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Muzaffarnagar में बदलेंगे कई मतदेय स्थल! 1200 मतदाताओं के आधार पर होगा सम्भाजन, डीएम उमेश मिश्रा ने सांसद-विधायकों और राजनीतिक दलों संग की अहम बैठक

Muzaffarnagar जिले की चुनावी व्यवस्था को अधिक सुव्यवस्थित और मतदाताओं के लिए सुविधाजनक बनाने की दिशा में प्रशासनिक स्तर पर महत्वपूर्ण प्रक्रिया शुरू हो गई है। जिलाधिकारी एवं जिला निर्वाचन अधिकारी उमेश मिश्रा ने मतदेय स्थलों के सम्भाजन के संबंध में सांसद सदस्यों, विधायकों तथा मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय और राज्यीय राजनीतिक दलों के अध्यक्षों एवं सचिवों के साथ जिला पंचायत सभागार में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की।

बैठक में Muzaffarnagar Polling Station Rationalisation की पूरी प्रक्रिया, निर्धारित समय-सारिणी, मतदेय स्थलों के भौतिक सत्यापन, नए मतदेय स्थलों के लिए भवनों के चयन, कम मतदाताओं वाले बूथों के विलय तथा राजनीतिक दलों से आपत्तियां और सुझाव प्राप्त करने सहित कई महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।

जिलाधिकारी उमेश मिश्रा ने बैठक में मौजूद जनप्रतिनिधियों और राजनीतिक दलों के पदाधिकारियों को मुख्य निर्वाचन अधिकारी, उत्तर प्रदेश, लखनऊ से प्राप्त दिशा-निर्देशों की जानकारी देते हुए बताया कि मतदेय स्थलों का सम्भाजन 1200 मतदाताओं के आधार पर संपन्न कराया जाना है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि पूरी प्रक्रिया निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित मानकों और समय-सारिणी के अनुसार पारदर्शी तरीके से पूरी की जाएगी। इसके लिए सांसदों, विधायकों और मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों से भी समय रहते सुझाव और आपत्तियां मांगी गई हैं।

1200 मतदाताओं के आधार पर होगा मतदेय स्थलों का सम्भाजन

जिला निर्वाचन अधिकारी उमेश मिश्रा ने बताया कि मुख्य निर्वाचन अधिकारी, उत्तर प्रदेश, लखनऊ से प्राप्त निर्देशों के अनुसार मतदेय स्थलों का सम्भाजन 1200 मतदाताओं के आधार पर किया जाना है।

इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य मतदान व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना और मतदाताओं की संख्या के अनुसार मतदान केंद्रों एवं मतदेय स्थलों को व्यवस्थित करना है।

प्रशासन की ओर से प्रत्येक मतदेय स्थल पर मतदाताओं की संख्या, मतदान केंद्र की स्थिति, भवन की उपलब्धता और भौगोलिक परिस्थितियों सहित विभिन्न बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है।

जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि मतदेय स्थलों के सम्भाजन की पूरी प्रक्रिया निर्धारित नियमों और मानकों के अनुसार संपन्न की जाए।

24 जून से 28 जून तक किया गया मतदेय स्थलों का भौतिक सत्यापन

बैठक में जिलाधिकारी ने मतदेय स्थलों के सम्भाजन से संबंधित पूरी समय-सारिणी की जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि मतदेय स्थलों का भौतिक सत्यापन, पुनर्निर्धारण और नए मतदेय स्थल स्थापित करने के लिए भवनों का चिन्हांकन 24 जून से 28 जून 2026 तक किया गया।

इस दौरान अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा संबंधित क्षेत्रों में जाकर मतदान केंद्रों और मतदेय स्थलों की स्थिति का निरीक्षण किया गया।

भौतिक सत्यापन की प्रक्रिया को निर्वाचन व्यवस्था के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इसी के आधार पर यह निर्धारित किया जाता है कि मौजूदा मतदेय स्थल मतदाताओं की सुविधा और निर्वाचन आयोग के मानकों के अनुरूप हैं या उनमें किसी प्रकार के बदलाव की आवश्यकता है।

नए मतदेय स्थलों के लिए भवनों का भी किया गया चिन्हांकन

जिन क्षेत्रों में नए मतदेय स्थल स्थापित करने की आवश्यकता महसूस की गई, वहां उपयुक्त भवनों के चयन और चिन्हांकन की प्रक्रिया भी पूरी की गई।

प्रशासन द्वारा इस बात का ध्यान रखा जा रहा है कि मतदान केंद्र तक पहुंचने में मतदाताओं को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।

इसके साथ ही भवनों की स्थिति, उपलब्ध सुविधाएं और मतदान प्रक्रिया के संचालन की व्यावहारिक संभावनाओं को भी ध्यान में रखा गया।

