप्रेस में बम और आतंकी मौजूद हैं। कॉल मिलते ही रेलवे प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मच गया।
ट्रेन को रोककर तलाशी ली गई, यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई, और कई घंटों तक रूट पर अफरा-तफरी का माहौल रहा।
लेकिन जांच के दौरान जब कॉल ट्रेस की गई, तो सारा मामला फर्जी निकला। और फिर शुरू हुआ आरोपी की तलाश का मिशन।
जीआरपी की चपल कार्रवाई — इटावा में हुई गिरफ्तारी
जीआरपी के प्रभारी निरीक्षक संदीप तोमर ने बताया कि कॉल की लोकेशन ट्रेस करने पर मोनू की मौजूदगी इटावा के भरथना इलाके में पाई गई।
इसके बाद जीआरपी की टीम ने घेराबंदी कर उसे देर रात गिरफ्तार कर लिया।
उसका मोबाइल फोन बरामद कर लिया गया है, जिससे यह फर्जी कॉल की गई थी।
प्रभारी निरीक्षक ने बताया कि, “आरोपी ने पूछताछ में बताया कि उसने केवल मजे के लिए ऐसा किया। उसे लगा कि ट्रेन रुकेगी, लोग घबराएँगे, और उसे आनंद मिलेगा। उसे अंदाज़ा नहीं था कि वह इतनी जल्दी पकड़ा जाएगा।”
कौन है मोनू उर्फ रामनरेश?
आरोपी मोनू उर्फ रामनरेश, उम्र करीब 26 वर्ष, निवासी एच-22, जेजे कॉलोनी, घेबरा, पश्चिम दिल्ली है।
वह कुछ समय पहले एक कपड़े की दुकान पर काम करता था, बाद में एक कोचिंग सेंटर में नौकरी की।
पुलिस का कहना है कि वह अक्सर मोबाइल से इधर-उधर रैंडम कॉल्स करता रहता था, उसी दौरान उसने जीआरपी थाने का नंबर डायल कर दिया।
मोनू का ‘मज़ाक’ बना रेलवे की सुरक्षा के लिए चुनौती
पूछताछ में मोनू ने बताया कि उसे यह नहीं पता था कि साइबर ट्रेसिंग इतनी तेज़ी से होती है।
वह पहले थाने के नंबर पर मिस कॉल करता रहा, और फिर बोरियत में उसने “बम की सूचना” देने की शरारत कर दी।
उसका कहना था कि वह बस यह देखना चाहता था कि “अगर सच में बम की खबर दी जाए तो क्या होता है!”
लेकिन इस “मज़े” ने अब उसे गंभीर कानूनी मुसीबत में डाल दिया है।
रेलवे में मचा हड़कंप, यात्रियों में फैली दहशत
फोन कॉल के बाद जैसे ही खबर फैली, विक्रमशिला एक्सप्रेस को तत्काल रोक दिया गया।
रेलवे सुरक्षा बल (RPF), जीआरपी और स्थानीय पुलिस ने संयुक्त तलाशी अभियान चलाया।
कई बोगियों को चेक किया गया, यात्रियों से पूछताछ की गई।
करीब दो घंटे तक ट्रेन स्टेशन पर खड़ी रही।
किसी भी विस्फोटक या संदिग्ध वस्तु का पता नहीं चला, जिसके बाद ट्रेन को रवाना किया गया।
यात्रियों ने बताया कि अचानक अफरा-तफरी का माहौल बन गया था — बच्चे रोने लगे, महिलाएं डर गईं और कई लोग स्टेशन परिसर में भागने लगे।
कानूनी शिकंजा कस गया – मिलेगी कठोर सजा
फर्जी बम कॉल करने पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 182, 505, 506 और रेलवे अधिनियम की धारा 150, 151 के तहत मामला दर्ज किया गया है।
अगर आरोप साबित होता है तो आरोपी को सात साल तक की सजा और भारी जुर्माना दोनों हो सकते हैं।
