Muzaffarnagar News-योग शिविर में दी मुद्रा की जानकारी
मुजफ्फरनगर। (Muzaffarnagar News) मुद्रा शरीर की अपनी मौन भाषा है। मुद्रा सुख-दुख का भेद खोल देती है। मुद्रा जीवन और व्यवहार को प्रभावित करती है। मुद्रा चित्त के भावों को अभिव्यक्त करने की एक सरल विधि है। उक्त विचार भारतीय योग संस्थान के निशुल्क योग साधना केंद्र ग्रीनलैंड मॉडर्न जूनियर हाई स्कूल मुजफ्फरनगर में मुद्रा विषय पर बोलते हुए योगाचार्य सुरेंद्र पाल सिंह आर्य ने व्यक्त किए।
उन्होंने बताया कि मुद्राएं योग का एक अंग है। यह एक अनोखी विचित्र चमत्कारी एवं वैज्ञानिक परा विद्या है। हस्त मुद्राओं के अभ्यास से शरीर के तत्वों में बदलाव आता है, हमारे हाथ की उंगलियों में और अंगूठे में पांचों भौतिक तत्व विद्यमान है। जिनसे मिलकर हमारा यह शरीर बना है। अंगूठा अग्नि तत्व ,तर्जनी उंगली वायु तत्व ,मध्यमा आकाश तत्व, अनामिका पृथ्वी तत्व तथा कनिष्का उंगली जल तत्व का प्रतिनिधित्व करती है। तात्विक मुद्राओं के अभ्यास से हम अपने शरीर के अंदर पांचो भौतिक तत्वों को स्थिर रख सकते हैं। मुद्राएं खोई हुई शक्तियों को भी पुनः वापिस ला देती है।
युवा योग साधक हर्षवर्धन सिंह ने बताया कि अंगूठा और तर्जनी उंगली के टिप्स को मिलाने से तथा शेष तीनों उंगलियों को सीधा रखने से ज्ञान मुद्रा बनती है जो विद्यार्थियों के लिए बहुत ही उपयोगी है। मध्यमा और अंगूठे के टिप्स को मिलाने से आकाश मुद्रा, अनामिका और अंगूठे के टिप्स को मिलाने से पृथ्वी मुद्रा, कनिष्का और अंगूठे के टिप्स को मिलाने से वरुण मुद्रा बनती है। इसी प्रकार अनामिका उंगली के टिप्स को अंगूठे के मूल भाग से लगाकर अंगूठे से दबाने पर तथा शेष तीनों उंगलियों को सीधा रखने पर वायु मुद्रा बनती है। जिससे शरीर में उपस्थित वायु के दोष दूर होते हैं।
मध्यमा उंगली को अंगूठे के मूल भाग मि लगाकर तथा शेष तीनों उंगलियों को सीधी रखकर शून्य मुद्रा बनती है। अनामिका उंगली को अंगूठे के मूल भाग से लगाकर सूर्य मुद्रा तथा कनिष्का उंगली को अंगूठे के मूल भाग से लगाने से जलोदर नासनी मुद्रा बनती है । उन्होंने सभी मुद्राओं के लाभ भी बताएं। जिला प्रधान राजीव पुंडीर ने बताया कि मुद्राएं शरीर में स्विच का काम करती हैं। मुद्राएं पांचों तत्वों को संतुलित करती है
जिससे शरीर, मन व भावनाएं स्वस्थ एवं पुष्ट होती है शरीर हल्का रहता है। तात्विक मुद्राएं वैज्ञानिक हैं, रहस्यमई है ,बड़े ही चमत्कारी ढंग से वे मानव शरीर की रोगों से रक्षा करती है। मुद्राओं के बिना जप, प्राणायाम ,देव अर्चन व ध्यान निष्फल होता है। मुद्राएं रोगों से लड़ने की क्षमता प्रदान करती है। इस अवसर पर ओम सिंह तोमर एडवोकेट, अशोक शर्मा एडवोकेट ,अरुण शर्मा एडवोकेट, अंशुल शर्मा, यशपाल बरवाला, अशोक मित्तल ,क्षेत्रीय प्रधान राजीव रघुवंशी आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किए।

