7 साल पुराने सनसनीखेज हत्याकांड में बड़ा फैसला: हत्या कर शव जलाने वाले दो दोषियों को फांसी, Muzaffarnagar कोर्ट ने सुनाई मृत्युदंड की सजा
News-Desk
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यह मामला वर्ष 2018 में सामने आया था और उस समय क्षेत्र में काफी चर्चा का विषय बना था। अब लंबे ट्रायल और कानूनी प्रक्रिया के बाद अदालत के फैसले ने पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
खेत में मिला था जला हुआ शव, अज्ञात हत्या से शुरू हुई थी जांच
मामले की शुरुआत 7 जून 2018 को हुई थी, जब मेरठ जनपद के बहसूमा थाना क्षेत्र स्थित मोडकलां निवासी महावीर जाट ने थाना मीरापुर पुलिस को सूचना दी कि उनके खेत में एक अज्ञात व्यक्ति का जला हुआ शव पड़ा हुआ है।
प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ कि किसी अज्ञात व्यक्ति की हत्या करने के बाद शव को जलाकर पहचान मिटाने की कोशिश की गई थी और बाद में शव खेत में फेंक दिया गया था। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण करते हुए साक्ष्य जुटाने शुरू किए।
घटना की गंभीरता को देखते हुए थाना मीरापुर में भारतीय दंड संहिता की धारा 302, 34 और 201 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया और जांच शुरू कर दी गई।
जले हुए शव की पहचान ने खोले मामले के अहम राज
जांच के दौरान पुलिस ने शव की पहचान करने के लिए विभिन्न स्तरों पर प्रयास किए। काफी जांच-पड़ताल और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर मृतक की पहचान राजेंद्र सैनी पुत्र सुखबीर निवासी ककरौली, थाना ककरौली, जनपद मुजफ्फरनगर के रूप में हुई।
पहचान होने के बाद पुलिस ने मृतक की गतिविधियों, संपर्कों और संभावित दुश्मनी के पहलुओं की गहन जांच शुरू की। इसी दौरान कई महत्वपूर्ण सुराग हाथ लगे, जिन्होंने जांच को नई दिशा दी।
जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, वैसे-वैसे पुलिस के सामने हत्या के पीछे की साजिश और उसमें शामिल लोगों की भूमिका स्पष्ट होती चली गई।
विवेचना में सामने आए तीन आरोपी, पुलिस ने किया गिरफ्तार
मामले की गहन विवेचना और साक्ष्य संकलन के दौरान तीन लोगों के नाम प्रकाश में आए। इनमें गजेन्द्र उर्फ गीलू पुत्र विजयपाल जाट निवासी ग्राम मोहम्मदपुर थाना बहसूमा जनपद मेरठ, रामकिरण उर्फ सावन गिरी पुत्र हरिचंद निवासी ग्राम मोहम्मदपुर थाना बहसूमा जनपद मेरठ तथा वीरसैन पुत्र गांधी कुम्हार निवासी ग्राम ककरौली थाना ककरौली शामिल थे।
पुलिस ने साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई करते हुए 12 जून 2018 को तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया और उन्हें न्यायालय में पेश किया गया।
पूछताछ और जांच के दौरान मिले तथ्यों ने अभियोजन पक्ष को मजबूत आधार प्रदान किया, जिसके बाद आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया गया।
ट्रायल के दौरान एक आरोपी की हो गई मृत्यु
मामले की सुनवाई के दौरान एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया, जब आरोपी वीरसैन की ट्रायल के दौरान मृत्यु हो गई। इसके चलते उसके खिलाफ न्यायिक कार्यवाही समाप्त हो गई।
हालांकि शेष दो आरोपियों गजेन्द्र उर्फ गीलू और रामकिरण उर्फ सावन गिरी के खिलाफ मुकदमे की सुनवाई जारी रही। अदालत में अभियोजन पक्ष ने लगातार साक्ष्य और गवाहों के माध्यम से आरोप सिद्ध करने का प्रयास किया।
लंबी सुनवाई के दौरान न्यायालय ने उपलब्ध सभी दस्तावेजों, गवाहों और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों का विस्तार से परीक्षण किया।
पुलिस विवेचना और अभियोजन की मजबूत पैरवी बनी फैसले का आधार
