उत्तर प्रदेश

Meerut में दिल दहला देने वाली वारदात: मां के पास सो रहे डेढ़ साल के मासूम को कुत्तों के झुंड ने 100 मीटर दूर घसीटा, नोच-नोचकर मार डाला—बेगमपुल में हड़कंप

Meerut में रविवार देर रात एक ऐसी दर्दनाक घटना सामने आई जिसने पूरे शहर को सदमे में डाल दिया। बेगमपुल चौकी के सामने डिवाइडर पर सो रहे खानाबदोश परिवार के डेढ़ वर्षीय मासूम सीते को आवारा कुत्तों के झुंड ने मां के पास से खींचकर 100 मीटर दूर ले जाकर नोच-नोचकर मार डाला
घटना इतनी भयावह थी कि मौके पर चीख-पुकार मच गई और परिजनों की बेबसी देखने वालों के रोंगटे खड़े हो गए।


पंजाब से मेरठ आई थी मां—अपने माता-पिता से मिलने, लेकिन बन गई दहला देने वाली खबर की पीड़िता

पंजाब में रहने वाली गंगोत्री, अपने डेढ़ साल के बेटे सीते के साथ रविवार सुबह ही मेरठ आई थी।
परिवार खानाबदोश है और बेगमपुल के डिवाइडर पर ही कूड़े बीनकर और अस्थाई झोपड़ी डालकर जीवन बिताता है।

उस रात—

  • पूरा परिवार खाना खाकर रोज़ की तरह वहीं डिवाइडर पर सो गया

  • गंगोत्री अपने इकलौते बच्चे को सीने से लगाए गहरी नींद में थी

  • आसपास आवारा कुत्तों की गतिविधियां सामान्य लग रही थीं

लेकिन कुछ ही घंटों में यह सामान्य रात एक भयावह दुःस्वप्न बन गई।


10 बजे रात गंगोत्री की नींद खुली—बच्चा गायब, परिवार की हालत खराब

गंगा (गंगोत्री की मां) ने बताया कि रात के लगभग 10 बजे गंगोत्री की नींद खुली तो उसने अपने बेटे को गोद में नहीं पाया।
पहले परिवार ने आसपास तलाश की, लेकिन बच्चे का कहीं अता-पता नहीं मिला।
कुछ ही मिनटों बाद, 100 मीटर दूर सड़क के किनारे कुत्तों का झुंड किसी चीज़ पर झुका हुआ दिखाई दिया— और पास पहुंचकर जिस दृश्य ने परिजनों को तोड़ दिया वो किसी भी मां-बाप के लिए असहनीय था।

सीते खून से लथपथ था, कुत्ते उसे नोच रहे थे।


डरावना दृश्य—परिजनों ने लाठी-डंडों से कुत्तों को भगाया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी

परिजनों ने चीखते हुए लाठी-डंडों से कुत्तों को भगाया और बच्चे को छुड़ाया।
लेकिन तब तक—

  • उसके पेट को कुत्तों ने बुरी तरह फाड़ दिया था

  • आंखों को नुकसान पहुंचाया गया था

  • पूरा शरीर खून से भीगा था

परिजनों ने किसी तरह मासूम को उठाया और जिला अस्पताल की ओर दौड़ पड़े।


अस्पताल में आधे घंटे तक चला उपचार—डॉक्टरों ने बचाने की कोशिश की, पर मासूम नहीं बच सका

डॉ. लॉरेंस वर्मा (पीएल शर्मा जिला अस्पताल) ने बताया—

“रात करीब 11 बजे बच्चे को गंभीर हालत में लाया गया। उसकी आंख और पेट को कुत्तों ने बुरी तरह नोचा था। हमने एंटी-रेबीज़ इंजेक्शन दिया और तुरंत इलाज शुरू किया, लेकिन चोटें इतनी गंभीर थीं कि आधे घंटे बाद ही बच्चा दम तोड़ गया।”

