दमा/अस्थमा में हमारे अनुभव: लक्षणों के अनुसार चिकित्सा
समय के अनुसार बढ़ने – घटने के आधार पर चिकित्सा :
*अर्द्धरात्री के बाद —–आर्स एल्ब
*2 से 3 बजे रात्री को -__ काली आर्स , काली कार्ब
*3 बजे रात्री-_- काली कार्ब , काली नाइट्रिक
*4 से 5 बजे सुबह__ नेट्रम सल्फ , स्टेनम – भेट
*7 बजे सुबह_&& काली आयोड
*8 बजे सुबह __डायस्कोरिया
* 10 बजे सुबह _फेरम मेट , आयोडम .
*11 बजे सुबह__ एगारिकस
*1 बजे दोपहर__ कैक्टस जी
*2 बजे दोपहर__ चेलीडोनियम
*4 बजे शाम __फॉस्फोरस
*5 बजे शाम__ इग्नेशिया
*5 से 7 बजे शाम यदि दमा *मौसम परिवर्तन के कारण बढ़े_ नेट्रम म्यूर आर्स एल्ब , डल्कामारा – मैग . म्यूर
* दमा सिर पीछे करने से बढ़े_& स्पोंजिया
* दमा बोलने से बढ़े __ड्रोसेरा
*दमा – क्रोध से बढ़े __नक्स वोमिका , कैमोमिला , दमा – खुली हवा से कम हो __एमोन कार्ब दमा – ठंडी हवा से कम हो ___- कार्बो देज , कैमोमिला , मर्क सोल . मिश्रित औषधियां जो दमा के सभी अवस्थाओं में लाभदायक है .
( 1 ) कैशिया सोफेरा Q , बलाटा ऑरिएन्टलिस Q , सिनेगा Q , निन्डेलिया Q , यी सैण्टा Q : – इन सभी को बराबर मात्रा में 30ML शीशी में बना लें . शुशुम पानी के साथ , 20 बूंद दवा लें . 3-3 घंटे पर , बच्चे की इसी अनुपात में कम करके देना चाहिए .।
( 2 ) एसपिडोस्पर्मा Q , ब्लाटा ओरिएण्टलिस Q , इपिकाक Q – 5-5 बूंद : – सभी को 15 बूंद आधा कप पानी के साथ 3-3 घंटे पर देना चाहिए
( 3 ) काली सल्फ- 6x , काली फॉस- 6x , नेट्रम सल्फ- 6x , मैग फॉस -6 x , फेरम फॉस -6 x : – सभी की 4 गोली एक कप शुशुम पानी के साथ मिलाकर 10-10 मिनट पर उग्रावस्था में देना चाहिए . उग्रावस्था के शमन होने पर सभी से 1 गोली लेकर दिन में चार बार दें .
अन्य टिप्स : →
आर्सेनिक एल्ब दमा की निरापरद रूप से सेवनीय दवा है इसमें कोई दो मत नहीं . – Dr. R. Hughes
श्वसन तंत्र की लकवे में कुरारी काफी लाभदायक है . – Dr Dewey
पुराने दमा के मरीजों में जबकि एक्स – रे देखने कैल्सीफाइड नोड्यूल्स देखने को मिलते हों एवं टी.बी. का इतिहास हो तो बैसीलिनम काफी उपयोगी है . नेट्रम सल्फ और आर्सेनिक एल्ब के फेल होने पर बच्चों के दमा में मोरगन पी . काफी लाभदायक दवा है .
सम्बुकस नाइया बच्चों के दम फुलने वाली खांसी में त्वरित काम करती है , दमा का आक्रमण रात के मध्य में होता है . बच्चा खांसते – खांसते लोटपोट हो जाता है . सोलेनम जैन्योकारपस , मकर ध्वज , बच्चों के हफनी , खांसी , दम फुलने में काफी रामबाण भारतीय औषधि है . → टाइलोफोरा इंडिका जिसे ‘ दमबेल ‘ भी कहते हैं काफी अच्छी दवा है .
इसमें ब्रांकियल अस्थमा को दूर करने की विशेष शक्ति है . भारतीय वैद्य इस पेड़ का एक पत्ता 7 दिन तक रोज सुबह चबाने के लिए देकर दमा ठीक करते हैं . इसे मदर टिचर या 6 शक्ति में प्रयोग करें जितना हमारे फेफड़े में सामान्य तौर पर हवा भरने की क्षमता है . उससे कम हम अपने फेफड़े का प्रयोग करते हैं
श्वास लेने पर सबसे पहले पेट ऊंचा होता है , फिर और गहरा लेने पर छाती फूलती है . श्वास उतना गहरा लेना चाहिए , जितना कि छाती भी फूले . यदि ऐसा आदत डाला जाए या कुछ दिन समग्रतापूर्वक किया जाए तो आदत पड़ जाती है . ऑक्सीजन का स्तर वातावरण में कम हो गया है , और ऊपर से हम श्वास भी कम लेते हैं , कैसे श्वसन तंत्र की बीमारी होगी ? जो यदि सुबह – सबह प्राणायाम या योग करते हैं उनका फेफड़े का व्यायाम हो जाता है
और शरीर का जितना ऑक्सीजन चाहिए मिल जाता है . ऐसे लोगों में फेफड़े के रोग की समस्या नहीं मिलती है . यदि किसी को दमा हो जाए और गहरे श्वास का अभ्यास किया जाए या प्राणायाम किया जाए तो दमा से बिल्कुल छुटकारा मिल जाएगा . शरीर का एक नियम है कि इसे जैसा बनाओ वैसा बनेगा , जिस अंग का हम प्रयोग कम करते जाएंगे , वह अंग निष्क्रिय होकर विलुप्त भी हा जाएगा . शरीर में ऐपेन्डिक्स से कोई काम नहीं तो उसे हटा भी दिया जाए तो कोई हानि नहीं
आंख के निक्रेटिंग मेम्ब्रेन भी विलुप्त के कगार पर है . क्योंकि अब इसकी जरूरत नहीं है . अगर फेफड़े का प्रयोग भी हम कम से कम करेंगे तो वह भी अपनी क्षमता खोता जाएगा
और व्याधियों का घर बन जाएगा . यदि श्वास का सही उपयोग , प्राणायाम और श्वसन पर ध्यान , इनको यदि अपने दिनचर्या में शामिल कर लिया जाए तो सिर्फ बीमारी से ही मुक्ति न मिलेगी बल्कि शरीर इतना पवित्र हो जाएगा कि शरीर की ऊर्जा परमात्मा की ओर बढ़ने लगेंगे . श्वास को प्राण वायु भी कहते हैं
ये यदि शरीर में चलते हैं तो प्राण है , नहीं तो नहीं है . हमें लगता है कि हम श्वास लेते हैं छोड़ते हैं पर वस्तुतः ऐसा नहीं होता , हम ले सकते है जरूर छोड़ भी सकते हैं क्योंकि श्वास में ऐच्छिक और अनैच्छिक दोनों क्रियाएं चलती है पर सामान्य तौर पर श्वास अपने आप आती जाती है . जब व्यक्ति नींद में जाता है , तो कौन श्वास लेता है ? जब व्यक्ति बेहोश होता है तब कौन श्वास लेता है ? वो तो हमारा अहंकार है जो कहता है मैं हूं . मैंने श्वास लिया . कहने को मजबूर करता है

