बंपर फसल से मालामाल किसानः Muzaffarnagar सहित बिजनौर, शामली, सहारनपुर में किसानों ने पिछले सालों से ज्यादा उगाया गन्ना
मुजफ्फरनगर।(Muzaffarnagar) पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मुजफ्फरनगर सहित कई जिलों का गन्ना किसान इस बार मालामाल है। किसानों ने गन्ना रकबा तो बढ़ाया ही लेकिन औसत उपज में भी इजाफा हुआ। हालात ये हैं कि गन्ना विभाग ने गत वर्षों के आधार पर उत्पादन जो आंकलन किया खेतों में उससे कहीं अधिक गन्ना खड़ा है।
बढ़े गन्ना उत्पादन से आय का आंकलन किया जा सकता है। गन्ने के हिसाब से देखें तो जिले के किसानों की झोली में इस बार ६०० करोड़, शामली के ४५ तथा सहारनपुर के ४४५ और बिजनौर के किसानों की झोली में ८०० करोड़ रुपया अधिक पहुंचेगा। इन जिलों में गन्ने की औसत उपज में भी इजाफा हुआ है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश की खुशहाली गन्ना उत्पादन-पश्चिमी उत्तर प्रदेश की उपजाऊ माटी तथा सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता और अनुकूल मौसम खेती किसानों के लिए वरदान है। गंगा-जमुना जैसी सदानीरा नदियों के बीच बसा मुजफ्फरनगर विशेष तौर से गन्ना उत्पादन के लिए अहम माना जाता है। पड़ोसी जिलों शामली, बिजनौर, सहारनपुर में भी गन्ना की भरपूर फसल ली जाती है। यही इस क्षेत्र के किसानों की आर्थिक खुशहाली का राज भी है।
मुजफ्फरनगर सहित पड़ोसी चार जिलों में इस बार पिछले साल की तुलना में गन्ना उत्पादन अधिक हुआ है। किसानों ने गन्ना रकबा तो बढ़ाया ही लेकिन प्रकृति ने भी गन्ने की औसत उपज में बढ़ोतरी कर किसानों को सौगात दी। जिले की ८ चीनी मिलों तथा करीब २००० कोल्हुओं में गन्ने की पेराई चालू है।मुजफ्फरनगर सहित शामली, सहारनपुर तथा बिजनौर में हुए गन्ना उत्पादन का आंकलन करने पर यह साबित होता है।
केस-१, मुजफ्फरनगर में बढा१९३ लाख क्विंटल गन्ना
इस बार मुजफ्फरनगर में १६०८.३० लाख कुंतल गन्ना उत्पादन हुआ है। जो गत वर्ष के मुकाबले १९३ लाख कुंतल अधिक है। गत वर्ष २०२०-२१ में जिले में गन्ना उत्पादन १४१५ लाख तथा उससे एक वर्ष पूर्व १४६४ लाख कुंतल था। मौजूदा सत्र में अधिकतर गन्ना चीनी मिलों तथा अन्य इकाईयों में पैराई के लिए जा चुका है।
आंकलन से अधिक गन्ना उत्पादन होने के कारण किसानों को बेसिक कोटा समाप्त हो चुका है।गन्ना उत्पादन बढ़ने के कारण जिले के किसानों की झोली में करीब ६७५ करोड़ रुपया अतिरिक्त आएगा। गन्ना मूल्य के रूप में इस वर्ष जिले के किसानों को करीब २४०० करोड़ का भुगतान चीनी मिलों की ओर से किया जा चुका है, जबकि करीब ४६४ करोड़ का भुगतान शेष है।
केस-२, शामली में भी इस वर्ष बढा गन्ना उत्पादन
गंगा व यमुना नदियों के पानी से सिंचित होने वाला क्षेत्र शामली गन्ना उत्पादन के मामले में भी काफी आगे माना जाता है। २०१९-२० में शामली जनपद में गन्ने का उत्पादन ५३० लाख क्विंटल हुआ जबकि २०२०-२१ में उत्पादन ५४९ कुंतल पर पहुंच गया। लेकिन इस बार उत्पादन में फिर इजाफा हुआ। वर्ष २०२१-२२ में शामली में गन्ना उत्पादन ५६३ लाख क्विंटल पर पहुंच गया।
केस-३, सहारनपुर में ९७९ लाख कुंतल पर हुआ गन्ना
इस बार सहारनपुर में भी गन्ना उत्पादन का ग्राफ बढा है। आम तौर से सहारनपुर चावल उत्पादन में काफी अग्रणी माना जाता है। आंकड़ों में सहारनपुर में गन्ना उत्पादन इस बार ९७९ लाख क्विंटल हुआ। जो गत वर्ष की तुलना में १२७ लाख क्विंटल अधिक है। पिछले साल जिले में ८५२ लाख तथा उससे एक साल पहले ७७४ लाख कुंतल गन्ने का उत्पादन हुआ था। औसत उपज के मामले में भी सहारनपुर का किसान काफी भाग्यशाली रहा। यहां इस बार ८१२ क्विंटल प्रति हेक्टेयर औसत उपज रही।
केस-४, बढ़े गन्ना उत्पादन से बिजनौर में अतिरिक्त खुशहाली
जिला बिजनौर गन्ना रकबे के मामले में काफी अग्रणी है। बिजनौर में इस बार २३२४७८ हेक्टेयर भूमि में गन्ने का उत्पादन किया गया। औसत उपज में तो गन्ना किसान पिछले साल की तुलना में आगे रहा ही कुल गन्ना उत्पादन भी गत दो सालों से अधिक दर्ज किया गया। पिछले साल बिजनौर में १९६३ लाख कुंतल गन्ने का उत्पादन हुआ था। जबकि इस वर्ष उत्पादन २०२१९ लाख क्विंटल है। जो की पिछले साल की तुलना में २५६ लाख क्विंटल अधिक है। जबकि २०१९-२० में गन्ना उत्पादन १९४८ लाख क्विंटल था।
उत्कृष्ट बीज एवं रोग पर अंकुश से बढ़ा गन्ना उत्पादन
जिला गन्ना अधिकारी डा. आरडी द्विवेदी कहते हैं कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में बंपर गन्ना फसल होने के कुछ खास कारण हैं। इस क्षेत्र में गन्ना बीज की किस्म सीओ ०२३८, सीओ ०११८ सहित नई प्रजाति सीओएस १३२३५, सीओएलके १४२०१ आदि ने उत्पादन के मामले में क्रांति ला दी है।
इन प्रजातियो के बीज से तुलनात्मक रूप से गन्ना उत्पादन में आशातीत वृद्धि हुई है। जबकि गन्ना खेती की तकनीकि में परिवर्तन ने भी किसानों को सौगात दी है।
वर्तमान में अधिकतर प्रगतिशील किसानों ने गन्ना फसल बोते समय पौधे से पौधे की लाइन के बीच ४-५ फिट का फासला रखा। जिससे गन्ने की फसल को हवा, पानी की उपलब्धता बढ़ी और उत्पादन में उसका लाभ मिला।
जिला गन्ना अधिकारी ने बताया कि अधिकतर फसल इस बार रोग से दूर रही। पूरब के जिलों में लाल सड़न जैसे रोगों ने गन्ने को नुकसान पहुंचाया। गत दो वर्षों के दौरान गन्ने पर कीट का प्रकोप तथा अन्य बीमारियों का हमला कम हुआ।