जिला निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि मतदान केंद्रों की व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जिससे चुनाव के दौरान मतदान प्रक्रिया सुचारु और व्यवस्थित तरीके से संपन्न हो सके।

29 जून से 1 जुलाई तक तैयार किए गए मतदेय स्थलों के प्रस्ताव

जिलाधिकारी उमेश मिश्रा ने बताया कि राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर मतदेय स्थलों से संबंधित प्रस्ताव 29 जून से 1 जुलाई 2026 तक तैयार कराए जाने की प्रक्रिया निर्धारित की गई।

इस दौरान विधानसभा क्षेत्रों के अनुसार मतदेय स्थलों की वर्तमान स्थिति, मतदाताओं की संख्या और संभावित बदलावों पर विचार किया गया।

राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की भागीदारी को पूरी प्रक्रिया में महत्वपूर्ण माना गया है, ताकि प्रस्तावों को अंतिम रूप दिए जाने से पहले विभिन्न पक्षों के सुझावों को सुना जा सके।

जिला प्रशासन ने राजनीतिक दलों से भी इस प्रक्रिया में सक्रिय सहयोग करने की अपील की है।

4 जुलाई को प्रकाशित होगी मतदेय स्थलों की आलेख सूची

जिला निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि आपत्तियां और सुझाव प्राप्त करने के लिए मतदेय स्थलों की आलेख सूची का प्रकाशन 4 जुलाई 2026 को किया जाना निर्धारित है।

इसके साथ ही मतदेय स्थलों की आलेख सूची मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को भी 4 जुलाई 2026 तक उपलब्ध कराई जानी है।

आलेख सूची जारी होने के बाद संबंधित पक्ष प्रस्तावित बदलावों का अध्ययन कर सकेंगे और यदि किसी मतदेय स्थल को लेकर कोई आपत्ति या सुझाव है तो उसे प्रशासन के समक्ष प्रस्तुत किया जा सकेगा।

इस प्रक्रिया का उद्देश्य अंतिम सूची तैयार करने से पहले सभी संबंधित पक्षों को अपनी बात रखने का अवसर देना है।

राजनीतिक दलों से मांगे गए सुझाव और आपत्तियां

जिलाधिकारी उमेश मिश्रा ने सांसद सदस्यों, विधायकों और मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय एवं राज्यीय राजनीतिक दलों के अध्यक्षों और सचिवों से अपील की कि मतदेय स्थलों के सम्भाजन के संबंध में यदि कोई सुझाव या आपत्ति है तो उसे शीघ्र प्रशासन को उपलब्ध कराया जाए।

उन्होंने कहा कि निर्धारित समय सीमा के भीतर प्राप्त सुझावों और आपत्तियों पर विचार किया जाएगा।

इसके बाद आवश्यकतानुसार उनका निस्तारण करते हुए मतदेय स्थलों की सूची को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

जिला निर्वाचन अधिकारी ने इस बात पर जोर दिया कि राजनीतिक दलों और जनप्रतिनिधियों की समय पर भागीदारी पूरी प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने में सहायक होगी।

18 जुलाई तक सूची को दिया जाएगा अंतिम रूप

जिला निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि वर्तमान सांसद सदस्यों, विधानसभा सदस्यों और मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के साथ बैठकों के आयोजन तथा प्राप्त शिकायतों और सुझावों के निस्तारण के बाद मतदेय स्थलों की सूची को 18 जुलाई 2026 तक अंतिम रूप दिया जाना है।

इससे पहले प्राप्त होने वाली आपत्तियों और सुझावों का परीक्षण किया जाएगा।

प्रशासन द्वारा यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा कि अंतिम सूची तैयार करते समय निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों और स्थानीय परिस्थितियों के बीच उचित समन्वय स्थापित हो।

मतदाताओं की सुविधा और निर्वाचन प्रक्रिया के सुचारु संचालन को इस पूरी प्रक्रिया में प्राथमिकता दी जाएगी।

25, 27 और 28 जुलाई को मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय को भेजे जाएंगे प्रस्ताव

जिलाधिकारी ने बैठक में बताया कि सभी आवश्यक संलग्नकों सहित मतदेय स्थलों के प्रस्ताव मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय को आयोग के अनुमोदन के लिए भेजे जाने की प्रक्रिया 25, 27 और 28 जुलाई 2026 को पूरी की जाएगी।

प्रस्तावों में मतदेय स्थलों से संबंधित आवश्यक विवरण और अन्य संबंधित दस्तावेज शामिल किए जाएंगे।

जिला निर्वाचन अधिकारी कार्यालय की ओर से पूरी प्रक्रिया को निर्धारित समय-सारिणी के अनुसार पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।

इसके लिए संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को समय रहते आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करने को कहा गया है।