जीआरपी अधिकारी ने बताया कि “ऐसे मामलों में मजाक के लिए दी गई सूचना भी आतंक फैलाने की श्रेणी में आती है। यह रेलवे की सुरक्षा से खिलवाड़ है, जिसे किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
बढ़ते फर्जी कॉल्स से परेशान सुरक्षा एजेंसियां
पिछले कुछ महीनों में रेलवे पुलिस को फर्जी बम कॉल्स की शिकायतें बढ़ी हैं।
केवल उत्तर प्रदेश, दिल्ली, बिहार और मध्य प्रदेश के रूटों पर ही पिछले 6 महीनों में 14 से अधिक फर्जी कॉल्स दर्ज की गई हैं।
ऐसे कॉल्स न केवल यात्रियों में डर पैदा करते हैं, बल्कि ट्रेनों की समयबद्धता, स्टेशन संचालन और सुरक्षा व्यवस्थाओं को भी बुरी तरह प्रभावित करते हैं।
सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि अब ऐसे मामलों में “Zero Tolerance Policy” अपनाई जाएगी।
रेलवे सुरक्षा बल ने दी चेतावनी
आरपीएफ और जीआरपी ने संयुक्त बयान में कहा है कि कोई भी व्यक्ति अगर रेलवे या सार्वजनिक परिवहन से जुड़ी फर्जी सूचना देता है, तो उसे आतंकी गतिविधि के समान अपराध माना जाएगा।
पुलिस विभाग ने आम जनता से अपील की है कि “ऐसे किसी भी मामले में सूचना देने से पहले जिम्मेदारी निभाएं। झूठी जानकारी पूरे सिस्टम को अस्त-व्यस्त कर देती है।”
साइबर ट्रेसिंग ने कैसे किया काम?
साइबर टीम ने आरोपी के IMEI नंबर और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) को ट्रेस किया।
फोन की लोकेशन लगातार बदल रही थी, लेकिन जैसे ही वह भरथना रेलवे स्टेशन के पास ठहरा, जीआरपी टीम ने तुरंत कार्रवाई की और उसे गिरफ्तार कर लिया।
आरोपी ने गिरफ्तारी के बाद कहा —
“मुझे लगा कि मेरा फोन किसी को ट्रेस नहीं करेगा, मैंने तो सिर्फ टाइम पास के लिए किया था।”
जनता में गुस्सा – ‘मज़े के लिए’ क्यों उड़ाई सुरक्षा की खिल्ली?
इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने आरोपी की हरकत की कड़ी निंदा की है।
ट्विटर और फेसबुक पर कई यूज़र्स ने लिखा कि “ऐसे लोगों को सख्त से सख्त सज़ा मिलनी चाहिए, ताकि कोई और इस तरह का मज़ाक न करे।”
रेलवे यात्रियों ने कहा कि अगर ट्रेन में वास्तव में कोई खतरा होता, तो ये कॉल कितनी बड़ी दिक्कत बन सकती थी — “सुरक्षा कोई मज़ाक नहीं है।”
जीआरपी ने किया अलर्ट जारी – अब होगा सख्त एक्शन
जीआरपी ने सभी डिवीजनों को अलर्ट जारी कर दिया है कि आने वाले दिनों में ट्रेनों की सुरक्षा जांच और कॉल वेरीफिकेशन प्रोसेस को और मजबूत किया जाएगा।
हर संदिग्ध कॉल की डिजिटल वॉच रखी जाएगी और ऐसे मामलों में तुरंत कार्रवाई होगी।
आरोपी से मिली जानकारी के आधार पर आगे की जांच जारी
जीआरपी ने बताया कि मोनू से उसके संपर्कों, मोबाइल डेटा और सोशल मीडिया गतिविधियों की जांच की जा रही है। अब यह देखा जाएगा कि कहीं उसके पीछे कोई गैंग या अन्य व्यक्ति तो नहीं है जो मज़ाक के नाम पर रेलवे सुरक्षा के साथ खिलवाड़ कर रहा हो।फिलहाल आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेजा गया है और उसके खिलाफ विस्तृत चार्जशीट तैयार की जा रही है।

