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Kim Jong-un पर हमला हुआ तो तुरंत परमाणु जवाब! उत्तर कोरिया ने बदली न्यूक्लियर नीति, दुनिया में बढ़ा तनाव

North Korea ने अपनी परमाणु नीति और संविधान में बड़ा बदलाव करते हुए ऐसा प्रावधान जोड़ा है, जिसने वैश्विक राजनीति और सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। नई नीति के अनुसार अगर देश के सर्वोच्च नेता Kim Jong Un की हत्या हो जाती है या किसी विदेशी हमले के दौरान वे नेतृत्व करने की स्थिति में नहीं रहते, तो उत्तर कोरिया तुरंत परमाणु हमला करेगा।

इस फैसले को उत्तर कोरिया की अब तक की सबसे आक्रामक रणनीतिक चेतावनियों में से एक माना जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का कहना है कि यह बदलाव केवल सैन्य नीति नहीं बल्कि प्योंगयांग की बढ़ती असुरक्षा और वैश्विक तनाव का संकेत भी है।


ईरान पर हमलों के बाद बदली रणनीति, प्योंगयांग में बढ़ा डर

रिपोर्ट्स के मुताबिक यह बदलाव मार्च 2026 में Tehran पर हुए अमेरिकी और इजराइली हमलों के बाद किया गया। उन हमलों में ईरानी नेतृत्व को भारी नुकसान पहुंचा था और कई शीर्ष अधिकारी मारे गए थे।

दक्षिण कोरिया की खुफिया एजेंसियों का मानना है कि इन घटनाओं ने उत्तर कोरिया को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि भविष्य में इसी तरह का “डिकैपिटेशन स्ट्राइक” उसके खिलाफ भी किया जा सकता है। यानी ऐसा हमला जिसमें किसी देश की शीर्ष राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व को सीधे निशाना बनाया जाए।

विश्लेषकों का कहना है कि ईरान की घटनाओं ने किम जोंग-उन और उनकी सैन्य व्यवस्था को गहराई से प्रभावित किया है।


15वीं सुप्रीम पीपुल्स असेंबली में पास हुआ नया प्रावधान

यह नया संवैधानिक प्रावधान 22 मार्च को प्योंगयांग में शुरू हुए 15वीं सुप्रीम पीपुल्स असेंबली सत्र के दौरान अपनाया गया। बाद में दक्षिण कोरिया की नेशनल इंटेलिजेंस सर्विस ने वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों को इस बदलाव की जानकारी दी।

विशेषज्ञों के मुताबिक पहले भी उत्तर कोरिया की सैन्य रणनीति में ऐसे संकेत मौजूद थे, लेकिन अब पहली बार इसे संविधान का औपचारिक हिस्सा बनाया गया है। इससे इस नीति का महत्व और गंभीरता दोनों बढ़ गए हैं।


‘ईरान उत्तर कोरिया के लिए वेक-अप कॉल था’

सियोल स्थित Kookmin University के इतिहास और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के प्रोफेसर Andrei Lankov ने कहा कि ईरान पर हुए हमले उत्तर कोरिया के लिए “वेक-अप कॉल” साबित हुए।

उन्होंने कहा कि अमेरिका और इजराइल ने जिस तेजी और सटीकता के साथ ईरानी नेतृत्व को निशाना बनाया, उससे प्योंगयांग को यह संदेश मिला कि भविष्य में उसके खिलाफ भी इसी तरह का ऑपरेशन संभव है।

प्रोफेसर लांकोव के अनुसार उत्तर कोरिया अब किसी भी संभावित विदेशी हमले को अपने अस्तित्व के लिए सीधा खतरा मानता है और इसी वजह से उसने परमाणु जवाबी कार्रवाई की नीति को और स्पष्ट कर दिया है।


उत्तर कोरिया में ‘डिकैपिटेशन स्ट्राइक’ करना आसान नहीं

विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान की तुलना में उत्तर कोरिया पर इस तरह का हमला करना कहीं अधिक कठिन होगा। North Korea दुनिया के सबसे बंद और नियंत्रित देशों में गिना जाता है।

वहां विदेशी राजनयिकों, कारोबारियों और सहायता कर्मियों की गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखी जाती है। इंटरनेट और डिजिटल नेटवर्क पर सरकार का पूरा नियंत्रण है, जिससे बाहरी खुफिया एजेंसियों के लिए जानकारी जुटाना बेहद मुश्किल हो जाता है।