मामले में थाना मीरापुर पुलिस द्वारा की गई विवेचना को अदालत में महत्वपूर्ण माना गया। पुलिस ने घटनास्थल से लेकर आरोपियों की गिरफ्तारी तक विभिन्न स्तरों पर साक्ष्य संकलित किए और जांच को तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाया।
विवेचना पूर्ण होने के बाद 20 जुलाई 2018 को आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया गया। इसके बाद अभियोजन पक्ष ने मामले को मजबूती से प्रस्तुत किया।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजय कुमार वर्मा के निर्देशन में चलाए जा रहे अपराधियों को सजा दिलाने के अभियान के तहत इस मामले की विशेष निगरानी की गई। पुलिस अधीक्षक ग्रामीण अक्षय संजय महाडीक, पुलिस अधीक्षक अपराध इन्दु सिद्धार्थ, क्षेत्राधिकारी जानसठ ऋषिका सिंह तथा थाना प्रभारी मीरापुर राजीव शर्मा के नेतृत्व में पुलिस टीम ने लगातार पैरवी को मजबूत बनाए रखा।
गवाहों की समय पर पेशी ने मजबूत किया अभियोजन पक्ष
किसी भी आपराधिक मुकदमे में गवाहों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। इस मामले में भी पुलिस ने सभी महत्वपूर्ण गवाहों को समय पर न्यायालय में प्रस्तुत कराया।
अभियोजन पक्ष द्वारा उपलब्ध कराए गए प्रत्यक्ष और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों ने मामले को मजबूती प्रदान की। अदालत में पेश किए गए दस्तावेज, गवाहों के बयान और जांच रिपोर्टों ने आरोपियों के खिलाफ आरोपों को सिद्ध करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
एडीजीसी कुलदीप सिंह और कोर्ट पैरोकार कांस्टेबल राशिद अली द्वारा की गई प्रभावी पैरवी भी इस मामले में अहम साबित हुई।
कोर्ट ने सुनाया मृत्युदंड और लगाया अर्थदंड
सभी पक्षों की दलीलें सुनने और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद एडीजे/एफटीसी कोर्ट संख्या-3, मुजफ्फरनगर के माननीय न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर ने अपना फैसला सुनाया।
अदालत ने आरोपी गजेन्द्र उर्फ गीलू और रामकिरण उर्फ सावन गिरी को हत्या तथा साक्ष्य मिटाने के गंभीर अपराध का दोषी मानते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई। इसके साथ ही दोनों दोषियों पर 1 लाख 10 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया।
यह फैसला जिले के चर्चित आपराधिक मामलों में से एक महत्वपूर्ण न्यायिक निर्णय माना जा रहा है।
सात वर्षों की कानूनी प्रक्रिया के बाद मिला न्याय
वर्ष 2018 में दर्ज हुए इस मामले में फैसला आने में लगभग सात वर्ष का समय लगा। इस दौरान जांच, आरोप पत्र, गवाहों के बयान, कानूनी बहस और न्यायिक प्रक्रिया के सभी चरण पूरे किए गए।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के मामलों में सटीक साक्ष्य संकलन और मजबूत अभियोजन ही दोष सिद्ध करने की कुंजी होता है। इस मामले में भी पुलिस और अभियोजन पक्ष ने समन्वित रूप से कार्य करते हुए आरोपियों के खिलाफ मजबूत केस तैयार किया।
फैसले के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली की हुई सराहना
अदालत के फैसले के बाद आम लोगों के बीच भी इस निर्णय की चर्चा रही। स्थानीय स्तर पर लोगों ने पुलिस की त्वरित कार्रवाई, निष्पक्ष जांच और प्रभावी पैरवी की सराहना की।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अपराधियों को कानून के अनुसार सजा दिलाना ही पुलिस और न्याय व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य है। इस प्रकार के फैसले समाज में कानून के प्रति विश्वास को मजबूत करते हैं और अपराधियों को स्पष्ट संदेश देते हैं कि गंभीर अपराधों के परिणाम भी गंभीर होते हैं।

