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Muzaffarnagar: Mount Litra Zee School पर संकट के बादल, फर्जी दस्तवेजों के आधार पर मान्यता लेने पर रिपोर्ट दर्ज

Muzaffarnagar:  भोपा रोड स्थित राजभवन निवासी आलोक स्वरूप की शिकायत से एक बड़े शैक्षणिक धोखाधड़ी के मामले का पर्दाफाश हुआ है। नवनीत भारद्वाज और उनके सहयोगियों द्वारा कुटरचित दस्तावेजों का उपयोग कर शिक्षा विभाग से मान्यता प्राप्त करने का यह मामला न केवल शिक्षा प्रणाली की गंभीर खामियों को उजागर करता है, बल्कि समाज और राजनीति पर भी गहरा असर डालता है।

Muzaffarnagar भोपा रोड स्थित राजभवन निवासी आलोक स्वरूप ने बताया कि उन्होंने शिक्षण संस्थान स्थापित व संचालित करने के लिये नवनीत भारद्वाज पुत्र श्री राम मोहन भारद्वाज व इनके साथियो से सम्पर्क किया. नवनीत भारद्वाज द्वारा श्री राम एजुकेशनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट के नाम से ट्रस्ट का पंजीकरण कराया गया था इसके संबंध में कार्यालय उप निबंधक प्रथम मुजफ्फरनगर में एक पंजीकृत दस्तावेज का निष्पादन किया गया था जो कि कार्यालय उप निबंधक प्रथम मुजफ्फरनगर में बहि संख्या 4 जिल्द संख्या 168 पृष्ठ संख्या 181 से 204 पर क्रमांक 239 दिनांक 28.07.2015 को रजिस्ट्रीकृत किया गया

इस दस्तावेज के आधार पर नवनीत भारद्वाज द्वारा दिनांक 20.03.2016 का एक कुटरचित व फ़र्जी दस्तावेज तैयार कर कर बेसिक शिक्षा विभाग मुजफ्फरनगर को माउंट लिट्रा ज़ी स्कूल (Mount Litra Zee School) लिंक रोड मुजफ्फरनगर की मान्यता की पत्रावली पर प्रस्तुत किया गया था इस कथित कुट रचित दस्तावेज में स्टांप पेपर नंबर, स्टांप मुद्रा, निष्पादन की तिथि, कार्यालय रजिस्ट्रेशन क्रमांक, स्टांप विक्रेता व स्टाम्प विक्रय की तिथि एक समान है जो कि दो अलग दस्तावेजों के निष्पादन में संभव नहीं है

कथित कुटरचित किराया नाम की प्रमाणित प्रति लिपि सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 में बेसिक शिक्षा अधिकारी मुजफ्फरनगर के कार्यालय द्वारा उपलब्ध कराई गई है उक्त दस्तावेज पर तत्कालीन प्रबंधक अरुण कुमार पुत्र स्वर्गीय श्री आत्माराम निवासी नई मंडी मुजफ्फरनगर, अनंत पुंडीर पुत्र श्री यशवीर सिंह पुंडीर निवासी मकान नंबर 138 कुंदनपुरा शहर मुजफ्फरनगर व नवनीत भारद्वाज पुत्र श्री राम मोहन भारद्वाज निवासी मकान नंबर 85 नई मंडी भोपा रोड मुजफ्फरनगर के हस्ताक्षर हैं.

आपराधिक साजिश

इस कथित कुटरचित दस्तावेज को तैयार करने में सुनंद सिंगल पुत्र मृतक अरुण कुमार निवासी बसेड़ा भवन नई मंडी मुजफ्फरनगर की आपराधिक साजिश रही है कुटरचित दस्तावेज के आधार पर उक्त वर्णित सभी व्यक्तियों नवनीत भारद्वाज पुत्र श्री राम मोहन भारद्वाज निवासी मकान नंबर 85 नई मंडी भोपा रोड, मुजफ्फरनगर अनंत पुंडीर पुत्र श्री यशवीर सिंह पुंडीर निवासी मकान नंबर 138 कुंदनपुरा शहर, मुजफ्फरनगर व सुनंद सिंघल पुत्र मृतक अरुण कुमार निवासी बसेड़ा भवन नई मंडी मुजफ्फरनगर द्वारा कुटरचित दस्तावेज बनाकर कूटरचित दस्तावेज को सही बताते हुए उनके आधार पर बेसिक शिक्षा विभाग से फ़र्जी रूप से माउंट लिट्रा ज़ी स्कूल (Mount Litra Zee School) मान्यता प्राप्त की है और कुटरचित दस्तावेज पर प्रार्थी के हस्ताक्षर फर्जी रूप से बनाकर अपराधिक लाभ प्राप्त किया है.

