मुसलमान क़ुरआन की अहमियत को समझेंः मौलाना सैय्यद अशहद रशीदी
मुजफ्फरनगर। क़ुरआन की अहमियत को समझें और उस पर अमल करके अपनी ज़िंदगी को गुजारने की फ़िक्र करें। नही तो तबाही ही तबाही है। जिसके जिम्मेदार हम खुद हैं। इन सभी ख्यालातों को कस्बा बुढ़ाना के मौहल्ला करबला रोड पर आयोजित जमीयत उलमा-ए-हिन्द बुढ़ाना के तत्वावधान में आयोजित इस्लाहे मुआशरा कॉन्फ्रेंस में जमीयत उलमा उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष मौलाना सैय्यद अशहद रशीदी ने व्यक्त किये।
मौलाना रशीदी ने क़ुरआन की अहमियत को बयान करते हुये कहा कि क़ुरआन अल्लाह की किताब है। जिस पर अमल करते हुये जिंदगी को जीने पर अल्लाह जन्नत देगा। मौलाना ने कहा कि अफसोस है कि आज हमने क़ुरआन को पढ़ना और समझना छोड़ दिया है। जिसके सबब हमारी जिंदगी में आज तरह तरह की बदनामी हो रही है।
उन्होंने सभी को क़ुरआन की तिलावत ओर उस पर अमल करने की अपील की। मौलाना ने कहा कि जन्नत वो ही जायेगा जो मुत्तक़ी (नेक व्यक्ति) परहेजगार होगा।
उन्होंने कहा कि मुत्तक़ी कोन होगा? मौलाना अशहद रशीदी ने विस्तारपूर्वक क़ुरआन की रोशनी में बताया कि मुत्तक़ी बनने के लिये १ चीजो को अपनाना होगा।
पहले अल्लाह की राह में अपने माल में से खर्च करो। दूसरी अपने गुस्से पर काबू रखो क्योंकि गुस्से से नुकसान होता है। तीसरे माफ करने वाले बनो और चौथी अपने गुनाहों की तौबा करते रहो।
मौलाना ने कहा जिसने इन ४ चीजो को अपना लिया वो जन्नत में जायेगा। कॉन्फ्रेंस में मौलाना नज़र मुहम्मद क़ासमी ने कहा कि आज हमारे अंदर इतना बिगाड़ पैदा हो गया है कि हम वादा खिलाफी करते हैं। उन्होंने कहा कि सच्चे मुसलमान की पहचान है वो कभी वादा खिलाफी नही करेगा।
उन्होंने कहा कि जो आज हमारे अंदर बीमारियां पनप रही हैं उनको दूर करना है ओर अच्छी साफ स्वच्छ जिंदगी को गुजारना है। इस्लाहे मुआशरा कॉन्फ्रेंस की अध्यक्षता कर रहे जमीयत उलमा बुढाना के नगर अध्यक्ष हाफिज शेरदीन ने कॉन्फ्रेंस के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुये कहा कि समाज में नशा, जुआं सट्टा एवं बहुत सी बुराइयों को समाप्त करना है।
कॉन्फ्रेंस का संचालन हाफिज मौहम्मद तहसीन और मौहम्मद आसिफ क़ुरैशी ने संयुक्त रूप से किया। कॉन्फ्रेंस को मुफ़्ती आज़ाद क़ासमी, हाफिज अब्दुल गफ़्फ़ार और हाजी शराफत आदि ने भी सम्बोधित किया।
इस दौरान हाजी शाहिद त्यागी प्रदेश सचिव, मौलाना क़ासिम क़ासमी जिलाध्यक्ष, मौलाना मुकर्रम अली क़ासमी जिला महासचिव, मौलाना सय्यद साद, हकीम उम्मेद अली, मौलाना ताहिर क़ासमी व मौहम्मद इकराम कस्सार के अलावा सेकड़ो लोग मौजूद रहे।

