Holi 2026: 02 मार्च को फाल्गुनी पूर्णिमा, भद्रा में होलिका दहन का विशेष मुहूर्त
Religious Desk
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Bhadra Kaal, Falgun Purnima, Hindu festival news, Holi 2026, Holika Dahan Muhurat, Pandit Vinay Sharma, Rangwali Holi 2026, Religious NewsHoli 2026 Date and Holika Dahan Muhurat को लेकर इस बार विशेष ज्योतिषीय चर्चा हो रही है। पंडित विनय शर्मा के अनुसार वर्ष 2026 में होली का पावन पर्व 02 मार्च, दिन सोमवार को मनाया जाएगा। इस दिन फाल्गुनी पूर्णिमा सायं 5 बजकर 56 मिनट से प्रारंभ होकर 3 मार्च 2026 को सायं 5 बजकर 7 मिनट तक रहेगी। शास्त्रों के अनुसार होलिका दहन फाल्गुनी पूर्णिमा में ही किया जाता है, किंतु इस बार पूर्णिमा लगते ही भद्रा का साया रहेगा।
🔴 Holi 2026 Date and Holika Dahan Muhurat: भद्रा का विशेष प्रभाव
2 मार्च 2026 को सायं 5:56 बजे से भद्रा प्रारंभ होकर 3 मार्च 2026 को प्रातः 5:28 बजे तक रहेगी। ज्योतिष शास्त्रों में भद्रा को सूर्यदेव की पुत्री और शनिदेव की बहन बताया गया है, जिनका स्वभाव उग्र माना जाता है। भद्रा काल में शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं, इसलिए होलिका दहन के समय को लेकर विशेष सावधानी आवश्यक है।
पंडित विनय शर्मा के अनुसार 2 मार्च 2026 को प्रातः 9 बजे से दोपहर 12:24 बजे के बीच होलिका पूजन करना अत्यंत फलदायी रहेगा। वहीं, होलिका दहन का श्रेष्ठ समय रात्रि 12:50 बजे से 2:00 बजे के मध्य ‘भद्रापूच्छ काल’ में रहेगा। इस समय किया गया होलिका दहन शुभ, लाभकारी और मनोकामना पूर्ण करने वाला माना गया है।
🔴 होली 2026 का धार्मिक महत्व
Holi 2026 Date and Holika Dahan Muhurat केवल एक तिथि नहीं, बल्कि आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व से जुड़ा अवसर है। होली का संबंध भक्त प्रह्लाद और हिरण्यकश्यप की कथा से जोड़ा जाता है, जिसमें सत्य और भक्ति की विजय का संदेश निहित है। इसी दिन भगवान शिव द्वारा कामदेव दहन की कथा भी प्रचलित है, जिससे इसे ‘काम दहन’ के रूप में भी देखा जाता है।
यह पर्व सामाजिक समरसता, आपसी प्रेम और बुराइयों के अंत का प्रतीक है। तांत्रिक साधना के लिए भी फाल्गुनी पूर्णिमा को विशेष महत्व दिया गया है।
🔴 होला परंपरा और स्वास्थ्य से जुड़ी मान्यताएं
Holi 2026 Date and Holika Dahan Muhurat के अवसर पर ग्रामीण क्षेत्रों में खेतों से नई गेहूं की बालियां लाकर होलिका की अग्नि में भूनी जाती हैं। इन दानों को ‘होला’ कहा जाता है, जिन्हें प्रसाद स्वरूप बांटकर खाया जाता है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार जलती होली की परिक्रमा करने से शरीर में लगभग 140 फॉरेनहाइट तक गर्मी प्रवेश करती है, जिससे शरीर के रोगकारक जीवाणु नष्ट होते हैं। इसे स्वास्थ्यवर्धक और शुद्धिकरण की प्रक्रिया माना गया है।
🔴 पितृ शांति और उपाय
Holi 2026 Date and Holika Dahan Muhurat के अवसर पर पितृ शांति और रोग-शोक निवारण के लिए विशेष उपाय भी बताए गए हैं। पंडित विनय शर्मा के अनुसार सूखे तेल वाले गोले में तिल भरकर उसे कलावा बांधकर नदी में प्रवाहित करना शुभ माना जाता है। इसके साथ चांदी का सर्प दान करने की परंपरा भी वर्णित है। इन उपायों को श्रद्धा और नियमपूर्वक करने की सलाह दी गई है।
🔴 रंगों की होली कब?
रंगों की होली 4 मार्च 2026 को खेली जाएगी। Holi 2026 Date and Holika Dahan Muhurat के अनुसार पहले दिन होलिका दहन और अगले दिन रंगोत्सव का उल्लास पूरे देश में देखने को मिलेगा।