31 जुलाई को आयोग के अनुमोदन के लिए भेजे जाएंगे सम्भाजन प्रस्ताव

बैठक में जानकारी दी गई कि मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय द्वारा मतदेय स्थलों के सम्भाजन से संबंधित प्रस्ताव आयोग के अनुमोदन के लिए 31 जुलाई 2026 को भेजे जाएंगे।

इससे पहले जिला स्तर पर पूरी प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जाएगा।

इस दौरान मतदेय स्थलों के भौतिक सत्यापन, प्रस्तावित बदलाव, राजनीतिक दलों और जनप्रतिनिधियों से प्राप्त सुझाव तथा आपत्तियों के निस्तारण सहित सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी की जाएंगी।

आयोग की मंजूरी मिलने के बाद मतदेय स्थलों की अंतिम व्यवस्था निर्धारित मानकों के अनुसार लागू की जा सकेगी।

एक ही भवन के कम मतदाताओं वाले बूथ हो सकते हैं मर्ज

जिलाधिकारी उमेश मिश्रा ने निर्वाचन आयोग के महत्वपूर्ण दिशा-निर्देशों की जानकारी देते हुए बताया कि यदि किसी विधानसभा क्षेत्र में एक ही गांव और एक ही भवन में स्थित एक मतदेय स्थल पर 500 से कम मतदाता हैं तथा उसी मतदान केंद्र के दूसरे मतदेय स्थल पर भी लगभग 500 मतदाता हैं, तो ऐसे मतदेय स्थलों को मर्ज करने पर विचार किया जा सकता है।

यदि दोनों मतदेय स्थलों को मिलाने के बाद मतदाताओं की कुल संख्या करीब 1000 होती है तो निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार ऐसे बूथों के विलय की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।

हालांकि इस पूरी प्रक्रिया में यह सुनिश्चित करना आवश्यक होगा कि संबंधित भवन और गांव एक ही हों।

इस व्यवस्था का उद्देश्य अनावश्यक रूप से कम मतदाताओं वाले अलग-अलग मतदेय स्थलों को अधिक व्यावहारिक तरीके से व्यवस्थित करना है।

एक बूथ पर 1050 से 1100 मतदाता रखने पर जोर

जिला निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि आगामी पुनरीक्षण को ध्यान में रखते हुए एक मतदेय स्थल पर मतदाताओं की संख्या अधिकतम करीब 1050 से 1100 रखने पर जोर दिया जा रहा है।

हालांकि मतदेय स्थलों के सम्भाजन का आधार 1200 मतदाताओं का निर्धारित किया गया है, लेकिन आगामी पुनरीक्षण के दौरान मतदाता संख्या में संभावित वृद्धि को देखते हुए मौजूदा स्तर पर संख्या को करीब 1050 या 1100 तक रखने की बात कही गई है।

इससे भविष्य में मतदाता संख्या बढ़ने की स्थिति में भी बूथों पर निर्धारित सीमा से अधिक दबाव उत्पन्न होने की संभावना कम होगी।

प्रशासन इस पूरी प्रक्रिया में वर्तमान मतदाता संख्या के साथ-साथ भविष्य की आवश्यकताओं को भी ध्यान में रख रहा है।

टेबल-टॉप एक्सरसाइज के जरिए होगा बूथों का आकलन

जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि मतदेय स्थलों के सम्भाजन के लिए टेबल-टॉप एक्सरसाइज पूरी कर ली जाए।

इसके माध्यम से यह आकलन किया जाएगा कि किन-किन मतदेय स्थलों को आपस में मर्ज किया जा सकता है और ऐसा करने के बाद मतदाताओं की कुल संख्या कितनी होगी।

उन्होंने स्पष्ट किया कि बूथों को मर्ज करने के बाद मतदाताओं की संख्या लगभग 1100 से अधिक नहीं होनी चाहिए।

साथ ही भवन और गांव भी एक ही होना चाहिए, ताकि मतदाताओं को मतदान केंद्र तक पहुंचने में किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

मतदाताओं की सुविधा को प्राथमिकता, प्रशासन ने दिए स्पष्ट निर्देश

मतदेय स्थलों का पुनर्निर्धारण और सम्भाजन निर्वाचन प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

किसी भी मतदान केंद्र पर अत्यधिक भीड़ या मतदाताओं की संख्या अधिक होने से मतदान के दिन व्यवस्थाओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। दूसरी ओर बहुत कम मतदाताओं वाले अलग-अलग बूथों को एक ही भवन में संचालित करना भी प्रशासनिक दृष्टि से हमेशा व्यावहारिक नहीं होता।

इसी को ध्यान में रखते हुए निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता संख्या और स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर मतदेय स्थलों के सम्भाजन की प्रक्रिया पूरी कराई जा रही है।

