संपादकीय विशेष

महाराष्ट्र में राजनीति और समाज पर प्रभाव: Vanchit Bahujan Aaghadi का चुनाव परिणाम

लोकसभा चुनाव 2024 में वंचित बहुजन आघाड़ी (Vanchit Bahujan Aaghadi) के प्रदर्शन ने महाराष्ट्र में राजनीतिक परिदृश्य को बदल कर रख दिया है। प्रकाश आंबेडकर की अगुवाई वाली इस पार्टी ने भले ही कोई सीट नहीं जीती, लेकिन उनके प्रभाव ने कई निर्वाचन क्षेत्रों के नतीजों को प्रभावित किया। यह घटना केवल एक राजनीतिक गतिविधि नहीं, बल्कि समाज और राजनीति पर गहरा प्रभाव छोड़ने वाला मामला है।

लोकसभा चुनाव में वीबीए का मुख्य मुद्दा महाविकास आघाड़ी (एमवीए) के साथ गठबंधन का असफल प्रयास था। अगर वीबीए ने एमवीए के साथ गठबंधन किया होता, तो कई निर्वाचन क्षेत्रों में विपक्षी गठबंधन के पक्ष में नतीजे आ सकते थे। इस बात का एक स्पष्ट उदाहरण मुंबई उत्तर-पश्चिम की सीट है, जहां शिवसेना (यूबीटी) उम्मीदवार सिर्फ 48 मतों से हार गए। इस प्रकार, वीबीए की रणनीति ने न केवल उनकी स्वयं की हार को सुनिश्चित किया, बल्कि अन्य दलों की भी स्थिति कमजोर कर दी।

वंचित बहुजन आघाड़ी (Vanchit Bahujan Aaghadi) ने राज्य की 48 लोकसभा सीट में से अधिकांश पर अपने उम्मीदवार उतारे या उम्मीदवारों का समर्थन किया. डॉ बीआर आंबेडकर के पोते प्रकाश आंबेडकर ने अकोला सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा. सत्तर-वर्षीय दलित नेता ने अतीत में दो बार लोकसभा में अकोला का प्रतिनिधित्व किया है. इस बार वीबीए नेता के मैदान में उतरने से अकोला में मुकाबला त्रिकोणीय हो गया. भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार अनूप धोत्रे और कांग्रेस के उम्मीदवार अभय काशीनाथ पाटिल विदर्भ क्षेत्र की इस सीट पर दो अन्य प्रमुख प्रतिद्वंद्वी थे. धोत्रे ने 4,57,030 वोट हासिल करके जीत दर्ज की. उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी पाटिल को 4,16,404 वोट मिले, जबकि आंबेडकर 2,76,747 मतों के साथ तीसरे स्थान पर रहे, जिसने अंतिम परिणाम को प्रभावित किया.

औरंगाबाद (छत्रपति संभाजीनगर) में शिवसेना उम्मीदवार संदीपनराव भुमरे ने 1,34,650 वोटों के अंतर से जीत हासिल की. ​​उन्हें 4,76,130 वोट मिले, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी और मौजूदा सांसद ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के इम्तियाज जलील को 3,41,480 वोट मिले. वर्ष 2019 में वीबीए ने एआईएमआईएम के साथ गठबंधन किया था, जिसके कारण जलील को औरंगाबाद सीट पर मामूली अंतर से जीत मिली थी. हालांकि, इस बार वीबीए ने अपने उम्मीदवार अफसर खान यासीन को उतारा, जिन्हें 69,266 वोट मिले. हालांकि, इससे मौजूदा चुनाव के नतीजों पर बहुत अधिक प्रभाव नहीं पड़ा. बीड में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के उम्मीदवार बजरंग सोनवणे ने अपनी निकटतम प्रतिद्वंद्वी भाजपा उम्मीदवार पंकजा मुंडे को 6,553 मतों के अंतर से हराया. चौथे स्थान पर रहे वीबीए उम्मीदवार अशोक हिंगे को 50,867 मत मिले.

वीबीए की भागीदारी ने महाराष्ट्र के राजनीतिक परिदृश्य को जटिल और विविध बना दिया है। यह दलित और वंचित समुदायों की आवाज़ को राजनीति में प्रमुखता से लाने का प्रयास करता है। हालांकि, उनकी असफलता से यह प्रश्न उठता है कि क्या समाज में अब भी इन वर्गों की समस्याओं को राजनीतिक मंच पर सही तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है।

वीबीए के प्रमुख प्रकाश आंबेडकर की हार और उनकी पार्टी के उम्मीदवारों का प्रदर्शन एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संदेश देता है। यह बताता है कि चुनावी राजनीति में केवल विचारधारा या समाज सेवा पर्याप्त नहीं होती, बल्कि राजनीतिक गठजोड़ और सामरिक निर्णय भी महत्वपूर्ण होते हैं।

वंचित बहुजन आघाड़ी (Vanchit Bahujan Aaghadi)  की हार के बावजूद, यह सवाल उठता है कि क्या राजनीति में नैतिकता और सिद्धांतों का स्थान है। आंबेडकर जैसे नेता जो दलित और वंचित समुदायों के लिए संघर्ष करते हैं, क्या उन्हें गठबंधनों में समझौता करना चाहिए था? यह एक नैतिक प्रश्न है जो समाज और राजनीति के बीच के संतुलन को दर्शाता है।

वंचित बहुजन आघाड़ी (Vanchit Bahujan Aaghadi) की उपस्थिति ने न केवल चुनावी नतीजों को प्रभावित किया, बल्कि समाज में भी विभिन्न ध्रुवीकरण किए। दलित और वंचित वर्गों की आवाज़ को प्रमुखता देने का प्रयास उनके लिए सम्मानजनक है, लेकिन राजनीति में उनकी सफलता समाज के समर्थन पर निर्भर करती है।

वंचित बहुजन आघाड़ी का प्रदर्शन एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटना है जिसने महाराष्ट्र में राजनीति और समाज दोनों को प्रभावित किया है। यह दर्शाता है कि राजनीति में नैतिकता, सिद्धांत और सामरिक निर्णय का सही मिश्रण कितना महत्वपूर्ण होता है। भविष्य में, ऐसे दलों को समाज के व्यापक समर्थन की आवश्यकता होगी ताकि वे अपने उद्देश्य को प्राप्त कर सकें और समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला सकें।इस प्रकार, वंचित बहुजन आघाड़ी का प्रदर्शन केवल एक चुनावी परिणाम नहीं है, बल्कि समाज और राजनीति के परस्पर प्रभाव का प्रतीक है, जो हमारे लोकतंत्र की जटिलता और विविधता को दर्शाता है।

Dr. S.K. Agarwal

डॉ. एस.के. अग्रवाल न्यूज नेटवर्क के मैनेजिंग एडिटर हैं। वह मीडिया योजना, समाचार प्रचार और समन्वय सहित समग्र प्रबंधन के लिए जिम्मेदार है। उन्हें मीडिया, पत्रकारिता और इवेंट-मीडिया प्रबंधन के क्षेत्र में लगभग 3.5 दशकों से अधिक का व्यापक अनुभव है। वह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई प्रतिष्ठित समाचार पत्रों, चैनलों और पत्रिकाओं से जुड़े हुए हैं। संपर्क ई.मेल- [email protected]

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