उत्तर प्रदेश

अपनी ही सरकार, अपने ही अफसर और अपना ही अल्टीमेटम! श्रीराम कॉलेज Muzaffarnagar रोड पर मंत्री कपिल देव फिर नाराज़

 Muzaffarnagar एक बार फिर चर्चा में है। फर्क सिर्फ इतना है कि सड़क अभी भी नहीं बनी और अल्टीमेटम का नया संस्करण जारी हो गया। शनिवार को नगर विधायक एवं प्रदेश सरकार में राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल स्वयं मौके पर पहुंचे और अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाते हुए निर्माण कार्य तत्काल शुरू करने के निर्देश दिए।

दिलचस्प बात यह है कि जिन अधिकारियों को मंत्री जी ने फटकार लगाई, वे उसी सरकार के प्रशासनिक ढांचे का हिस्सा हैं जिसकी सत्ता प्रदेश में पिछले नौ वर्षों से है। ऐसे में स्थानीय लोगों के बीच यह सवाल भी चर्चा का विषय बना हुआ है कि आखिर सड़क नहीं बनने के लिए जिम्मेदार कौन है—अफसर, विभाग या फिर पूरा सिस्टम?


जनता पूछ रही है: अल्टीमेटम नया है या पुराना?

निरीक्षण के दौरान मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि क्षेत्र के हजारों लोग टूटी सड़क, कीचड़ और जलभराव की समस्या से परेशान हैं। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट चेतावनी दी कि अब और देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

हालांकि स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सड़क की हालत कोई नई नहीं है। बरसों से लोग इसी मार्ग से गुजर रहे हैं और हर बारिश में यही तस्वीर दिखाई देती है। ऐसे में कई लोग यह भी पूछते नजर आए कि यदि समस्या इतनी गंभीर थी तो समाधान अब तक क्यों नहीं हुआ?

कुछ स्थानीय लोगों ने चुटकी लेते हुए कहा कि सड़क से ज्यादा मजबूत तो इस सड़क को लेकर होने वाली बैठकों और निरीक्षणों का रिकॉर्ड हो गया है।


बैठकें होती रहीं, सड़क इंतजार करती रही

मंत्री ने अधिकारियों को याद दिलाया कि कुछ दिन पहले ही जल निगम, नगर पालिका और अन्य विभागों के साथ बैठक कर जल निकासी की स्थायी व्यवस्था बनाने के निर्देश दिए गए थे।

लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि सड़क निर्माण शुरू नहीं हो पाया। यानी बैठक हुई, निर्देश दिए गए, योजनाएं बनीं, मगर सड़क वहीं की वहीं रही।

शहर के लोगों का कहना है कि मुजफ्फरनगर में कई परियोजनाएं कागज पर तेज दौड़ती हैं, लेकिन जमीन पर आते-आते उनकी रफ्तार अक्सर ट्रैफिक जाम में फंस जाती है।


बरसात आई, कीचड़ आया, फिर निरीक्षण आया

श्रीराम कॉलेज रोड पर रहने वाले लोगों का कहना है कि हर वर्ष बारिश से पहले निर्माण की चर्चा शुरू होती है और बारिश आने तक निरीक्षणों का दौर चलता रहता है।

इस बार भी स्थिति कुछ अलग नहीं दिख रही। सड़क पर जलभराव और कीचड़ की शिकायतों के बीच मंत्री का दौरा हुआ और अधिकारियों को चेतावनी दी गई।

स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि सड़क की हालत से सबसे ज्यादा असर कारोबार पर पड़ता है। वहीं विद्यार्थियों और राहगीरों को भी रोजाना परेशानी झेलनी पड़ती है।


अफसरों पर गुस्सा, लेकिन सवाल व्यवस्था पर भी

निरीक्षण के दौरान मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने अधिकारियों की कार्यशैली पर नाराजगी जताई और कहा कि जनता को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

लेकिन राजनीतिक गलियारों में चर्चा इस बात की भी रही कि जब प्रदेश और स्थानीय निकायों में एक ही दल की सरकार है, तब बार-बार अधिकारियों को अल्टीमेटम देने की नौबत क्यों आ रही है?

विपक्षी दलों के नेता भी समय-समय पर यही सवाल उठाते रहे हैं कि यदि विकास कार्य प्राथमिकता पर हैं तो फिर शहर की प्रमुख सड़कों की यह स्थिति क्यों बनी हुई है।


‘आखिरी चेतावनी’ भी चर्चा में

मंत्री ने अधिकारियों को “अंतिम चेतावनी” देते हुए कहा कि यदि अब भी लापरवाही हुई तो उच्च स्तर पर कार्रवाई की संस्तुति की जाएगी।

हालांकि स्थानीय लोगों के बीच चर्चा इस बात की भी रही कि सरकारी कार्यों में “अंतिम चेतावनी” अक्सर उतनी अंतिम नहीं होती जितनी सुनने में लगती है।

एक बुजुर्ग निवासी ने मुस्कुराते हुए कहा, “सड़क बनने की तारीख तो पता नहीं, लेकिन अल्टीमेटम की तारीखें लोगों को याद रहने लगी हैं।”


अब निगाहें सड़क पर, बयान पर नहीं

मंत्री ने कहा है कि निर्माण कार्य गुणवत्ता के साथ और समयबद्ध तरीके से पूरा कराया जाएगा। उन्होंने यह भी दोहराया कि जनता को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है।

फिलहाल क्षेत्रवासियों को अब नए बयान या नए निरीक्षण से ज्यादा इंतजार उस दिन का है जब सड़क पर वास्तव में निर्माण कार्य शुरू होता दिखाई दे।

क्योंकि जनता के लिए सबसे बड़ी प्रेस कॉन्फ्रेंस, सबसे बड़ा निरीक्षण और सबसे बड़ा अल्टीमेटम आखिरकार वही होता है, जब सड़क बन जाती है।


श्रीराम कॉलेज रोड का मामला मुजफ्फरनगर में विकास कार्यों की गति पर एक बड़ा सवाल भी खड़ा करता है। मंत्री नाराज़ हैं, अधिकारी सफाई दे रहे हैं, बैठकें हो रही हैं और चेतावनियां जारी हो रही हैं। लेकिन सड़क अभी भी लोगों की परीक्षा ले रही है। ऐसे में क्षेत्रवासियों की नजर अब किसी नए अल्टीमेटम पर नहीं, बल्कि सड़क पर दौड़ते बुलडोजर और निर्माण मशीनों पर टिकी हुई है। आखिर जनता को राहत आदेशों से नहीं, काम पूरा होने से मिलेगी।

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