मां गंगोत्री का रो-रोकर बुरा हाल हो गया।
अपने इकलौते बेटे का शव गोद में लिए वह बार-बार बेहोश होती रही, और पास बैठे परिजन भी सदमे में थे।


किसी ने तहरीर नहीं दी, पुलिस कहती है—परिजन चाहें तो कार्रवाई होगी

सीओ कैंट नवीन शुक्ला ने बताया कि देर शाम तक परिजनों ने कोई लिखित शिकायत नहीं दी है।
उन्होंने कहा—

“परिजन तहरीर देंगे तो हम आवश्यक कार्रवाई करेंगे।”

हालांकि, क्षेत्र में गश्त और कुत्तों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए पुलिस टीमों को अलर्ट किया गया है।


बेगमपुल का इलाका क्यों है आवारा कुत्तों का हॉटस्पॉट?

नगर निगम की रिपोर्टों के अनुसार—

  • बेगमपुल के आसपास कूड़े के ढेर

  • खुले नाले

  • फुटपाथ पर रहने वाले खानाबदोश परिवार

  • लगातार बढ़ते आवारा कुत्तों के झुंड

यह सब मिलकर इसे रात में हाई-रिस्क ज़ोन बनाते हैं।
ऐसे क्षेत्रों में कई बार बच्चे पहले भी कुत्तों के हमले का शिकार हो चुके हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि कुत्ते ऐसे स्थानों पर—

  • भोजन की तलाश में

  • समूह में शिकार की प्रवृत्ति के कारण

  • या बच्चे जैसे छोटे, असुरक्षित लक्ष्य देख
    अचानक आक्रामक हो जाते हैं।


खानाबदोश परिवारों की मजबूरी—रहते सड़क पर, जोखिम भी सबसे ज्यादा इन्हें ही झेलना पड़ता है

इस परिवार की दर्दनाक कहानी भी समाज की एक बड़ी विडंबना को उजागर करती है।
शहरों में—

  • फुटपाथ पर सोने वाले

  • कूड़ा बीनने वाले

  • सड़क किनारे रहने वाले गरीब परिवार

आवारा कुत्तों के हमलों का सबसे अधिक जोखिम झेलते हैं।
रात के समय अंधेरा, खुले में सोना, और सुरक्षा का अभाव अक्सर इन परिवारों को बेहद असुरक्षित बना देता है।


बाल सुरक्षा और आवारा कुत्तों के बढ़ते खतरे—विशेषज्ञों ने उठाई व्यवस्था सुधारने की मांग

बाल अधिकार विशेषज्ञों का कहना है कि यह घटना प्रशासन के लिए जागने का संकेत है।
जरूरी है कि—

  • शहर के संवेदनशील ठिकानों की पहचान की जाए

  • आवारा कुत्तों पर वैक्सीनेशन और नियंत्रण अभियान तेज किए जाएं

  • फुटपाथ पर रहने वाले परिवारों के लिए सुरक्षित आश्रय की व्यवस्था हो

  • रात में पेट्रोलिंग और कुत्तों की मॉनिटरिंग बढ़ाई जाए

कई शहरों में पहले भी कुत्तों के झुंड बच्चों को मारने की कई घटनाएँ सामने आ चुकी हैं, जिससे यह समस्या एक सार्वजनिक सुरक्षा संकट बन चुकी है।


मेरठ के बेगमपुल में डेढ़ साल के मासूम की दर्दनाक मौत ने आवारा कुत्तों के बढ़ते खतरे और सड़क किनारे रहने वाले गरीब परिवारों की बेबस स्थिति को फिर उजागर कर दिया है। गंगोत्री अपने बच्चे को लेकर सिर्फ मां-बाप से मिलने आई थी, लेकिन कुछ ही घंटों में उसका संसार उजड़ गया। प्रशासन पर अब जिम्मेदारी है कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि कोई और परिवार इस तरह की त्रासदी का शिकार न हो।

News-Desk

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