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Farmer Protest: सड़क और रेलवे ट्रैक जाम कर विरोध प्रदर्शन किया

दिल्ली की सीमा पर चल रहे Farmer Protest के 10 महीने पूरे होने पर सोमवार को भारत बंद का आयोजन किया गया। इस दौरान देश के अलग अलग हिस्सों में किसानों ने सड़क और रेलवे ट्रैक जाम कर विरोध प्रदर्शन किया। इसी मुद्दे पर टीवी डिबेट के दौरान जब एंकर ने कांग्रेस प्रवक्ता से सवाल पूछा कि अगर बीजेपी आगामी उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनाव जीतती है तो क्या ये आंदोलन बेमतलब हो जाएंगे। तो इसके जवाब में कांग्रेस प्रवक्ता ने पश्चिम बंगाल का उदाहरण देते हुए कहा कि अगर भाजपा पश्चिम बंगाल चुनाव हार जाती तो क्या आप यह मानते कि बीजेपी साफ़ हो गई।

दरअसल टीवी चैनल न्यूज 24 पर आयोजित टीवी डिबेट के दौरान एंकर मानक गुप्ता ने कांग्रेस प्रवक्ता डॉ अजय कुमार से सवाल पूछते हुए कहा कि आपने भारत बंद का समर्थन किया है। अगर भाजपा दोबारा से उत्तरप्रदेश की सत्ता में वापसी करती है तो क्या आप ये मान लेंगे कि ये भारत बंद, किसान आंदोलन और कृषि कानून सब पर बीजेपी सही थी और आप गलत थे। 

इसपर जवाब देते हुए कांग्रेस प्रवक्ता डॉ अजय कुमार ने कहा कि भाजपा का कुल वोट शेयर 33% रहा है इसका मतलब है कि 65%से ज्यादा जनता ने उनको नकारा है लेकिन फिर भी आप कह रहे हैं कि वो राजा हैं। आगे डॉ अजय कुमार ने कहा कि जब हाथरस में महिला का बलात्कार होता है, सड़क पर लोग आते हैं और बीजेपी इसके बावजूद चुनाव जीत जाती है। तो आप क्या कहेंगे कि बलात्कार मायने नहीं रखता है और बीजेपी ने हाथरस में ठीक किया है।

इसके बाद जब एंकर ने दोबारा उनसे सवाल पूछा कि आप कहते हैं कि बीजेपी को सिर्फ 33% वोट मिला लेकिन उसमें भी तो यह पता चलता है कि कितने किसानों ने भाजपा को वोट दिया। इसपर कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि भाजपा बंगाल में चुनाव हार गई या वो अगर पंजाब में चुनाव हार जाती है। तो आप क्या मानेंगे बीजेपी साफ़ हो गई या बीजेपी सरकार के सभी फैसले गलत हैं। अगर भाजपा पंजाब हार जाती है तो क्या पंजाब से जुड़े सभी फैसले गलत हैं। इस तरह की परिभाषा राजनीति में नहीं होती है। बल्कि चुनाव में मुद्दों पर ध्यान दिया जाता है।             

सोमवार को बुलाए गए भारत बंद का व्यापक प्रभाव देखने को मिला। पंजाब, हरियाणा, यूपी, बिहार और कर्नाटक समेत कई राज्यों में किसानों ने सड़क और रेलवे ट्रैक जाम कर प्रदर्शन किया। भारत बंद की वजह से कई ट्रेनों को रद्द कर दिया गया। कई विपक्षी दलों ने भी इस बंद का समर्थन किया। संयुक्त किसान मोर्चा ने बंद को सफल बताते हुए कहा कि मोदी सरकार द्वारा लागू की जा रही नीतियों, बुनियादी स्वतंत्रता और लोकतंत्र पर अंकुश लगाने एवं अधिकांश नागरिकों के जीवन यापन को खतरे में डालने से पूरे देश में गुस्सा और हताशा थी। साथ ही उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट है कि भारतवासी किसानों की जायज मांगों और कई क्षेत्रों में जनविरोधी नीतियों के विरोध में मोदी सरकार के अड़ियल, अनुचित और अहंकारी रुख से त्रस्त हो चुके हैं।

गौरतलब है कि दिल्ली की सीमा पर चल रहे किसान आंदोलन को लगभग 10 महीने का समय हो चुका है। इतने दिन बीत जाने के बावजूद अभी तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है। जनवरी महीने के बाद से ही किसान संगठनों और केंद्र सरकार के बीच कोई बातचीत नहीं हुई है।

News Desk

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