कथित फरजी कुटरचित किरायेनामें के संबंध में उप निबंधक कार्यालय प्रथम मुजफ्फरनगर में जब प्रार्थी द्वारा जांच कराई तो क्रमांक 239 बही नंबर 4 वर्ष 2015 पर उक्त फरजी किरायानामा पंजीकृत नहीं है और न हीं विधिक रूप से पंजीकृत हो सकता था. श्री आलोक स्वरूप के उक्त प्रार्थना पत्र पर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने सर्किल ऑफिसर नई मंडी से जाँच करके थाना नई मंडी में अन्तर्गत धारा 420, 467, 468, 471 भारतीय दण्ड संहिता रिपोर्ट दर्ज की है। आलोक स्वरूप ने बताया कि नवनीत भारद्वाज के विरुद्ध पहले से ही विभिन्न अभियोग में चार्जशीट लगी हुई है.

समाज पर प्रभाव

शैक्षणिक संस्थानों में इस तरह की धोखाधड़ी समाज के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकती है। शिक्षा एक ऐसा क्षेत्र है, जो भविष्य की नींव रखता है। जब शिक्षा प्रणाली में ही भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी का साम्राज्य फैल जाता है, तो इसका सीधा असर विद्यार्थियों की शिक्षा और उनके भविष्य पर पड़ता है। ऐसे संस्थान, जो गलत तरीके से मान्यता प्राप्त करते हैं, वे विद्यार्थियों को सही और गुणवत्ता युक्त शिक्षा देने में असमर्थ होते हैं। इससे न केवल विद्यार्थियों का करियर प्रभावित होता है, बल्कि समाज की प्रगति भी अवरुद्ध होती है।

शिक्षा प्रणाली की खामियाँ

यह मामला शिक्षा प्रणाली में मौजूद गंभीर खामियों को उजागर करता है। कुटरचित दस्तावेजों के आधार पर मान्यता प्राप्त करने की यह घटना शिक्षा विभाग की लापरवाही और उसकी कार्यप्रणाली में सुधार की आवश्यकता को दर्शाती है। इस तरह के मामलों से यह साफ होता है कि शैक्षणिक संस्थानों की मान्यता प्रक्रिया में कड़ी निगरानी और सत्यापन की कमी है। शिक्षा विभाग को इस तरह की धोखाधड़ी को रोकने के लिए अपने नियमों और प्रक्रियाओं को और सख्त बनाने की आवश्यकता है।

राजनीतिक परिप्रेक्ष्य

शिक्षा प्रणाली में इस तरह की धोखाधड़ी का राजनीतिक पहलू भी अहम है। राजनीति और प्रशासन की भूमिका इस मामले में बेहद महत्वपूर्ण होती है। इस प्रकार के मामलों में पुलिस और प्रशासन की तत्परता और सख्त कार्यवाही आवश्यक होती है। आलोक स्वरूप की शिकायत पर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक द्वारा सर्किल ऑफिसर नई मंडी से जांच करवाना और धारा 420, 467, 468, 471 भारतीय दंड संहिता के तहत रिपोर्ट दर्ज करना इस दिशा में एक सराहनीय कदम है।

शिक्षा में नैतिकता और सुधार

इस तरह के मामले हमारे समाज और शिक्षा प्रणाली में नैतिकता की कमी को भी दर्शाते हैं। जब शिक्षा के क्षेत्र में ही इस प्रकार की धोखाधड़ी होती है, तो यह भविष्य की पीढ़ी के लिए एक गलत संदेश देता है। शिक्षा संस्थानों को नैतिकता, सत्यता, और पारदर्शिता का पालन करना चाहिए। सरकार और शिक्षा विभाग को इस दिशा में कठोर कदम उठाने चाहिए ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं को रोका जा सके।

मुजफ्फरनगर में शिक्षा प्रणाली में हुई इस धोखाधड़ी का मामला समाज, शिक्षा प्रणाली और राजनीति पर गहरा असर डालता है। शिक्षा के क्षेत्र में इस प्रकार की घटनाएँ समाज की नैतिकता, विद्यार्थियों के भविष्य, और प्रशासनिक प्रक्रिया की खामियों को उजागर करती हैं। इसे रोकने के लिए सरकार और शिक्षा विभाग को कठोर कदम उठाने की आवश्यकता है। केवल तब ही हम एक स्वस्थ, शिक्षित और नैतिक समाज का निर्माण कर सकते हैं।

सरकार को ऐसे मामलों में दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने के साथ ही शिक्षा प्रणाली में सुधार लाने के लिए आवश्यक कदम उठाने चाहिए। समाज के हर व्यक्ति को इस दिशा में जागरूक होना चाहिए और अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए ऐसी धोखाधड़ी को रोकने में सहयोग करना चाहिए।

अस्वीकरण: यहां प्रस्तुत जानकारी प्राप्त सूचना और प्राप्त एफआईआर प्रतिलिपि पर आधारित है। अन्य पक्ष से संपर्क स्थापित नहीं हो सका, लेकिन हमने उनके दृष्टिकोण को प्राप्त करने का प्रयास किया। संदर्भित छवि केवल जानकारी के उद्देश्य से है और इसका उद्देश्य किसी भी व्यवसाय या व्यक्ति को नुकसान पहुंचाना नहीं है।

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