उत्तर प्रदेश

कोरोना की भेंट चढ़ा महादेवा महोत्सव, अधिकारी कुछ भी कहने से कर रहे हैं इनकार,स्थानीय लोगों में रोष

रामनगर बाराबंकी।उत्तर भारत के सुप्रसिद्ध तीर्थ स्थल लोधेश्वर महादेवा में लगने वाला अगहनी मेला जिसे लोधेश्वर महादेवा महोत्सव के नाम से भी जाना जाता था,कोरोना की भेंट चढ़ गया।जिससे लोगो मे रोष व्याप्त है।

स्थानीय लोगो शिव भक्तों का कहना था कि महोत्सव को भले ही टाल दिया जाता। मगर तिथि के दिन पूजा पाठ कर परंपरागत उद्घाटन जरूर होना चाहिए था।

यह महादेवा महोत्सव कई वर्षों से हो रहा है। भले ही महादेवा महोत्सव को प्रशासनिक रूप कुछ सालों पहले ही दिया गया हो लेकिन अगहनी मेला काफी वर्षों से हो रहा है।

जो बहुत ही ज्यादा लोकप्रिय था। एक समय ऐसा था जब रामनगर क्षेत्र समेत दूर दराज के लोग इसी मेले में अपने रोजमर्रा की जरूरतों का सारा सामान खरीदते थे।

लेकिन कई सालों से इस मेले में भीड़ नहीं उमड़ रही थी। हां प्रशासन द्वारा इसे जब विस्तृत रूप दिया गया। तो यहां कई नामी-गिरामी फिल्मी सितारों से यहां की महफिल सजने लगी। लोधेश्वर महादेवा उत्तर भारत का सबसे बड़ा तीर्थ स्थल माना गया है। यहां अगहन मास के चतुर्दशी के दिन से मेला लगता था।

माना जाता है कि आन ही के दिन लोधेश्वर के खेत में भगवान भोलेनाथ प्रकट हुए थे। और इसी मास में इसी दिन उनका प्रकटत्सव मनाया जाता था। जो काफी विधि विधान से प्रशासनिक स्तर पर होता था।इसके बाद 7 दिन का महादेवा महोत्सव होता था। जिसमें नामी-गिरामी फिल्मी सितारे, नामी-गिरामी कवि आते थे।

यही नहीं क्षेत्रीय प्रतिभाओं को भी अपनी कला दिखाने का इस मंच से मौका मिलता था। कुश्ती से लेकर कबड्डी समेत तमाम खेल प्रतियोगिताएं भी होती थी।

लेकिन अब की बार नहीं हो सकी।कोरोना काल के चलते महादेवा महोत्सव को डालना तो लोगों की समझ में आ रहा है।लेकिन तिथि के दिन पूजा अर्चना ना करना भक्तों की समझ से परे है।

स्थानीय शिव भक्तों का कहना था कि जिलाधिकारी आकर तिथि के दिन महादेवा में लोधेश्वर महादेव शिवलिंग की पूजा अर्चना कर सकते थे।लेकिन उन्होंने ऐसा करना भी उचित नहीं समझा यह परंपरा बहुत दिनों बाद टूटी है।

इसके पहले पिछले बार भी अयोध्या में राम मंदिर का जो फैसला आया था। तो उस समय भी संवेदनशीलता देखते महोत्सव महोत्सव की डेट को बढ़ाकर फरवरी में कर दिया गया था

लेकिन उद्घाटन उसी तिथि को जिलाधिकारी द्वारा किया गया था। इस बार पूजा पाठ न करने से परंपरा टूटी है। जिससे स्थानीय भक्तों में नाराजगी व्याप्त है।

इस संदर्भ में उप जिलाधिकारी ने कहा गया कि कोरोना के चलते आयोजन नहीं हो सका। वही मंदिर पुजारी व रिसीवर का कहना है कि हमने तिथि पर पूजा अर्चना करके भगवान का प्रकट उत्सव मनाया है बाकी महादेवा महोत्सव होना है या नहीं या प्रशासन जाने।

News Desk

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