ईरान और भारत की कूटनीति से शांति की उम्मीदें: Brics Summit में मोदी-पेजेशकियन की सार्थक चर्चा
ईरान-इजरायल तनाव के बीच भारत की मध्यस्थता भूमिका
यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब ईरान और इजरायल के बीच तनाव अपने चरम पर है। राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने इस तनाव के बीच क्षेत्र में शांति बनाए रखने और विवादों को सुलझाने में भारत की भूमिका को अहम बताया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत का सभी संबंधित पक्षों के साथ अच्छे संबंधों का होना संघर्ष कम करने में निर्णायक भूमिका निभा सकता है। प्रधानमंत्री मोदी ने भी बातचीत और कूटनीति के माध्यम से शांति बहाल करने की आवश्यकता पर बल दिया और क्षेत्र में हो रहे संघर्ष पर अपनी गहरी चिंता व्यक्त की।
पश्चिम एशिया के संकट से प्रभावित देशों के लिए भारत हमेशा से एक विश्वसनीय सहयोगी रहा है। भारत की तटस्थ और शांति-समर्थक नीति उसे इस क्षेत्र में विवादों के समाधान के लिए महत्वपूर्ण मध्यस्थ के रूप में स्थापित करती है। इससे पहले भी भारत ने मध्य पूर्व के विभिन्न देशों के साथ आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों के माध्यम से क्षेत्र में स्थिरता लाने में योगदान दिया है।
चाबहार बंदरगाह और INSCT परियोजना पर महत्वपूर्ण चर्चा
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पेजेशकियन के बीच हुई बैठक में द्विपक्षीय सहयोग के कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर भी चर्चा की गई। सबसे प्रमुख चर्चा का विषय चाबहार बंदरगाह और अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा (INSCT) था। चाबहार बंदरगाह परियोजना भारत के लिए रणनीतिक रूप से अत्यधिक महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह भारत को अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक सीधा व्यापारिक मार्ग प्रदान करती है, जिससे पाकिस्तान को बायपास किया जा सकता है।
INSCT परियोजना के अंतर्गत यह गलियारा भारत, ईरान, रूस और यूरोप के बीच व्यापार को बढ़ावा देने में सक्षम हो सकता है। इससे न केवल भारत और ईरान के बीच व्यापारिक संबंध मजबूत होंगे, बल्कि यह परियोजना भारत के वैश्विक व्यापारिक नेटवर्क को भी विस्तार देगी।
भारत-ईरान द्विपक्षीय संबंधों में नई ऊर्जा
प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति पेजेशकियन को उनकी हालिया चुनावी जीत पर बधाई दी और भारत-ईरान के सदियों पुराने द्विपक्षीय संबंधों को और भी गहरा करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया। ईरान और भारत के बीच रिश्ते केवल राजनैतिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और आर्थिक सहयोग पर भी आधारित हैं। इतिहास में भारत और ईरान के बीच संपर्क सदियों से बना हुआ है, जिसमें व्यापार, सांस्कृतिक आदान-प्रदान, और सामाजिक संबंध महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं।
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पेजेशकियन ने इस बात पर सहमति जताई कि दोनों देशों के बीच सहयोग के कई और क्षेत्र भी हैं जिन्हें और मजबूत किया जा सकता है। इनमें विशेष रूप से उर्जा, परिवहन, और सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र शामिल हैं।
कूटनीतिक बातचीत में उभरी वैश्विक शांति की पहल
इस मुलाकात का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह था कि दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया की स्थिति पर गंभीर चर्चा की। मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि नागरिकों की सुरक्षा सर्वोपरि है और किसी भी प्रकार की हिंसा से बचने के लिए सभी पक्षों को मिलकर प्रयास करना चाहिए। वहीं, राष्ट्रपति पेजेशकियन ने भारत की शांतिपूर्ण कूटनीति की सराहना की और यह उम्मीद जताई कि भारत इस क्षेत्र में शांति बनाए रखने में एक प्रमुख भूमिका निभा सकता है।
यह बैठक ऐसे समय में हुई जब ब्रिक्स जैसे बड़े मंच पर भारत और ईरान जैसे देशों के नेताओं के बीच सीधी बातचीत का महत्व और भी बढ़ जाता है। वैश्विक स्तर पर भारत की कूटनीति न केवल उसकी आर्थिक और राजनीतिक ताकत को दिखाती है, बल्कि यह भी स्पष्ट करती है कि भारत वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए प्रतिबद्ध है।
भारत की वैश्विक भूमिका: मध्यस्थता से विश्व शांति तक
भारत की इस भूमिका को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिल रही है। हाल के वर्षों में, भारत ने कई वैश्विक मुद्दों पर मध्यस्थ की भूमिका निभाई है। चाहे वह रूस-यूक्रेन संघर्ष हो या पश्चिम एशिया के विभिन्न देशों के बीच चल रहे विवाद, भारत ने तटस्थ और निष्पक्ष रहकर शांति स्थापित करने का प्रयास किया है।
ईरान के साथ भारत के मजबूत संबंध सिर्फ राजनीतिक या व्यापारिक नहीं हैं, बल्कि यह संबंध दोनों देशों के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों पर आधारित हैं। चाबहार परियोजना हो या INSCT गलियारा, यह परियोजनाएं न केवल व्यापारिक संबंधों को बढ़ावा देंगी, बल्कि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और भी मजबूत बनाएंगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के बीच हुई यह मुलाकात कूटनीतिक दृष्टि से अत्यधिक महत्वपूर्ण रही। न केवल इसने भारत-ईरान संबंधों को नई दिशा दी, बल्कि पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता की संभावनाओं को भी नया आयाम प्रदान किया। ऐसे समय में जब वैश्विक परिदृश्य तेजी से बदल रहा है, भारत की तटस्थ और शांति-समर्थक नीति उसे एक विश्वसनीय और निर्णायक मध्यस्थ के रूप में स्थापित करती है।
इस मुलाकात से यह स्पष्ट होता है कि भारत न केवल अपने आर्थिक और राजनीतिक हितों की रक्षा करने के लिए तत्पर है, बल्कि वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए भी महत्वपूर्ण योगदान देने के लिए तैयार है।