रिपोर्ट्स के अनुसार इजराइली एजेंसियों ने ईरान में डिजिटल सर्विलांस और ट्रैफिक कैमरों का इस्तेमाल किया था, लेकिन उत्तर कोरिया में ऐसी तकनीकी निगरानी करना आसान नहीं माना जाता।


किम जोंग-उन की सुरक्षा व्यवस्था बेहद सख्त

Kim Jong Un अपनी सुरक्षा को लेकर बेहद सतर्क माने जाते हैं। वे अक्सर भारी हथियारों से लैस सुरक्षा कर्मियों के बड़े समूह के साथ चलते हैं।

किम जोंग-उन आमतौर पर हवाई यात्रा से बचते हैं और अंतरराष्ट्रीय दौरों के लिए बख्तरबंद ट्रेन का इस्तेमाल करते हैं। माना जाता है कि ऐसा सैटेलाइट ट्रैकिंग और संभावित हमलों से बचने के लिए किया जाता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि उत्तर कोरिया अब पारंपरिक जासूसी से ज्यादा आधुनिक सैटेलाइट निगरानी तकनीकों से चिंतित है।


दक्षिण कोरिया सीमा पर नए हथियार तैनात करेगा उत्तर कोरिया

इस बीच उत्तर कोरिया ने दक्षिण कोरिया पर दबाव बढ़ाने के लिए सीमा के पास लॉन्ग रेंज आर्टिलरी सिस्टम तैनात करने की योजना भी घोषित की है।

Korean Central News Agency यानी KCNA के मुताबिक किम जोंग-उन ने हाल ही में एक हथियार फैक्ट्री का दौरा किया और नई 155 मिलीमीटर सेल्फ-प्रोपेल्ड गन-हाउइट्जर सिस्टम का निरीक्षण किया।

रिपोर्ट्स के अनुसार यह नई आर्टिलरी सिस्टम 60 किलोमीटर से अधिक दूरी तक हमला कर सकती है और दक्षिण कोरिया की राजधानी Seoul तक को निशाना बनाने की क्षमता रखती है।


उत्तर और दक्षिण कोरिया के रिश्ते लगातार बिगड़ रहे

हाल के वर्षों में उत्तर और दक्षिण कोरिया के बीच तनाव लगातार बढ़ा है। जहां सियोल कई बार बातचीत और शांति प्रयासों की बात करता रहा, वहीं प्योंगयांग अब खुलकर दक्षिण कोरिया को अपना मुख्य दुश्मन बताने लगा है।

उत्तर कोरिया ने अपने संविधान से कोरियाई एकीकरण से जुड़े कई संदर्भ भी हटा दिए हैं। इससे संकेत मिलता है कि दोनों देशों के बीच राजनीतिक दूरी और बढ़ रही है।

गौरतलब है कि 1950-53 का कोरियाई युद्ध केवल युद्धविराम समझौते के साथ खत्म हुआ था। आज तक दोनों देशों के बीच कोई औपचारिक शांति संधि नहीं हुई है।


अमेरिका तक मार करने वाली मिसाइलें रखता है उत्तर कोरिया

विशेषज्ञों के अनुसार उत्तर कोरिया के पास बड़ी संख्या में बैलिस्टिक मिसाइलें मौजूद हैं, जिनमें शॉर्ट रेंज, मीडियम रेंज और इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलें (ICBM) शामिल हैं।

उत्तर कोरिया ह्वासोंग-15, ह्वासोंग-17 और ह्वासोंग-18 जैसी लंबी दूरी की मिसाइलों का परीक्षण कर चुका है। इनकी अनुमानित रेंज 10,000 से 15,000 किलोमीटर तक मानी जाती है, जिससे अमेरिका के बड़े हिस्से तक पहुंच संभव हो सकती है।

हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि उत्तर कोरिया के परमाणु हथियारों और मिसाइलों की वास्तविक संख्या का सटीक आंकड़ा सार्वजनिक नहीं है।


उत्तर कोरिया द्वारा अपनी परमाणु नीति में किया गया यह बदलाव वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था के लिए बेहद गंभीर संकेत माना जा रहा है। किम जोंग-उन पर किसी भी संभावित हमले की स्थिति में तत्काल परमाणु जवाबी कार्रवाई का प्रावधान दुनिया में तनाव और बढ़ा सकता है। ईरान पर हुए हमलों के बाद प्योंगयांग की बढ़ती चिंताओं ने यह साफ कर दिया है कि आधुनिक युद्ध केवल सीमाओं तक सीमित नहीं रहे, बल्कि अब नेतृत्व और रणनीतिक नियंत्रण भी सबसे बड़े निशाने बनते जा रहे हैं।

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