Italy में ‘Femicides Law’ लागू: महिला होने की वजह से हत्या अब अलग अपराध, उम्रकैद तक की सजा—जूलिया चेकेटिन केस ने बदला कानून
रोम/Italy । महिलाओं के खिलाफ हिंसा को खत्म करने की दिशा में इटली ने ऐतिहासिक कदम उठाया है।
देश की संसद ने 25 नवंबर को एक नए कानून को मंजूरी दी, जिसके तहत यदि किसी महिला की हत्या केवल इसलिए की जाती है क्योंकि वह महिला है, तो यह अपराध ‘फेमीसाइड’ के रूप में दर्ज होगा और आरोपी को उम्रकैद तक की सजा दी जाएगी।
सरकार और विपक्ष दोनों ने इस विधेयक का समर्थन किया, जिसे महिलाओं की सुरक्षा के लिए एक बड़ा कानूनी बदलाव माना जा रहा है।
यूरोप में बढ़ते लैंगिक अपराधों के बीच इटली का यह फैसला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गया है।
जूलिया चेकेटिन की हत्या ने हिला दिया था इटली—22 वर्षीय छात्रा को एक्स बॉयफ्रेंड ने 70 बार चाकू मारा
दो साल पहले इटली में 22 वर्षीय छात्रा जूलिया चेकेटिन की हत्या ने पूरे देश में गुस्से की लहर पैदा कर दी थी।
उसका पूर्व प्रेमी उसे नियंत्रित करता था, पीछा करता था, और रिश्ता खत्म करने पर लगातार धमकियां देता था।
हत्या के दिन आरोपी ने—
जूलिया पर लगभग 70 बार चाकू से हमला किया,
और उसे निर्दयतापूर्वक मार डाला।
जूलिया ने मरने से पहले एक सूची लिखी थी जिसमें बताया था कि कैसे उसका एक्स बॉयफ्रेंड उसे नियंत्रित करता था—
बार-बार मैसेज करने का दबाव
दोस्तों से मिलने पर रोक
हर बात पर गुस्सा
मानसिक और भावनात्मक शोषण
इस मामले ने इटली ही नहीं, दुनिया भर को झकझोर दिया था।
इसी घटना के बाद Italy femicides law की मांग लगातार बढ़ी और आखिरकार यह कानून बनकर लागू हो गया।
फेमीसाइड क्या है? वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त एक गंभीर अपराध
फेमीसाइड वह अपराध है जिसमें किसी महिला या लड़की की हत्या इसलिए की जाती है क्योंकि वह “महिला” है।
यह लैंगिक भेदभाव, शक्ति के दुरुपयोग, नियंत्रण, हिंसा और पितृसत्तात्मक सोच से उपजा अपराध है।
दुनियाभर में इसका उपयोग—
महिलाओं की हत्या के पीछे छिपे लैंगिक कारणों को पहचानने के लिए
अपराधियों को कठोर सजा देने के लिए
और समाज में जागरूकता बढ़ाने के लिए किया जाता है
इटली अब मैक्सिको और चिली जैसे उन देशों की सूची में शामिल हो गया है जहां फेमीसाइड को कानूनी तौर पर अलग अपराध माना जाता है।
Italy femicides law: महिला होने की वजह से हत्या = उम्रकैद
इस नए कानून के तहत—
फेमीसाइड मामलों में उम्रकैद अनिवार्य सजा हो सकती है
जांच और ट्रायल की प्रक्रिया तेज और प्राथमिकता वाली होगी
पीड़िता के परिवार को विशेष संरक्षण मिलेगा
पुलिस को तुरंत कार्रवाई का अधिकार
सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य हत्या से पहले ही हिंसक व्यवहार को गंभीर अपराध की श्रेणी में लाना है, ताकि आरोपी शुरुआत से ही डरें और पीड़िताएं सुरक्षा महसूस कर सकें।
PM मेलोनी ने कहा—“मैं ऐसा इटली चाहती हूं जहां कोई महिला असुरक्षित न हो”
इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने कहा—
“मैं एक ऐसा देश बनाना चाहती हूं जहां कोई भी महिला खुद को असुरक्षित या अकेली महसूस न करे। यह कानून हमारी उस दिशा में पहल है।”
मेलऩी ने जूलिया चेकेटिन के परिवार से मुलाकात भी की थी और वादा किया था कि इटली महिलाओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देगा।
लेकिन क्या केवल कानून काफी है? एक्सपर्ट्स का जवाब—“नहीं!”
महिला अधिकार कार्यकर्ता एलेना बियाजियोनी ने स्पष्ट रूप से कहा कि—
कानून केवल हत्या के बाद की स्थिति पर केंद्रित है
जबकि जरूरत है हत्या होने से पहले रोकथाम की
स्कूलों में सेक्स एजुकेशन नहीं पढ़ाया जाता
समाज में रिश्तों में हिंसा को पहचानने की संस्कृति का अभाव है
उनका कहना है कि—
पुलिस
न्यायालय
और समाज
तीनों की सोच बदलना ज़रूरी है।
उनके अनुसार, Italy femicides law तब ही प्रभावी होगा जब शिक्षा और जागरूकता समानांतर रूप से आगे बढ़ेगी।
बिना सहमति के सेक्स = रेप? इटली में इस कानून पर भी जोरदार बहस
इटली की संसद में एक और प्रस्ताव पर चर्चा जारी है—
यदि महिला की सहमति नहीं है, तो कोई भी यौन संबंध सीधे रेप माना जाए।
कुछ राजनीतिक दल इसका विरोध कर रहे हैं, लेकिन महिलाओं के सुरक्षा अधिकारों के लिए यह चर्चा अत्यंत महत्वपूर्ण साबित हो रही है।
यह कानून आने वाले महीनों में इटली की यौन अपराध नीति को बदल सकता है।
क्यों बढ़ रही हैं ऐसी घटनाएं? विशेषज्ञ बताते हैं—“सिस्टम की कमजोरी, सामाजिक चुप्पी और पितृसत्ता”
इटली में बढ़ती हिंसा के पीछे प्रमुख कारण—
रिश्तों में पुरुषों का ‘कंट्रोल’ की मानसिकता
महिलाओं के निर्णयों का सम्मान न करना
शुरुआती हिंसा को गंभीरता से न लेना
पीड़िताओं के लिए सुरक्षा संसाधनों की कमी
और स्कूलों में जागरूकता की कमी
एलेना बियाजियोनी कहती हैं कि सरकार ने महिला सुरक्षा के बजट में बढ़ोतरी का दावा तो किया है लेकिन यह खर्च अभी भी ‘‘पर्याप्त नहीं’’ है और कई क्षेत्रों में ठीक से उपयोग भी नहीं किया जा रहा।

