‘दुनिया का सबसे कूल तानाशाह?’: कैसे नाएब बुकेले ने El Salvador को गैंगवार से निकालकर बनाया सबसे सुरक्षित देशों में शामिल
El Salvador कभी दुनिया के सबसे खतरनाक देशों में गिना जाता था। हालात ऐसे थे कि रात में घर से बाहर निकलना लोगों के लिए मौत को दावत देने जैसा माना जाता था। गैंगवार, हत्या, अपहरण और सड़क अपराध यहां की पहचान बन चुके थे। लेकिन कुछ ही वर्षों में यह तस्वीर पूरी तरह बदल गई।
आज उसी देश की सड़कों पर बच्चे देर रात तक फुटबॉल खेलते दिखाई देते हैं। लोग बिना डर बाजारों और सार्वजनिक स्थानों पर घूमते नजर आते हैं। इस बदलाव के केंद्र में हैं देश के 44 वर्षीय राष्ट्रपति Nayib Bukele, जिन्हें उनके समर्थक “देश का मसीहा” मानते हैं, जबकि आलोचक उन्हें “क्रूर तानाशाह” कहते हैं।
92% लोकप्रियता और ‘ठोक दो’ मॉडल ने बदल दी देश की तस्वीर
Nayib Bukele ने अपराध और गैंग नेटवर्क के खिलाफ बेहद सख्त नीति अपनाई। उन्होंने खुद को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर “दुनिया का सबसे कूल तानाशाह” तक बताया था।
उनकी सरकार के आंकड़ों के अनुसार 2015 में देश की हत्या दर प्रति एक लाख लोगों पर 104 थी, जो 2026 में घटकर महज 1.9 रह गई। यह बदलाव दुनिया भर में चर्चा का विषय बन गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि जिस देश को कभी ‘मर्डर कैपिटल’ कहा जाता था, वहां इतनी तेजी से अपराध नियंत्रण होना वैश्विक राजनीति और सुरक्षा मॉडल का बड़ा उदाहरण माना जा रहा है।
एमएस-13 गैंग के खिलाफ शुरू हुई सबसे बड़ी कार्रवाई
अल सल्वाडोर में लंबे समय तक कुख्यात MS-13 गैंग का आतंक रहा। मार्च 2022 में हालात तब और बिगड़ गए जब एक ही दिन में 62 लोगों की हत्या कर दी गई। यह देश के गृहयुद्ध के बाद सबसे खूनी दिन माना गया।
रिपोर्ट्स के अनुसार अगले तीन दिनों में कुल 87 लोगों की हत्या हुई। इसके बाद राष्ट्रपति बुकेले ने देश में आपातकाल लागू कर दिया। संवैधानिक अधिकारों को सीमित किया गया और बड़े स्तर पर गिरफ्तारी अभियान शुरू हुआ।
केवल दो हफ्तों के भीतर 10,000 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया। सरकार का दावा था कि यह कार्रवाई गैंग नेटवर्क खत्म करने के लिए जरूरी थी।
हर 50 में से 1 व्यक्ति जेल में, दुनिया में सबसे ज्यादा कैदियों वाला देश बना
आज अल सल्वाडोर की 64 लाख आबादी में लगभग 1.9 प्रतिशत लोग जेलों में बंद हैं। यानी हर 50 में से एक व्यक्ति जेल में है। यह दुनिया में सबसे अधिक कैदियों का अनुपात माना जा रहा है।
सरकार ने गैंग से जुड़े संदिग्धों के खिलाफ बड़े पैमाने पर कार्रवाई की। कई विशाल हाई-सिक्योरिटी जेलें बनाई गईं, जहां हजारों कैदियों को एक साथ रखा गया।
हालांकि मानवाधिकार संगठनों का आरोप है कि इनमें से बड़ी संख्या ऐसे युवाओं की है, जिन्हें केवल शक के आधार पर गिरफ्तार किया गया।
मानवाधिकार संगठनों ने उठाए गंभीर सवाल
मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने बुकेले सरकार की नीतियों पर गंभीर चिंता जताई है। उनका कहना है कि हजारों लोगों को बिना निष्पक्ष जांच और कानूनी प्रक्रिया के जेलों में बंद किया गया है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक कई जेलों में 30 लोगों की क्षमता वाली बैरकों में 100 से अधिक कैदियों को रखा गया है। कैदियों को परिवार से मिलने की अनुमति नहीं होती और कई जगह बेहद कठोर परिस्थितियों में उन्हें रखा जा रहा है।
आलोचकों का कहना है कि अपराध नियंत्रण के नाम पर लोकतांत्रिक संस्थाओं और नागरिक स्वतंत्रताओं को कमजोर किया जा रहा है।
12 साल के बच्चों तक के लिए आजीवन कैद का प्रावधान
बुकेले सरकार ने ऐसे कानूनों को भी मंजूरी दी है, जिनमें 12 साल तक के बच्चों के लिए भी कठोर सजा का प्रावधान किया गया है।
सरकार का तर्क है कि गैंग नेटवर्क में कम उम्र के बच्चों का इस्तेमाल बढ़ गया था, इसलिए सख्त कदम जरूरी थे। हालांकि बाल अधिकार संगठनों ने इस कानून का विरोध किया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अपराध नियंत्रण और मानवाधिकारों के बीच संतुलन बनाना किसी भी लोकतंत्र के लिए बड़ी चुनौती होती है।
डोनाल्ड ट्रम्प भी कर चुके हैं तारीफ
Donald Trump समेत कई दक्षिणपंथी नेताओं ने बुकेले की अपराध नियंत्रण नीति की तारीफ की है। ट्रम्प उन्हें वाइट हाउस में आमंत्रित भी कर चुके हैं।
कई राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बुकेले की छवि अब केवल अल सल्वाडोर तक सीमित नहीं रही, बल्कि वह वैश्विक दक्षिणपंथी राजनीति का बड़ा चेहरा बन चुके हैं।
उनकी उल्टी टोपी, आक्रामक भाषण शैली और सोशल मीडिया रणनीति ने उन्हें युवाओं के बीच भी लोकप्रिय बनाया है।
बिटकॉइन को कानूनी मुद्रा बनाने वाला पहला देश बना था अल सल्वाडोर
सुरक्षा नीतियों के अलावा बुकेले अपने आर्थिक प्रयोगों के कारण भी चर्चा में रहे। 2021 में उन्होंने बिटकॉइन को कानूनी मुद्रा घोषित कर दुनिया को चौंका दिया।
Bitcoin को आधिकारिक मुद्रा बनाने वाला अल सल्वाडोर दुनिया का पहला देश बना था। सरकार ने “बिटकॉइन सिटी” जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं की भी घोषणा की।
हालांकि 2025 में आर्थिक अस्थिरता, अंतरराष्ट्रीय दबाव और जनता के विरोध के चलते सरकार को इस फैसले से पीछे हटना पड़ा। इसके बावजूद बुकेले अभी भी डिजिटल अर्थव्यवस्था और तकनीकी निवेश को बढ़ावा देने की बात करते हैं।
क्या सुरक्षा के बदले लोग छोड़ रहे हैं आजादी?
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अल सल्वाडोर दुनिया के सामने एक नया और विवादित मॉडल पेश कर रहा है। यह मॉडल दिखाता है कि अगर सरकार लोगों को सुरक्षा का मजबूत एहसास दिला दे, तो बड़ी संख्या में लोग प्रेस की स्वतंत्रता, निजता और नागरिक अधिकारों पर समझौता करने को भी तैयार हो सकते हैं।
विशेषज्ञों के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या बिना मजबूत लोकतांत्रिक संस्थाओं और मानवाधिकार सुरक्षा के हासिल की गई यह शांति लंबे समय तक टिक पाएगी?

