जय जगन्नाथ के जयघोष से गूंजा Muzaffarnagar टंढेड़ा गांव, पारंपरिक रथयात्रा में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब
News-Desk
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जानसठ, टंढेड़ा, धार्मिक समाचार, भगवान जगन्नाथ, भंडारा, मुजफ्फरनगर समाचार, रथयात्रा, शोभायात्रा, श्री ज्ञानेश्वर सेवा दल, सनातन संस्कृतिMuzaffarnagar/जानसठ। क्षेत्र के टंढेड़ा गांव में वर्षों पुरानी धार्मिक परंपरा का निर्वहन करते हुए भगवान जगन्नाथ शोभायात्रा श्रद्धा, उत्साह और भक्तिभाव के वातावरण में निकाली गई। भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और माता सुभद्रा की सुसज्जित प्रतिमाओं को आकर्षक रथ पर विराजमान कर पूरे गांव में भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लेकर दर्शन किए। पूरे क्षेत्र में “जय जगन्नाथ”, “हरे कृष्णा-हरे राम” के जयघोष गूंजते रहे और वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया।
रथयात्रा के दौरान ग्रामीणों, महिलाओं, युवाओं और बच्चों में विशेष उत्साह देखने को मिला। श्रद्धालु पूरे मार्ग में भजन-कीर्तन, संकीर्तन और शंखनाद के बीच भगवान के जयकारे लगाते हुए आगे बढ़ते रहे।
वर्षों पुरानी परंपरा के अनुसार नंगे पांव खींचा गया रथ
टंढेड़ा गांव में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही आस्था और परंपरा का प्रतीक मानी जाती है। इसी परंपरा का पालन करते हुए श्रद्धालुओं ने नंगे पांव भगवान का रथ खींचकर अपनी भक्ति और समर्पण का परिचय दिया।
मान्यता है कि भगवान जगन्नाथ के रथ को श्रद्धापूर्वक खींचना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। इसी विश्वास के साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालु पूरे उत्साह और श्रद्धा से रथयात्रा में शामिल हुए।
भजन, संकीर्तन और जयघोष से भक्तिमय हुआ वातावरण
शोभायात्रा के दौरान जगह-जगह भजन मंडलियों ने भगवान के भक्ति गीत प्रस्तुत किए। शंखनाद, मृदंग, झांझ और अन्य वाद्ययंत्रों की मधुर ध्वनि के बीच श्रद्धालु नृत्य करते हुए भगवान के जयकारे लगाते रहे।
महिलाएं मंगल गीत गाती हुई शोभायात्रा के साथ चल रही थीं, जबकि युवा और बच्चे भी पूरे उत्साह के साथ धार्मिक आयोजन में सहभागी बने। पूरे गांव में भक्तिभाव, उल्लास और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनूठा संगम देखने को मिला।
पुष्पवर्षा, आरती और प्रसाद वितरण से हुआ भव्य स्वागत
रथयात्रा जिस-जिस मार्ग से होकर गुजरी, वहां श्रद्धालुओं और ग्रामीणों ने भगवान जगन्नाथ की आरती उतारकर उनका स्वागत किया। कई स्थानों पर श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर रथयात्रा का अभिनंदन किया तथा प्रसाद वितरण की व्यवस्था भी की गई।
ग्रामीणों ने अपने घरों के बाहर पूजा-अर्चना कर भगवान से परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और खुशहाली की कामना की। पूरे मार्ग पर धार्मिक आस्था और सामाजिक सहभागिता का सुंदर दृश्य देखने को मिला।
भारतीय संस्कृति और सामाजिक एकता का प्रतीक है भगवान जगन्नाथ शोभायात्रा
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं बार एसोसिएशन जानसठ के अध्यक्ष प्रमोद कुमार शर्मा ने कहा कि भगवान जगन्नाथ शोभायात्रा भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और सामाजिक समरसता का जीवंत प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजन समाज में प्रेम, भाईचारे और आध्यात्मिक चेतना को मजबूत करते हैं। समाज के सभी वर्गों की सहभागिता इस बात का प्रमाण है कि धार्मिक उत्सव केवल आस्था तक सीमित नहीं रहते, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक मूल्यों को भी सुदृढ़ करते हैं।
धार्मिक आयोजन समाज को देते हैं सेवा और संस्कार का संदेश
बार एसोसिएशन के महासचिव एवं श्री ज्ञानेश्वर सेवा दल के प्रबंधक दीपेश गुप्ता एडवोकेट ने कहा कि भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा जैसे आयोजन समाज को सत्य, सेवा, संस्कार और राष्ट्रभक्ति का संदेश देते हैं।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में ऐसे धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों की महत्ता और भी बढ़ जाती है, क्योंकि ये नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत और आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़ने का कार्य करते हैं।
विशाल भंडारे में हजारों श्रद्धालुओं ने ग्रहण किया प्रसाद
शोभायात्रा के सफल समापन के बाद विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। आयोजन समिति द्वारा भोजन और अन्य व्यवस्थाओं को सुव्यवस्थित ढंग से संचालित किया गया, जिसकी ग्रामीणों और श्रद्धालुओं ने सराहना की।
ग्रामीणों ने कहा कि इस प्रकार के धार्मिक आयोजन गांव में सामाजिक सौहार्द और पारस्परिक सहयोग की भावना को मजबूत करते हैं तथा आने वाली पीढ़ियों को अपनी सांस्कृतिक परंपराओं से जोड़ने का अवसर प्रदान करते हैं।
श्रद्धालुओं की रही उत्साहपूर्ण सहभागिता
इस धार्मिक आयोजन में मनीष प्रजापति एडवोकेट, सतीश कुमार गुर्जर, चौधरी संजीव कुमार, सोहित कंबोज एडवोकेट, बृजेश कुमार एडवोकेट, मनोज कुमार, राजेश सैनी सहित अनेक गणमान्य नागरिक एवं हजारों श्रद्धालु उपस्थित रहे।
पूरे आयोजन के दौरान अनुशासन, श्रद्धा और सामाजिक सौहार्द का वातावरण बना रहा। ग्रामीणों ने आयोजन समिति के सफल प्रबंधन की प्रशंसा करते हुए भविष्य में भी इसी प्रकार धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों को निरंतर आयोजित करने का संकल्प व्यक्त किया।