जिला प्रशासन ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया है कि मतदाताओं की सुविधा, मतदान केंद्र की भौगोलिक स्थिति और उपलब्ध भवनों की स्थिति का गंभीरता से परीक्षण किया जाए।

राजनीतिक दलों की भागीदारी से प्रक्रिया में बढ़ेगी पारदर्शिता

बैठक में सांसद सदस्यों, विधायकों और मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

प्रशासन का प्रयास है कि मतदेय स्थलों के सम्भाजन की प्रक्रिया में संबंधित पक्षों को पर्याप्त अवसर दिया जाए और उनके सुझावों तथा आपत्तियों पर नियमानुसार विचार किया जाए।

राजनीतिक दलों के स्थानीय प्रतिनिधि क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों और मतदाताओं की व्यावहारिक समस्याओं से परिचित होते हैं। ऐसे में उनके सुझाव मतदान केंद्रों की व्यवस्था को अधिक सुविधाजनक बनाने में महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।

यही कारण है कि अंतिम सूची तैयार करने से पहले सांसदों, विधायकों और राजनीतिक दलों के साथ बैठकों तथा सुझाव प्राप्त करने की व्यवस्था की गई है।

निर्धारित समय-सारिणी के अनुसार पूरी होगी निर्वाचन प्रक्रिया

जिला निर्वाचन अधिकारी उमेश मिश्रा ने स्पष्ट किया कि मतदेय स्थलों के सम्भाजन से जुड़ी पूरी प्रक्रिया निर्धारित समय-सारिणी के अनुसार संपन्न कराई जाएगी।

24 जून से शुरू हुई भौतिक सत्यापन और भवन चिन्हांकन की प्रक्रिया के बाद प्रस्ताव तैयार करने, आलेख सूची प्रकाशित करने, आपत्तियां एवं सुझाव प्राप्त करने और उनके निस्तारण के बाद 18 जुलाई तक सूची को अंतिम रूप देने का कार्यक्रम निर्धारित किया गया है।

इसके बाद आवश्यक दस्तावेजों के साथ प्रस्ताव मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय को भेजे जाएंगे और 31 जुलाई 2026 को आयोग के अनुमोदन के लिए प्रेषित किए जाने की प्रक्रिया पूरी होगी।

बैठक में सांसद, विधायक और राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि रहे मौजूद

जिला पंचायत सभागार में आयोजित बैठक में सांसद सदस्य, विधायकगण, मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय एवं राज्यीय राजनीतिक दलों के अध्यक्ष और सचिव मौजूद रहे।

इसके अलावा अपर जिलाधिकारी न्यायिक सुशील कुमार, जिला निर्वाचन कार्यालय का स्टाफ और अन्य संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारी भी बैठक में उपस्थित रहे।

बैठक के दौरान निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों, मतदेय स्थलों की वर्तमान स्थिति और प्रस्तावित सम्भाजन प्रक्रिया के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।

जिला निर्वाचन अधिकारी ने सभी संबंधित पक्षों से समयबद्ध तरीके से सहयोग करने और यदि कोई आपत्ति या सुझाव हो तो उसे शीघ्र प्रशासन के समक्ष प्रस्तुत करने की अपील की।

मुजफ्फरनगर में चुनावी तैयारियों को व्यवस्थित करने की दिशा में अहम कदम

मतदेय स्थलों के सम्भाजन की प्रक्रिया को जिले की निर्वाचन व्यवस्था को मजबूत और व्यवस्थित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

1200 मतदाताओं के आधार पर मतदेय स्थलों का सम्भाजन, कम मतदाता संख्या वाले बूथों के संभावित विलय और भविष्य में मतदाता संख्या बढ़ने की संभावना को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक बूथ पर करीब 1050 से 1100 मतदाता रखने की योजना से मतदान व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

फिलहाल प्रशासन की ओर से निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार पूरी प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है। राजनीतिक दलों, सांसदों और विधायकों से प्राप्त सुझावों और आपत्तियों के निस्तारण के बाद अंतिम सूची तैयार की जाएगी।

 

मुजफ्फरनगर में मतदेय स्थलों के सम्भाजन की प्रक्रिया तेज होने के साथ निर्वाचन व्यवस्था में कई महत्वपूर्ण बदलाव की संभावना बन गई है। जिलाधिकारी एवं जिला निर्वाचन अधिकारी उमेश मिश्रा ने स्पष्ट किया है कि पूरी प्रक्रिया निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से पूरी की जाएगी। 1200 मतदाताओं के मानक, कम मतदाता संख्या वाले बूथों के संभावित विलय और राजनीतिक दलों से सुझाव एवं आपत्तियां प्राप्त करने की व्यवस्था के बीच अब सभी की नजर 18 जुलाई तक तैयार होने वाली अंतिम सूची और इसके बाद आयोग की मंजूरी के लिए भेजे जाने वाले प्रस्तावों पर रहेगी।

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